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जानें कौन है भारतीय मूल की कमला हैरिस, जो बनीं अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति
पिछले कुछ दिनों से भारत में बिहार इलेक्शन के साथ साथ अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों की सरगर्मियां बहुत तेज थीं। बिहार की जनता ने किसे नेतृत्व का भार सौंपा है, इसका पता 10 नवंबर को हो जाएगा। मगर अमेरिका में अब किसका दौर शुरू होगा इसका फैसला हो चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन ने शानदार जीत दर्ज की है। डोनाल्ड ट्रंप को रोमांचक तरीके से हराकर बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।

वहीं भारतीय मूल की कमला हैरिस ने अमेरिका के चुनाव में इतिहास रच दिया है। अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब बतौर महिला, अश्वेत और साउथ एशियन होकर उपराष्ट्रपति पद का भार संभालेंगी। इस लेख के बारे में जानते हैं कि अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनने वाली कमला हैरिस कौन है?

भारत से है कनेक्शन
कमला हैरिस की मां भारतीय और उनके पिता जमैकाई हैं। कमला हैरिस का जन्म 1964 में ऑकलैंड में हुआ। उनकी माता का नाम श्यामला गोपालन हैरिस और उनके जमैकाई पिता का नाम डोनाल्ड हैरिस है।
कमला हैरिस तमिलनाडु के तुलासेंतिरापुरम से ताल्लुक रखती हैं। आपको बता दें कि यहां उनकी जीत के लिए विशेष पूजा का आयोजन भी किया गया था। चेन्नई से लगभग 350 किलोमीटर दूर इस गांव में हैरिस के नाना पीवी गोपालन रहते थे।

मां ने किया पालन पोषण
कमला हैरिस के पिता स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इकनॉमिक्स के प्रोफेसर थे और मां श्यामला गोपालन स्तन कैंसर वैज्ञानिक रही हैं। कमला हैरिस की मां अपने पति से तलाक हो जाने के बाद अलग हो गई थीं। उन्होंने अकेले ही कमला का पालन पोषण किया। कमला अपनी मां के साथ भारत आती रहा करती थीं और इस तरह वो भारतीय विरासत और संस्कृति के करीब रहीं।

कमला हैरिस की शिक्षा
अपने माता और पिता की तरह कमला हैरिस भी काफी पढ़ी-लिखी हैं। उन्होंने 1998 में, ब्राउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने सैन फ्रांसिस्को डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ऑफिस ज्वाइन कर लिया, जहां उन्हें करियर क्रिमिनल यूनिट का इंचार्ज बनाया गया।

प्रेसिडेंशियल डिबेट चली 90 मिनट तक
चुनाव में जीत हासिल करने के लिए हुई प्रेसिडेंशियल डिबेट में मौजूदा उपराष्ट्रपति माइक पेंस और कमला हैरिस के बीच करीब 90 मिनट तक बहस चली थी। इसमें कमला हैरिस ने मुख्य तौर पर देश में कोरोना वायरस से लड़ने में सरकार के ढीले रवैये पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया था कि ट्रंप प्रशासन को जनवरी में ही कोरोना संकट के बारे में पता था, मगर उन्होंने देश की जनता को इसके बारे में नहीं बताया और इसका खामियाजा तकरीबन दो लाख लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

कमला हैरिस का राजनीतिक सफ़र
कमला हैरिस का दुनिया कि महाशक्ति अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनने का सफ़र काफी दिलचस्प रहा है। उन्हें सबसे पहले साल 2003 में सैन फ्रांसिस्को के काउंटी की डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के तौर पर चुना गया था। इसके बाद वह कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल के पद पर बनी रहीं। कमला हैरिस ने साल 2017 में कैलिफोर्निया से संयुक्त राज्य सीनेटर के रूप में शपथ ली थीं और वो ऐसा करने वाली दूसरी अश्वेत महिला बनी थीं। होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स कमेटी, इंटेलिजेंस पर सेलेक्ट कमेटी, ज्यूडिशियरी कमेटी और बजट कमेटी में भी अपनी सेवा दी।
धीरे-धीरे लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी। हैरिस ने 21 जनवरी, 2019 को 2020 के राष्ट्रपति चुनावों के लिए अपनी खुद की उम्मीदवारी का ऐलान किया था। हालांकि, उन्होंने 3 दिसंबर को इस चुनावी दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया और इसके बाद से वह बाइडेन का खुलकर समर्थन करने उतरीं।



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