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National Milk Day 2023: श्वेत क्रांति के जनक डॉ. कुरियन की याद में मनाया जाता है दुग्ध दिवस, जानें इतिहास
National Milk Day 2023: राष्ट्रीय दुग्ध दिवस भारत में हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन डॉ. वर्गीस कुरियन के जन्मदिन को समर्पित है, जिन्हें भारतीय दुग्ध क्रांति के जनक के तौर पर याद किया जाता है। यह दिन कई मायनों में ख़ास है। इस दिन न केवल डॉ. कुरियन के योगदान की सराहना की जाती है बल्कि यह भी देखा जाता है कि भारत में दुग्ध उद्योग में कितना सामाजिक और आर्थिक विकास हुआ है।
गौरतलब है कि 26 नवंबर 1921 को केरल के कोझिकोड में महान डॉ. वर्गीस कुरियन का जन्म हुआ था। आइये इस मौके पर जानते हैं हर साल मनाये जाने वाले नेशनल मिल्क डे के बारे में कुछ ख़ास बातें:

डॉ. वर्गीस कुरियन का योगदान
डॉ. कुरियन ने भारत को दुग्ध उत्पादन में विश्वस्तर पर ले जाने के लिए "श्वेत क्रांति" की योजना पर काम किया। इसके माध्यम से, उन्होंने देशभर में सहकारी दुग्ध किसानों के संघटन को प्रोत्साहित किया और उन्हें तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की।
उन्होंने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को समृद्धि प्रदान करना और देशभर में दुग्ध उत्पादों की सप्लाई सुनिश्चित करना था।

डॉ. कुरियन ने कृषि और उद्योग में नई सोच को प्रोत्साहित किया और उन्होंने सही समय पर सही तकनीकी उपायों का अध्ययन किया, जिससे देश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई। यही वजह है कि उन्हें "Father of the White Revolution" कहा जाता है।
डॉ. वर्गीस कुरियन का योगदान देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण था, और उनका जीवन आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
दूध का महत्व

आम जीवन की कल्पना दूध के बिना कर पाना बहुत मुश्किल है। बचपन से ही मुख्य आहार के तौर पर दूध ही दिया जाता है। व्यक्ति के शारीरिक विकास के लिए दूध बहुत जरूरी है। दूध हमारे शरीर को कैल्शियम की आपूर्ति करता है जो हड्डियों, दांतों और मस्तिष्क के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दूध तनाव, स्ट्रेस और अनिद्रा को दूर करता है। दूध शरीर को पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करता है। दूध कब्ज को दूर करके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। थकान महसूस होने पर दूध पीने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। दूध को इतना पवित्र माना जाता है कि इसका इस्तेमाल धार्मिक कार्यों और त्योहारों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
दुग्ध दिवस मनाने का महत्व
दुग्ध दिवस का महत्व इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन शरीर को दूध से होने वाले फायदों को समझाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और दूध उत्पादकों के महत्व को समझाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं ताकि लोग उनके महत्व को समझें। राष्ट्रीय दुग्ध दिवस एक ऐसा सुनहरा अवसर है जो दूध और दुग्ध उत्पादों के सामाजिक और पोषण से जुड़े संदेशों को प्रोत्साहित करता है, जिससे लोग इसका सही उपयोग करें और उसका लाभ उठाएं।
राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का प्रमुख उद्देश्य है दुग्ध पालन और इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। इस मौके पर कृषि, उत्पादन, और बाजारी तथा सहकारी मॉडल्स को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएं और पहलें की जाती हैं, ताकि किसानों को समृद्धि मिले और उनके जीवनस्तर में बेहतरी आये।

जानें क्या कहते हैं आंकड़ें?
संयुक्त राष्ट्र के एफओ (खाद्य और कृषि संगठन) के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया का 21 से 23 प्रतिशत दूध भारत में उत्पादित होता है। भारत में श्वेत क्रांति दुग्ध उत्पादन सहकारी डेयरियों के माध्यम से हुई थी और यह एक बहुत ही सफल ऑपरेशन था। इसका श्रेय वर्गीस कुरियन को जाता है और सहकारी दुग्ध उत्पादन के कार्य ने दुनिया भर में सहकारी समितियों का झंडा बुलंद किया है। भारत में 26 नवंबर को दुग्ध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय एनडीडीबी (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड), आईडीए (इंडियन डेयरी एसोसिएशन) सहित देश के प्रमुख दूध उत्पादक संगठनों ने संयुक्त रूप से लिया था।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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