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बजट 2020: क्या आप जानते हैं कैसे बना बजट शब्द, जाने इससे जुड़ा इतिहास और फैक्ट्स
1 फरवरी को देश का आम बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दूसरी बार देश का बजट पेश करेंगी। इसे लेकर पूरे देश की नजर उनके इस जादुई पिटारे पर टिकी हुई हैं। हर साल नया बजट नई उम्मीद लेकर आता है।
वैसे तो बजट का इतिहास 160 साल पुराना हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बार बजट कब पेश किया गया था और बजट कितने समय में मिलकर बनता है और बजट प्रिंट कहां होता हैं? आइए जानते हैं बजट से जुड़े ऐसे कई दिलचस्प फैक्ट्स, जिसके बारे में आपको भी मालूम नहीं होगा।

जेम्स विल्सन ने पेश किया पहला बजट
जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक भी कहते हैं। भारत में पहला बजट 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में जेम्स विल्सन ने ही पेश किया था। यह उन दिनों की बात है जब भारत एक गुलाम देश था। हालांकि इस वजह से बजट के दौरान भारतीयों को बोलने तक का अधिकार नहीं था।

स्वतंत्र भारत का पहला बजट
स्वतंत्र भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने नवंबर 26 नवंबर 1947 में पेश किया था। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा की गई थी और कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था।

बजट पेश न करने वाले वित्त मंत्री
के.सी. नेगी भारत के ऐसे वित्त मंत्री थे जिन्होंने बजट नहीं पेश किया था। वे केवल 35 दिनों तक वित्त मंत्री रहे।

सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले मंत्री
वित्तमंत्री के रूप में मोरारजी देसाई भारत में सबसे अधिक बार बजट पेश करने वाले मंत्री थे। उन्होंने कुल 10 बजट प्रस्तुत किया।

बीफ्रकेस से बही खाते में बजट
वर्ष 1860 में ब्रिटेन का बजट पेश करते समय विलियम ग्लैडस्टोन ने लाल रंग के ब्रीफकेस का उपयोग किया। इसमें बजट के दस्तावेज लाए गए। भारत में बजट का अध्याय तभी से चला आ रहा था। लेकिन 2019 में पहली बार बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए बजट को बहीखाते के रुप में पेश किया।

हलवा परोसे जाने की रस्म
देश के आम बजट की प्रिंटिंग की प्रक्रिया हलवा परोसे जाने की रस्म के साथ वर्षों से चली आ रही है। एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्रालय के सभी कर्मचारियों को परोसा जाता है। इसके साथ ही बजट की तैयारियों में लगे अधिकारी और कर्मचारियों को अपने परिवार तक से अलग होकर नॉर्थ ब्लॉक के प्रेस में रहना होता है।

6 महीनें लगते है देश का बजट बनने में
बजट बनाने की प्रक्रिया आमतौर पर सितंबर से शुरू हो जाती है, जो 6 महीने तक चलती है। बजट दस्तावेज छपने की प्रक्रिया हलवा सेरेमनी से शुरू हो जाती है। इस बार हलवा सेरेमनी 20 जनवरी को हुई थी

यहां होती है बजट की प्रिंटिंग
पहले बजट की प्रिंटिंग राष्ट्रपति भवन में होती थी, लेकिन 1950 में बजट लीक हो गया जिसके बाद प्रिंटिग के काम को मिन्टो रोड स्थित सरकारी प्रेस में भेज दिया गया। 1980 से बजट नॉर्थ ब्लॉक यानी वित्त मंत्रालय में प्रिंट किया जाता है। बजट की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक सभी कर्मचारियों को मंत्रालय में ही रोका जाता है।

सात दिन कड़ी निगरानी में रहते हैं अधिकारी
बजट पेश किए जाने से सात दिन पहले वित्त मंत्रालय के बजट से जुड़े अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रिंटिंग का काम करने वाले तथा अन्य संबंधी लोग दुनिया से अलग होकर नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय के भूतल में स्थित कक्ष में रहकर बजट को अंतिम रूप देते हैं। इस दौरान इन लोगों पर नजर रखने के लिए खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का दल इनकी आवाजाही पर नजर रखता है।

50 लोगों की टीम तैयार करती है बजट
बजट तैयार करने वाली टीम को बजट कोर ग्रुप कहते हैं, जिसमें सभी विभागों के सचिव और मुख्य आर्थिक सलाहकार होते हैं। कोर ग्रुप के अंडर में करीब 50 लोगों की टीम होती है, जिसे रेवेन्यू सेक्रेटरी (राजस्व सचिव) हेड करते हैं। उनके नीचे दो ज्वाइंट सेक्रेटरी, उनके नीचे तीन-चार डिप्टी सेक्रेटरी और फिर चार से पांच अंडर सेक्रेटरी होते हैं। इन सभी के बाद प्रिंटिंग प्रेस के अधिकारी होते हैं।

फ्रेंच शब्द से मिला बजट
लेकिन क्या आपको पता है यह शब्द मूल रूप से ना हिंदी का है ना अंग्रेजी का, यह फ्रांस की देन है। बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द "बुजे" से हुई है, जिसका उच्चारण "बुगेट" भी किया जाता था। यही शब्द बाद में बदलकर बजट हो गया। बुजे का अर्थ छोटे आकार का चमड़े का बैग होता है जो कि वित्तीय प्रस्तावों को दर्शाने का प्रतीक है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं बजट से जुड़े कुछ अहम और रोचक तथ्य जो आपकी जानकारी में इजाफा करेंगे।



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