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दूरदर्शन के इस डेली सोप ने गर्भपात और हस्तमैथुन जैसी समस्याओं से खींचा 40 करोड़ लोगों का ध्यान
दूरदर्शन के इस डेली सोप मैं कुछ भी कर सकती हूं सीरियल ने बनाया नया रिकॉर्ड 400 मिलियन लोगों ने देखा इस शो को।
अक्सर हम टीवी पर चैनल बदलते समय दूरदर्शन को देखते ही रिमोट से नम्बर बदल देते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि वहां हमें कुछ देखने को नहीं मिलेगा। दूरदर्शन के एक डेली सोप ने दुनियाभर में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला डेली सोप बन गया है। जी हां दूरदर्शन में प्रसारित ये डेली सोप 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 400 मिलियन यानी 40 करोड़ से ज्यादा लोग इस सीरियल को देख चुके हैं।
यह डेली सोप महिलाओं से जुड़े सामाजिक बुराइयों पर आधारित है। इस डेली सोप में भ्रष्टाचार, सेक्स एजुकेशन, भ्रूण हत्या, हैरसमेंट और पितृसत्ता जैसे तमाम गंभीर मुद्दों को दिखाया गया है। सीरियल में एक महिला डॉक्टर है, जो सामाजिक बुराइयों से लड़ रही है। स्नेहा गांव की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए समाज से लड़ती है।

महिलाओं से जुड़े सामाजिक बुराइयों पर आधारित है
इस डेली सोप में भ्रष्टाचार, सेक्स एजुकेशन, भ्रूण हत्या, हैरसमेंट और पितृसत्ता जैसे तमाम गंभीर मुद्दों को दिखाया गया है। सीरियल में एक महिला डॉक्टर है, जो सामाजिक बुराइयों से लड़ रही है। स्नेहा गांव की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए समाज से लड़ती है।

14 भाषाओं में 50 देशों में दिखाया जा रहा है
सीरियल के पहले एपिसोड में दिखाया गया कि कैसे लेट एबॉर्शन की वजह से डॉक्टर माथुर की बहन की मौत हो जाती है। 2014 में शुरू हुए, इस सीरियल ने अपने 170 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। दूरदर्शन के मुताबिक, 14 भाषाओं में बना ये सीरियल 50 देशों में प्रसारित किया जा रहा है। सीरियल को 240 रेडियो चैनलों और यू-ट्यूब पर भी प्रसारित किया गया है।

फेसबुक पर एक मिलियन फॉलोअर्स
न सिर्फ यू ट्यूब पर बल्कि सोशलमीडिया पर भी इस सोप की गजब की फैन फॉलोइंग देखी जा रही हैं। जहां फेसबुक पर इसके एक मिलियन फॉलोअर्स है तो वहीं Twitter पर इस डेली सॉप के कुछ 1617 फॉलोअर्स भी है।

पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आइडिया
सीरियल का आइडिया, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की निर्देशक पूनम मुटरेजा का था। सीरियल की सफ़लता पर ख़ुशी जताते हुए पूनम ने कहा, 'पता था कि लोग इस सीरियल को पंसद तो करेंगे, लेकिन इतना अधिक पसंद करेंगे ये नहीं पता था।



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