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गौरी पराशर जोशी : इस IAS लेडी के हिम्मत के आगे ढे़र हो गए बाबा राम रहीम के समर्थक
बीते शुक्रवार सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही राम रहीम को बलात्कार का दोषी घोषित किया, वैसे ही पंचकुला, सिरसा समेत हरियाणा के कई ज़िलों में हिंसा, आगजनी जैसी घटनाएं होने लगी। आलम ये था कि दंगाई, मीडिया कर्मियों और आम लोगों की भी निशाना बना रहे थे।
उपद्रव के ऐसे माहौल में दंगाइयों को संभालना मुश्किल हो रहा था, कुछ जगहों से ऐसी भी ख़बरें आई कि पुलिस वालों ने भाग कर अपनी जान तक बचाई, डर और ख़ौफ़ के इस माहौल में एक ऐसी भी अधिकारी थी, जो इन हालातों से निपटने के लिए जी-जान लगाए हुए था। जी हां हम बात कर रहे हैं पंचकूला की डिप्टी कमिश्नर गौरी पराशर जोशी की।
गौरी पराशर जोशी ने अपने जज्बे और बहादुरी से न सिर्फ रेपिस्ट राम रहीम के समर्थकों को पीछे धकेला बल्कि कपड़े फट जाने पर भी अपनी ड्यूटी पर जमी रहीं।

घायल होने के बाद भी डटी रही ड्यूटी पर
ख़बरों के मुताबिक, पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर गौरी पाराशर जोशी को शहर में कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। यहां तक कि इस दौरान गौरी घायल भी हो गई, पर पीछे नहीं हटी। दंगाइयों से निपटने के दौरान गौरी के कपड़े भी फट गए थे। दंगाई उनकी तरफ़ लाठियां और पत्थर लेकर बढ़ रहे थे।

बेखौफ होकर घूमती रही
गौरी 11 महीने के एक बच्चे की मां भी हैं, इसके बावजूद वो सुबह 3 बजे घर सिर्फ़ इसलिए गईं, ताकि वो लौट सकें। घर जाने से पहले उन्होंने पूरे शहर की स्थिति का जायजा लिया था। उग्र होते डेरा समर्थकों से निपटने के दौरान भी वो सिर्फ़ अपने PSO के साथ अकेली नज़र आई। बिगड़ते हालत को संभालने के लिए आख़िरकार उन्होंने आर्मी के हाथ में कमान सौंप दी।

हाल ही में बनी पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर
2009 बैच की IAS अधिकारी गौरी पाराशर जोशी पिछले साल ही पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर बनी हैं। इससे पहले उनकी पोस्टिंग उड़ीसा के नक्सल प्रभावित इलाके में थी, जहां उन्होंने स्थानीय महिलाओं की मदद के लिए गरीबी से लड़ने संबंधी कार्यक्रम चलाये थे।

नक्सल एरिया में थी पोस्टिंग
गौरी ने अपने करियर में इससे पहले भी नाजूक और गंभीर हालातों का सामना किया है। इससे पहले वह ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाके कालाहांडी में सेवा दे चुकी हैं। वह ओडिशा कैडर की ही आईएएस अफसर हैं और डेपुटेशन पर हरियाणा आई हैं।

दिवार कूद कर बचाई जान
फैसला आने के बाद जब उपद्रवियों ने जब पत्रकारों तथा प्रशासन अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की तो महिला जिलाधीश व उनके सुरक्षा कर्मी दीवार एवं उस पर लगी ग्रिल कठिनता से कूद कर दूसरे भवन में पहुंचे। 9 पत्रकार, जिलाधीश व उनका स्टाफ जब ड्यूटी कर रहे थे तो एकाएक बाबा राम रहीम के समर्थकों ने हमला कर दिया। शरारती तत्वों ने जब पत्रकारों के वाहनों को आग लगा दी व पथराव शुरू किया तो जिलाधीश ने हिम्मत दिखाकर दीवार कूद कर अपने आपको सुरक्षित किया।



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