Karni Mata Temple: बीकानेर के ‘चूहों वाले मंदिर’ में पीएम मोदी ने टेका माथा, यहां सफेद चूहा दिखना होता है शुभ

Karni Mata Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राजस्थान के बीकानेर जिले के दौरे पर पहुंचे। अपनी यात्रा की शुरुआत उन्होंने देशनोक स्थित करणी माता मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ की। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे। यह दौरा ऑपरेशन सिंदूर के बाद राज्य की उनकी पहली यात्रा है, जिसमें वह भारतीय वायुसेना के नाल एयरबेस का निरीक्षण करेंगे। बीकानेर का करणी माता का मंदिर जग विख्‍यात है, करणी माता को दुर्गा का अवतार कहा जाता है।

Karni Mata Temple

करणी माता मंदिर की खासियत

करणी माता मंदिर को "चूहों वाला मंदिर" या "Rat Temple" के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बीकानेर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक कस्बे में स्थित है और इसे माता करणी देवी को समर्पित किया गया है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां लगभग 25,000 से अधिक चूहे रहते हैं, जिन्हें श्रद्धालु बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ "काबा" कहकर पुकारते हैं।

यहां चूहों के साथ इंसानों का सह-अस्तित्व देखने को मिलता है। भक्तों का मानना है कि ये चूहे करणी माता के वंशज हैं और इनका दर्शन शुभ फलदायी होता है। खासकर यदि किसी को सफेद चूहे के दर्शन हो जाएं, तो उसे देवी करणी माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि सफेद चूहा स्वयं माता करणी का रूप होता है जो विशेष भक्तों को दर्शन देता है।

पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार करणी माता के भाई की मृत्यु हो गई थी। करणी माता ने भगवान शिव से विनती की कि उनके भाई को पुनर्जीवित किया जाए। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की, लेकिन इस शर्त पर कि उनका भाई चूहे के रूप में पुनः जन्म लेगा। करणी माता ने यह शर्त स्वीकार की और तभी से यह मान्यता बन गई कि करणी माता के परिवार के सदस्य चूहों के रूप में इस मंदिर में निवास करते हैं।

क्यों दिया जाता है चूहों की जूठन को प्रसाद?

इस मंदिर की एक और अद्भुत परंपरा है, यहां भक्तों को चूहों द्वारा खाया गया भोजन, यानी जूठन, प्रसाद के रूप में दिया जाता है। मान्यता है कि यह प्रसाद अत्यंत शुभ होता है और इससे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। किसी भी श्रद्धालु द्वारा चूहे को गलती से भी नुकसान पहुंचाना पाप माना जाता है, और ऐसी स्थिति में श्रद्धालु को मंदिर में चांदी का चूहा दान करना होता है।

सैनिकों की आस्था

करणी माता मंदिर न केवल आम श्रद्धालुओं बल्कि सेना के जवानों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र है। बीकानेर एक सीमावर्ती जिला है और यहां तैनाती से पहले सेना के जवान भी इस मंदिर में आकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। यह मंदिर आस्था, परंपरा और चमत्कारों का अनोखा संगम है।

करणी माता के वंशज कर रहे हैं संचालन

इस भव्य और रहस्यमय मंदिर का संपूर्ण संचालन करणी माता के वंशजों द्वारा किया जाता है, जिन्हें "चारण" समुदाय के लोग माना जाता है। वे इस मंदिर की देखरेख करते हैं और यह मान्यता है कि माता उन्हीं को बुलाती हैं जिनपर उनकी कृपा होती है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और यह विश्वास रखते हैं कि करणी माता हर इच्छित कार्य को पूरा करती हैं।

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