Latest Updates
-
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती
Green Comet 2023: 50,000 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग, खुली आंखों से कर सकेंगे दीदार
खगोलीय घटनाएं सभी को बेहद आकर्षित और विस्मित करने वाली होती हैं। 1 और 2 फरवरी की रात भी खगोलीय घटनाओं की दृष्टि से आअश्चर्यचकित करने वाली रही। इंटरनेट पर 1 फ़रवरी की रात को देखे गए हरे धूमकेतु यानी ग्रीन कॉमेट की तस्वीरें वायरल हैं। 50 हज़ार साल बाद देखा गया यह धूमकेतु धरती के पास से गुजरा। वैज्ञानिकों को यह कॉमेट पहले एक एस्टेरॉयड लगा था लेकिन जैसे जैसे यह सूर्य के पास आया और इसकी चमक बढ़ी तो इसके कॉमेट होने का पता चला।

धरती के बेहद करीब था ग्रीन कॉमेट
50 हज़ार वर्षों तक बाहरी सौरमंडल में भ्रमण के बाद यह धूमकेतु एक बार फिर धरती के पास से गुज़रा। गुज़रने के दौरान धूमकेतु और धरती के बीच केवल 42 मिलियन किमी का फासला था। लोगों को इसे देखने के लिए किसी तरह के वैज्ञानिक उपकरण की सहायता भी नहीं लेनी पड़ी।

कब दिखाई दिया यह कॉमेट
1 और 2 फ़रवरी के बीच की रात में यह धूमकेतु धरती के सबसे करीब गुज़रा। इस कॉमेट का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया। पहली बार इसे वर्ष 2022 के मार्च में कैलिफोर्निया के ज्विकी ट्रांसिएट फैसिलिटी के ज़रिये देखा गया। उस वक़्त यह हमारे सौरमंडल में प्रवेश कर चुका था और ब्रहस्पति गृह के पास से गुज़रा था।

क्यों रहा ये एक ख़ास नज़ारा
लोगों के लिए इस धूमकेतु को देखना एक अद्भुत अनुभव रहा। इस कॉमेट से निकलने वाली चमकदार कार्बन गैस को हरी पूँछ के रूप में देखा गया। ऐसा विरले ही होता है कि किसी खगोलीय घटना को नग्न आँखों से देखा जा सके, लेकिन इस बार लोगों को इस विस्मयकारी पल का गवाह बनने का सुनहरा मौका मिला।

क्या होता है कॉमेट
कॉमेट दरअसल धूल और बर्फ से बने पिंड होते हैं। ये पिंड जब सूरज के करीब से गुजरते हैं तब ऊष्मा से इनकी बर्फ पिघलकर सीधे गैस में बदलती है जिसके कारण इसकी पूंछ बनती है, जैसे हमें ग्रीन कॉमेट में देखने को मिली।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
