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विभाजन के एक साल बाद भी भारत में छपते थे पाकिस्तानी रुपए, जानें इसके पीछे का किस्सा
15 अगस्त को भारत अपना 75 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत से भारी संघर्ष और बलिदान के बाद देश को ये खुशी नसीब हुई थी। इससे एक दिन पूर्व यानी 14 अगस्त 1947 को भारत का बंटवारा करके पाकिस्तान को एक अलग देश का दर्जा दिया गया था। विभाजन के बाद दोनों देशों को चलाना अपने आप में सबसे बड़ा सवाल था।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बंटवारे के तुरंत बाद दोनों देशों ने कैसे काम किया? पाकिस्तान तो उस समय नया-नया मुल्क ही बना था, तब तक तो ऐसी कोई केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली भी नहीं थी। आरबीआई उस दौरान भारत और पाकिस्तान - दोनों देशों के लिए नोटों की छपाई करते थे। विभाजन के तुरंत बाद पाकिस्तान के लिए संभव नहीं था कि वो एक सेंट्रल बैंक बना सके।

भारत में छपा करते थे पाकिस्तानी नोट
15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद मार्च 1948 तक केवल भारतीय नोट ही पाकिस्तान में चलते थे। अप्रैल 1948 से पाकिस्तान में भारत में चल रहे सभी तरह के नोटों के सर्कुलेशन को बंद कर दिया। इसके स्थान पर भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल 1948 से पाकिस्तान सरकार के लिए नोट छापना शुरू किया। इन नोटो का प्रयोग केवल पाकिस्तान में ही हो सकता था।

आरबीआई गवर्नर के साइन होते थे नोट
पाकिस्तान के लिए नासिक स्थित सिक्युरिटी प्रेस में नोट छपा करते थे। नोट पर आरबीआई के गवर्नर के ही साइन होते थे। नोट पर अंग्रेजी व उर्दू में गवर्नमेंट ऑफ पाकिस्तान और हुकूमत-ए-पाकिस्तान लिखा होता था।

ये नोट छपते थे भारत में
तब आरबीआई पाकिस्तान के लिए 1,5,10 और 100 रुपये के लिए नोट छापता था। पाकिस्तान में 1953 तक भारत से ही करेंसी नोट छपकर आते रहे। इसी साल पाकिस्तान में सेंट्रल बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की स्थापना करने से देश में खुद नोट छापना शुरू किया था।



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