देखिए, पुराने जमाने में महिलाएं पीरियड में सेनेटरी पेड की जगह क्‍या लगाती थी?

आइए जानते है कि सेनेटरी पैड्स के आधुनिक रूप से पहले महिलाएं कुछ इस तरह के Pads का इस्तेमाल करती थीं।

महिलाओं के पीरियड को लेकर लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल घूमते रहते हैं। पुरुष महिलाओं के पीरियड से जुड़े कई तरह के तथ्‍य जानना चाहते हैं। लेकिन आपके दिमाग में कभी ये सवाल तो जरुर आया होगा कि जब सेनेटरी पैड्स और टेम्‍पोंस नहीं बने थे तब महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए क्‍या उपयोग में लिया करती थी। आपको जानकर हैरत होगी कि उस समय की महिलाएं लकड़ी, रेत, काई, और घास जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करती थी।

बेन फ्रैंकलिन ने सबसे पहले डिस्पोजेबल सेनेटरी पैड्स का अविष्कार किया लेकिन इसका इस्तेमाल पीरियड्स में नहीं, युद्ध के दौरान घायलों के शरीर से बहने वाले खून को रोकने के लिए किया जाता था। इसके बाद व्यवसायिक रूप से महिलाओं के लिए डिस्पोजेबल पैड 1888 मार्केट मिलने लगे। आइए जानते है कि सेनेटरी पैड्स के आधुनिक रूप से पहले महिलाएं कुछ इस तरह के Pads का इस्तेमाल करती थीं।

Papyrus

Papyrus

मिश्र में ब्लीडिंग रोकने के लिए महिलाएं Papyrus का प्रयोग करती थीं। ये एक तरह का लिपि पत्र होता था। पीरियड्स में महिलाएं इसे भिगोकर सेनेटरी पैड्स की तरह इस्तेमाल करती थीं।

मॉस

मॉस

मॉस का मतलब काई होता है. पहले महिलाएं काई इकठ्ठा करके एक कपड़े में लपेट लेती थीं और फिर इसे इस्तेमाल में लाती थीं। ये एक अच्छा आइडिया था लेकिन काई में तो बहुत सारे परिजीवी भी होते थे, जो इंसानी जिस्म में जाने के बाद फ़ायदा तो नहीं ही पहुंचाते होंगे।

रेत

रेत

चाइनीज महिलाएं ब्लीडिंग से बचने के लिए एक कपड़े में रेत भर कर उसे कस के बांध लेती थीं। जब रेत गीला हो जाता था तब रेत को गिराकर कपड़े को फिर से इस्तेमाल करने के लिए सुखाती थीं।

घास

घास

अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया की महिलायें ब्लीडिंग से बचने के लिए घास को पैड की तरह इस्तेमाल करती थीं।

बैंडेज या गॉज पट्टी

बैंडेज या गॉज पट्टी

पहले विश्व युद्ध के समय नर्सों ने सबसे पहले बैंडेज का प्रयोग किया। फ़्रांस में घायल सैनिकों के रक्त को रोकने के लिए बैंडेज का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद नर्सों ने सोचा कि इसे पीरियड्स के दौरान होने वाले ब्लीडिंग को रोकने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

पुराने कपड़े

पुराने कपड़े

आज भी दूरदराज गांवों और छोटे शहरों में बहुत महिलाएं सेनेटरी पैड की जगह पुराने कपड़ों का इस्‍तेमाल करती हैं। हालांकि कई विशेषज्ञों को मानना है कि ये महिलाओं की स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बिल्‍कुल सही नहीं हैं।

देवदार की छाल

देवदार की छाल

देवदार की छाल सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन नेटिव अमेरिका की महिलाओं के पास इसके अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं था। इसे लगाने के पीछे वजह ये थी कि एक तो यह बहुत ही पतला और हल्‍का होता था। दूसरा य‍ह गीलेपन को जल्‍दी सोख लेता है इसलिए ये वहां की महिलाओं का पसंदीदा सेनेटरी पैड रहा होगा।

ऊन

ऊन

रोम में महिलाएं पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग को रोकने के लिए ऊन का इस्तेमाल करती थीं। भेड़ के बालों से ऊन तैयार किया जाता है।

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 लकड़ी

लकड़ी

सोचिए पीरियड के दौरान अपने गुप्‍तांगों के पास लकड़ी का टुकड़ा लगाना। सोचकर ही रोंगेटे खड़े हो जाते हैं। ग्रीक की महिलाएं Lint की लकड़ी को अपने प्राइवेट पार्ट्स में अडजस्‍ट करती थीं जिससे ब्लीडिंग रुक जाए। ये सेनेटरी पैड की तुलना में यह बहुत ही खतरनाक और डरावना उपाय था।

जानवरों की खाल

जानवरों की खाल

ऐसी जगहें जहां ठंड का प्रकोप सबसे ज़्यादा था वहां महिलाएं पशुओं की खाल को पैड की तरह इस्तेमाल करती थीं क्योंकि बर्फ जमी जगहों पर कोई और उपाय भी तो उनके पास नहीं रहा होगा।

सेनेटरी बेल्ट्स

सेनेटरी बेल्ट्स

सेनेटरी पैड्स का सबसे पुराना रूप था सेनेटरी बेल्‍ट यह डायपर की तरह था जिसमें इलास्टिक बेल्ट लगी होती थी और इसमें कॉटन पैड फ़िक्स किया जाता था। इसे पहली बार अट्ठारहवीं शताब्दी के आस-पास बनाया गया था जिसका चलन 1970 के दशक तक रहा।

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ऐसी महिलाएं जो पीरियड्स में कुछ भी इस्तेमाल नहीं करतीं

ऐसी महिलाएं जो पीरियड्स में कुछ भी इस्तेमाल नहीं करतीं

भारत में ऐसी बहुत सी जगहें हैं जहां पैड का प्रचालन नहीं हैं। आदिवासी इलाकों में तो बिलकुल भी नहीं। इसकी एक वजह यह भी है कि भारत में पीरियड्स पर खुल कर कभी बात ही नहीं होती। पिछड़े इलाकों में तो आज भी जिस महिला को पीरियड्स आता है उसे सप्ताह भर तक अशुद्ध समझा जाता हैं। इतने दिन वो अपने ही घर में अछूत हो जाती है और उसे पानी तक छूने नहीं दिया जाता है। और कई जगह तो महिलाओं को पीरियड में दूसरी झोपडि़या या कमरे में रखते थे और वहां कोई नहीं जा सकता था।

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