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अंतरिक्ष में किसी एस्ट्रोनॉट की मौत के बाद कैसे होता है शव का अंतिम संस्कार? नासा एजेंसी ने किया खुलासा
भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और नासा के दो अन्य एस्ट्रोनॉट बोइंग स्टारलाइनर में आए तकनीकी खराबी के बाद से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। उनकी वापसी को लेकर नासा ने कुछ स्पष्ट नहीं कहा है। ऐसे में कई सवाल उठते है। इन्हीं में से एक है कि अगर किसी एस्ट्रोनॉट की मुत्यु स्पेस मिशन के दौरान हो जाए तो ऐसी स्थिति में क्या होगा?
अंतरिक्ष में शव के साथ क्या होता है? शव को नीचे कैसे लाया जाएगा? नीचे लाया भी जा सकता है या नहीं? इस पर नासा अमेरिकी स्पेस एजेंसी का कहना है है कि अगर किसी एस्ट्रोनॉट की मौत धरती से दूर किसी लंबे मिशन के दौरान हो जाती है, तो शव को वापस लेकर आने के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल है।

शव को लेकर नासा का प्रोटोकॉल है अलग-अलग
नासा के प्रोटोकॉल के अनुसार अगर स्पेस मिशन के तहत धरती की निचली कक्षा वाले मिशनों में किसी एस्ट्रोनॉट की मौत हो जाती है तो क्रू शव को एक कैप्सूल में रखकर कुछ ही घंटों में धरती पर भेजे देता है।
अगर वहीं चंद्रमा पर किसी की मौत हो तो कुछ ही दिनों के अंदर शव वापस आ सकता है। ऐसे मामलों में शव को संभालने से ज्यादा क्रू को वापस धरती पर लाना ज्यादा जरूरी होता है।
मंगल ग्रह से शव लाना मुश्किल
वहीं अगर किसी की मौत पृथ्वी से करोड़ों मीलों की दूरी पर मंगल ग्रह पर हो जाती है तो ऐसे में स्पेस क्रू वापस नहीं आता है। तब तक शव को किसी अलग चैंबर या खास तरह के बॉडी बैग में रखा जाता है और मिशन खत्म होने के बाद ही लाश बाकी क्रू के साथ धरती पर वापस लौटता है।
दूसरे ग्रह में नहीं दफना सकते हैं
प्रोटोकोल के मुताबिक किसी भी शव को दूसरे ग्रह की सतह पर दफनाया नहीं जा सकता है क्योंकि शव में पनपने वाले बैक्टीरिया और बाकी सूक्ष्म जीव उस ग्रह के सतह को दूषित कर सकते हैं। पृथ्वी की तुलना में अन्य ग्रहों पर ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। ऐसे में आग जलाने के लिए बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी। स्पेस क्रू केजीवित सदस्यों की सुरक्षा के लिहाज ऐसा नहीं किया जाता है।
21 लोग स्पेस में मर चुके हैं अब तक
अभी तक स्पेस में स्पेसक्राफ्ट में हुए तकनीकी खराबी की वजह से 21 अंतरिक्ष यात्री अपनी जान गवां चुके हैं। जिसमें पूरा क्रू ही मारा गया था। वहीं अगर किसी व्यक्ति की मौत स्पेस में वॉक करते हुए किसी वजह से हो जाती है तो उसकी बॉडी स्पेस में तैरने लगेगी और अगर वह अंतरिक्ष में किसी चीज से नहीं टकराती है तो उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए गुरुत्वाकर्षण के कारण लाश वायुमंडल के संपर्क में आने के बाद वहां पहुंचते ही तुरंत जल जाएगी।



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