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घर से भागे हुए प्रेमियों को हिमाचल के इस मंदिर में मिलता है आसरा
हिमाचल के कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचूल महादेव का मंदिर घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देने के लिए माना जाता है।
घर से भाग जाने वाले प्रेमियों को दुनिया भर में कितनी दिक्कते होती है ये तो हमने सुना और देखा भी होगा। कई बार होता है कि इन प्रेमी जोड़े के पास सिर छिपाने के लिए कोई आसरा भी नहीं होता है।
और घर से भागे हुए प्रेमियों को लेकर लोगों की नजरें भी बदल जाती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मंदिर जहां घर से भागे गए प्रेमी जोड़ो को रहने के लिए आसरा दिया जाता है।
हिमाचल के कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचूल महादेव का मंदिर घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देने के लिए माना जाता है। ये मंदिर महाभारत काल जितना प्राचीन है। आइए जानते है इस मंदिर के बारे में।

यहां आने के बाद कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है
पांडव कालीन शांघड़ गांव में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इन्ही में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर। शंगचूल महादेव की सीमा में किसी भी जाति के प्रेमी युगल अगर पहुंच जाते हैं तो फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा रहते हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

देवता की शरण में
यहां तक की प्रेमी युगल के परिजन भी उससे कुछ नहीं कह सकते। शंगचुल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र करीब 100 बीघा का मैदान है। जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी युगल पहुंचता है वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है।
यहां भागकर आए प्रेमी युगल के मामले जब तक सुलझ नहीं जाते तब तक मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं।

जल गया था यह मंदिर दोबारा निर्माण किया गया
2015 में आधी रात को अचानक से मंदिर सहित 20 मूर्तियां व 3 मकान में आग लग गई थी। द्वापर युग में पांडवों के समय में बने इस शंगचुल महादेव जलकर राख हो गया था। इसके बाद इसका फिर निर्माण करवाया गया।

पुलिस का आना भी है मना
अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान लेकर आना भी मना है। न कोई हथियार लेकर यहां प्रवेश कर सकता है और न ही किसी प्रकार का लड़ाई झगड़ा तथा ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता है। यहां देवता का ही फैसला मान्य होता है।

ये है मान्यता
गांव में ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रूके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए यहां आ गए। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ बिगाड़ सकता। महादेव के डर से कौरव वापस लौट गए।
तब से लेकर आज तक जब भी कोई समाज का ठुकराया हुआ शख्स या प्रेमी जोड़ा यहां शरण लेने के लिए पहुंचता है, महादेव उसकी देखरेख करते हैं।



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