Latest Updates
-
प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हैं? फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए फॉलो करें एक्सपर्ट की बताई ये 5 टिप्स -
Bank Holidays 2026: रक्षाबंधन पर बैंक रहेंगे बंद, क्या 25-26 को भी छुट्टी? यहां देखें छुट्टियों की लिस्ट -
IND vs SL: ध्रुव जुरेल का तूफानी शतक, कोलंबो टेस्ट में भारत ने श्रीलंका पर कसा शिकंजा -
Miss Universe India 2026: कौन हैं केजिया लिज मेजो? 19 की उम्र में जीता मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब -
Eid-E-Milad-Un-Nabi 2026: ईद मिलाद-उन-नबी कब है? जानें तारीख, महत्व और कैसे मनाया जाता है ये दिन -
रक्षाबंधन 2026 पर पंचक और चंद्र ग्रहण का साया! राखी बांधना शुभ या अशुभ? जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त -
इन 5 लोगों के लिए जहर है साबूदाना, व्रत में भूलकर भी न करें सेवन -
Sawan 2026 Last Somwar: सावन के आखिरी सोमवार पर करें ये खास उपाय, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा -
दिल्ली-NCR में मूसलाधार बारिश का अलर्ट: 19 राज्यों में IMD की चेतावनी, घर से निकलने से पहले पढ़ें ये जरूरी गाइड -
Putrada Ekadashi Vrat Katha: पुत्रदा एकादशी पर जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, पूरी होगी संतान से जुड़ी हर कामना
पाकिस्तान में है वो जगह, जहां भगतसिंह को दी गई थी फांसी
23 मार्च 1931 का ये दिन इतिहास के पन्नों में काली स्याही से दर्ज है ये वो ही दिन है जब शहीदे आजम भगतसिंह को उनके साथियों सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटका दिया था। इन तीनो क्रांतिकारियों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया, इसके बाद देश में क्रांति लहर सी छा गई।
जब जब ये दिन आता है लोग उस किस्से को जरुर याद करते हैं कि कैसे छल और कपट के साथ जनता के आक्रोश से डरते हुए तय समय से पहले ही इन जाबांजों को फांसी दे दी गई।
जहां भगतसिंह और उनके साथियों को फांसी की सजा दी गई थी, वो जगह आज पाकिस्तान में हैं, और वहां अब लाहौर सेंट्रल जेल ( जहां भगतसिंह को कैद कर रखा था) को तोड़ नई ईमारत बना दी गई है और जहां शहीदे आजम के फांसी दी गई थी, वहां अब एक चौराहा बना दिया गया हैं।

फांसी घर को बना दिया चौराहा..
साल 1961 में लाहौर सेंट्रल जेल को धवस्त कर दिया गया था और उसकी जगह एक रिहायशी कॉलोनी बनाई गई थी और जहां फांसी घर था वहां एक चौराहा बन गया था जिसका नाम शादमान चौक पड़ गया था। ये चौराहा उस जगह स्थित है जहां कभी लाहौर सेंट्रल जेल में क़ैदियों को फांसी दी जाती थी। स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 में यहीं फांसी पर लटकाया गया था।

एक दिन पहले दे दी थी फांसी
तस्वीर में जो जगह दिख रही हैं, भगत सिंह और उनके साथियों को इसी फांसी घर पर फांसी दी गई थी। फांसी देने का दिन 24 मार्च तय किया गया था। लेकिन पूरे देश में हो रहे प्रदर्शन के बाद उन्हें एक दिन पहले 23 मार्च 1981 शाम 7 बजकर 33 मिनट पर फांसी दे दी गई।

यहां हुआ था अंतिम संस्कार
उसके बाद जनता के प्रदर्शन से डरते हुए पुलिस ने जेल की पिछली दिवार तोड़, एक ट्रक में लाश भरकर सतलुज नदी के किनारे गुप-चुप तरीके से इनके शवों को ले जाया गया। इनके शवों को वहीं नदी किनारे जलाया जाने लगा। आग देख कर वहां भी भीड़ जुट गयी। अंग्रेज जलते हुए शवों को नदी में फेंक कर भाग निकले। बाद में कसूर जिले के हुसैनवाला गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बाद में रखा नाम भगत सिंह चौक
1961 में जेल को धवस्त करके फांसी घर के जगह बनाए गए चौक का नाम शादमान चौक रखा गया लेकिन पाकिस्तान के कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन ने मांग उठाते हुए इस जगह का नाम शादमान चौक से बदलकर भगतसिंह चौराहा रखने के लिए कहा। जिसके बाद लम्बी जद्दोजेहद के बाद इस चौक का नाम बदलकर भगतसिंह चौराहा रख दिया गया। वहीं फैसलाबाद जिले के लयालपुर जिले में स्थित भगतसिंह के घर को म्यूजियम बनाने के लिए भी ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट ने मांग की थी।



Click it and Unblock the Notifications