Latest Updates
-
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
पहले भी हो चुका है टाइम कैप्सूल का इस्तेमाल, जानें क्यों जमीन के नीचे दबाया जाता है इसे
एक बार फिर राम मंदिर का नाम सुर्खियों में है। मगर इस बार राम मंदिर के साथ टाइम कैप्सूल की भी चर्चा हर तरफ हो रही है। गौरतलब है कि 5 अगस्त को राम नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी। इसके साथ ही मंदिर की नींव डालते समय 2000 फीट की गहराई में टाइम कैप्सूल भी रखा जाएगा।

जानते हैं कि आखिर टाइम कैप्सूल है क्या और इसे क्यों कई फीट नीचे दबाया जा रहा है, साथ ही इससे आने वाली पीढ़ी को क्या फायदा हो सकता है।

टाइम कैप्सूल क्या है?
आपको नाम से ही अंदाजा हो जाएगा कि यह देखने में कैप्सूल की तरह ही है। ये आकार में एक कंटेनर की तरह होता है जिसे खास सामग्री से तैयार किया जाता है। इसे बनाने में मुख्य रूप से तांबे का प्रयोग किया जाता है। इसकी बनावट और क्वालिटी इतनी मजबूत होती है कि इस पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। कई फीट गहराई में दबे होने के बावजूद हजारों साल बाद भी यह सड़ता-गलता नहीं है और पूरी तरह सुरक्षित रह जाता है।

मंदिर के नीचे क्यों रखा जा रहा है टाइम कैप्सूल?
राम मंदिर के 2000 फीट नीचे टाइम कैप्सूल इसलिए रखा जा रहा है ताकि भविष्य में कई सालों बाद भी कोई इस मंदिर के बारे में जानना चाहे तो उसे राम जन्मभूमि से जुड़े तथ्य मिल सके।
आसान शब्दों में कहा जाए तो जिस तरह से एक कैप्सूल के अंदर दवा भरी होती है और बाहरी आवरण उस दवा की रक्षा करता है ठीक उसी तरह टाइम कैप्सूल के अंदर इस मंदिर और राम जन्मभूमि से जुड़े सभी दस्तावेज रख दिए जाएंगे। दुनिया के कई देशों में टाइम कैप्सूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये उस जगह से जुड़े इतिहास को सुरक्षित रखता है।

भारत में और कहां रखा गया है टाइम कैप्सूल?
अयोध्या का राम मंदिर ऐसा पहला स्थान नहीं है जहां टाइम कैप्सूल रखा जा रहा हो। देश के कई ऐसे मशहूर और प्रतिष्ठित स्थान है जहां टाइम कैप्सूल रखा जा चुका है। इस फेहरिस्त में दिल्ली का लाल किला, कानपुर का IIT कॉलेज और चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय शामिल है। इन संस्थानों से जुड़ी सभी तरह की जानकारियां सहेजकर कैप्सूल के रूप में उसे दफना दिया गया है।



Click it and Unblock the Notifications
