Latest Updates
-
Hanuman Jayanti 2026 Wishes: अंजनी के लाल तू...इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें हनुमान जयंती की शुभकामनाएं -
Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes: 'ॐ हनुमते नमः', इन श्लोकों व संदेशों से दें हनुमान जयंती की बधाई -
Aaj Ka Rashifal, 2 April 2026: मेष से मीन तक, जानें हनुमान जयंती पर सभी 12 राशियों का राशिफल -
Hanuman Jayanti 2026 Upay: हनुमान जयंती पर बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर मंगल गोचर का शुभ संयोग, वृषभ सहित इन 5 राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जी के इन 12 चमत्कारी नामों के जाप से मिलेंगे अनगिनत लाभ, हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति -
Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Odisha Day 2026 Wishes: उत्कल दिवस...ओडिशा स्थापना दिवस के मौके पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
April Fool's Day 2026 Shayari: अप्रैल फूल डे पर दोस्तों-यारों को भेजें ये फनी शायरियां, रोक नहीं पाएंगे हंसी -
April Fool's Day 2026 Wishes: मूर्खों के सरताज...अप्रैल फूल पर दोस्तों-रिश्तेदारों को भेजें ये फनी मैसेज
Operation Sindoor: सुहागिन क्यों लगाती हैं सिंदूर, हिंदू धर्म में क्या है इसका महत्व और इतिहास
Operation Sindoor : 22 अप्रैल, मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में आतंकियों ने करीब 28 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि हमले का निशाना सिर्फ पुरुष थे, जिनमें कई विवाहित पुरुष भी शामिल थे। इससे कई महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। इसी आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को बुधवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसमें लगभग 90 आतंकियों के मारे जाने की खबर है।
इस ऑपरेशन को "सिंदूर" नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह उन महिलाओं के उजड़े सुहाग का प्रतीकात्मक जवाब था, जिनके पति इस आतंकी हमले में मारे गए। सिंदूर भारतीय संस्कृति में विवाह, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक है। इसका नाम लेकर भारत ने आतंकियों को संदेश दिया कि जब किसी महिला का सिंदूर छीनने की कोशिश की जाती है, तो जवाब करारा होता है। आइए जानते है हिंदू धर्म में इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व-

सिंदूर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्म में सिंदूर (Vermilion) का अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह विवाहित महिलाओं के सौभाग्य, समर्पण और उनके वैवाहिक जीवन की स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर का संबंध सीधे मां पार्वती से जोड़ा जाता है, जिन्होंने भगवान शिव से विवाह के बाद पहली बार इसे अपनी मांग में सजाया था। तभी से यह परंपरा आरंभ हुई।
सिंदूर को देवी लक्ष्मी और दुर्गा से भी जोड़ा जाता है। यह शक्ति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है। यह पति-पत्नी के रिश्ते को भी मजबूत करता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक रूप से सिंदूर में पारा (मर्करी), हल्दी और चूना होता है। इसे मांग के उस स्थान पर लगाया जाता है, जो मस्तिष्क के फ्रंटल लोब से जुड़ा होता है। इससे मानसिक तनाव में कमी आती है और तंत्रिका तंत्र को शांति मिलती है। इस दृष्टिकोण से भी सिंदूर न सिर्फ धार्मिक, बल्कि चिकित्सकीय रूप से भी लाभदायक माना गया है।
सिंदूर का इतिहास
सिंदूर का उल्लेख रामायण काल से मिलता है। कथा के अनुसार, एक बार जब सीता माता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं, तो हनुमान जी ने इसका कारण पूछा। सीता माता ने बताया कि यह सिंदूर भगवान श्रीराम की प्रसन्नता और उनके दीर्घायु जीवन की कामना के लिए है। इस भाव से प्रभावित होकर पूरे राज्य में सिंदूर को शुभ माना जाने लगा और तभी से यह परंपरा समाज में प्रचलित हो गई।
सिंदूर कैसे बनता है?
सिंदूर एक विशेष पौधे से प्राप्त किया जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 10-11 फीट होती है। इसके फलों से बीज निकालकर उन्हें पीसकर प्राकृतिक सिंदूर बनाया जाता है। यह वही असली सिंदूर होता है जो देवताओं जैसे हनुमान जी, गणेश जी और देवी दुर्गा को अर्पित किया जाता है। वहीं, कुमकुम हल्दी और चूने से तैयार होता है, जिसे अक्सर सिंदूर समझने की गलती की जाती है।



Click it and Unblock the Notifications











