Latest Updates
-
Spinal Muscular Atrophy: क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी? जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज -
Karwa Chauth 2026 Sargi: करवा चौथ की सरगी में क्या-क्या होता है? जानें सरगी खाने का सही समय -
Karwa Chauth Puja During Periods: करवा चौथ पर पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? जानें व्रत और पूजा के नियम -
त्योहारों पर मिठाई खरीदते समय रहें सावधान, इन 5 तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Karwa Chauth 2026: क्या होता है बायना? जानिए करवा चौथ पर बहू अपनी सास को क्या दे -
Bank Holidays November 2026: नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
अकेले में हार्ट अटैक आने पर तुरंत करें ये 3 काम, बच सकती है जान, डॉक्टर ने बताए इमरजेंसी टिप्स -
Kartik Month 2026: कब से शुरू होगा कार्तिक मास? जानें सही तारीख, तुलसी पूजा का धार्मिक महत्व, नियम और विधि -
Valmiki Jayanti 2026 Wishes: रामायण की रचना...इन संदेशों के जरिए अपनों को दें वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं -
Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन-धान्य से भरा रहेगा घर
Navreh 2026: सुबह उठते ही क्यों देखा जाता है 'चावल और जंत्री'? जानें इस कश्मीरी परंपरा का राज
History Of Navreh Festival Kashmir 2026: हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के आगाज के साथ ही 19 मार्च 2026 को कश्मीरी समाज अपना सबसे बड़ा पर्व 'नवरेह' मनाएगा। इस दिन की सबसे अनूठी रीत है 'थाल भराई', जिसे ब्रह्म मुहूर्त में देखना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस सजी हुई थाली में आखिर ऐसा क्या होता है जो सुख, समृद्धि और ज्ञान के द्वार खोल देता है?
अगर आप भी इस बार नवरेह मनाने की तैयारी कर रहे हैं या इस खूबसूरत संस्कृति को जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आइए जानते हैं थाली में रखी 10 पवित्र वस्तुओं का धार्मिक महत्व और उनसे जुड़ी मान्यताएं।

नवरेह की थाली: क्या है 'थाल भराई' की परंपरा?
नवरेह की पूर्व संध्या पर घर की बड़ी बुजुर्ग महिला एक कांसे की थाली में कुछ विशेष वस्तुएं सजाती हैं, जिसे रात भर ढक कर रखा जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में परिवार का हर सदस्य सबसे पहले इस थाली के दर्शन करता है।
थाली में रखी 10 पवित्र चीजें और उनका महत्व
चावल (Uncooked Rice): यह बहुतायत और समृद्धि का प्रतीक है। चावल के दर्शन का अर्थ है कि पूरे साल घर में अन्न के भंडार भरे रहेंगे।
दही (Curd): दही पूर्णता, स्थिरता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
जंत्री या पंचांग (Jantri): यह सबसे महत्वपूर्ण है। जंत्री के दर्शन का अर्थ है समय का सम्मान करना और आने वाले समय के ग्रहों-नक्षत्रों की चाल से अवगत होना।
सिक्का (Coins): यह धन और लक्ष्मी की कृपा का संकेत है।
कलम और दवात (Pen & Inkpot): कश्मीरी पंडितों के लिए विद्या सर्वोपरि है। कलम ज्ञान, बुद्धि और माता सरस्वती का प्रतीक है।
अखरोट (Walnuts): आमतौर पर 4 अखरोट रखे जाते हैं, जो जीवन के चार आयामों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को दर्शाते हैं।
फूल (Flowers): ताजे फूल (अक्सर नारकचू का फूल) जीवन में खुशबू और वसंत के आगमन का प्रतीक हैं।
दर्पण (Mirror): आईना खुद को जानने और सत्य के दर्शन का प्रतीक है।
नमक (Salt): नमक जीवन में स्वाद, ऊर्जा और बुरी नजर से सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।
पका हुआ चावल या रोटी (Wuer): यह पूर्वजों के आशीर्वाद और भोजन की शुद्धता का प्रतीक है।
जंत्री और चावल ही क्यों हैं सबसे खास?
कश्मीरी परंपरा में 'समय' (काल) और 'अन्न' को ईश्वर का रूप माना गया है। जंत्री देखने का अर्थ है कि हम नए साल के पंचांग को स्वीकार कर रहे हैं और आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। वहीं चावल (धान) को कश्मीर की धरती का 'सोना' माना जाता है, इसलिए इसके दर्शन को मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद माना जाता है।
हाँ, ये सभी त्योहार हिंदू नववर्ष के रूप में मनाए जाते हैं। नवरेह कश्मीर की विशिष्ट परंपरा है, जबकि उगादी दक्षिण भारत और गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र में मनाया जाता है।
थाली को रात में सजाया जाता है ताकि सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले पवित्र वस्तुओं के दर्शन हो सकें, जिससे दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ हो।



Click it and Unblock the Notifications
