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वर्ल्ड फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन डे आज, जानें इसका महत्व और मनाने का कारण
आज 6 फरवरी को दुनियाभर में महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस (International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation 2023) मनाया जा रहा है। इस दिन को पहली बार 6 फरवरी, 2003 में मनाना शुरू किया गया था। महिला जननांग विकृति (MGM) में नॉन मेडिकल कारणों से महिलाओं के जननांग को बदलने या उसे किसी प्रकार से घायल करने वाली प्रक्रियाएं इसमें शामिल की गई हैं। दुनिया के कई देशों में आज भी इससे संबंधित कई तरह की कुप्रथाएं जारी है। जिसमें खासतौर से अफ्रीकन देशों में। इस दिन को मनाने का प्रथम उद्देश्य ये है कि 2030 तक MGM कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जाए। यूएनएफपीए, यूनिसेफ के साथ संयुक्त रूप से एफजीएम के खात्में में तेजी लाने के लिए सबसे बड़े ग्लोबल प्रोग्राम को लीड करता है। इस कार्यक्रम के तहत आज के वक्त में 17 अफ्रीकी देशों पर ये केंद्रित है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक पहलों का भी समर्थन करता है।
महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस की थीम ''2030 तक महिला जननांग विकृति के उन्मूलन के माध्यम से नए वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करना'' है।

महिला जननांग विकृति के खिलाफ सहनशीलता दिवस का इतिहास जानें-
इसकी शुरूआत नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति स्टेला ओबसंजो के द्वारा की गई थी। स्टेला ओबसंजो महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता चलाने वाले अभियान की प्रवक्ता भी थीं। नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति के द्वारा 6 फरवरी 2003 को इस दिन को मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद यूनाइडेट नेशन ने इसको स्वीकार करते हुए साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मिलकर महिला जननांग विकृति उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया। जिसके बाद साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक प्रस्ताव पारित किया और 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया।

सबसे अधिक अफ्रीकी देशों में कुप्रथा जारी
आज भी दुनिया के कई देशों में ये कुप्रथा जारी है। सबसे अधिक अफ्रीकी देशों में महिलाओं के खिलाफ ये प्रथा चली आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में तकरीबन 5,00,000 से ज्यादा लड़कियों और महिलाओं को फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) से गुजरना पड़ा है। यूरोप में 60,000, ऑस्ट्रेलिया में 50,000 या उससे अधिक, जर्मनी में 70,000, वहीं ब्रिटेन में 137,000 महिलाओं और लड़कियों के जननांगों को विकृत किया गया।
UNFPA इनमें से कई लक्ष्यों से सीधे निपटने के लिए सरकारों, भागीदारों और अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ काम कर रहा है।

महत्वपूर्ण फैक्ट्स-
1. वैश्विक स्तर पर, एक अनुमान के अनुसार, कम से कम 200 मिलियन लड़कियां और महिलाएं आज किसी न किसी रूप में FGM से गुजरी हैं।
2. 14 साल और उससे कम उम्र की 44 मिलियन लड़कियों को इससे गुजरना पड़ा है। जिसमें गाम्बिया में 56 फीसदी, मॉरिटानिया में 54 प्रतिशत और इंडोनेशिया में एफजीएम का उच्चतम प्रसार है। यहां पर 11 साल और उससे कम उम्र की लगभग आधी लड़कियों के साथ ये दर्दनाक काम किया जाता है।
3. 15 से 49 वर्ष की आयु की लड़कियों और महिलाओं में सबसे अधिक प्रसार वाले देश सोमालिया 98 प्रतिशत, गिनी 97 फीसदी व जिबूती में 93 प्रतिशत हैं।
4. एफजीएम गंभीर ब्लीडिंग, सिस्ट, इन्फेक्शन, बांझपन सहित कई तरह के हेल्थ इश्यू के साथ-साथ प्रेगनेंसी में कई तरह की परेशानियां पैदा करता है, यहां तक की नवजात मृत्यु के जोखिम को बढ़ाता है।
5. एफजीएम लड़कियों और महिलाओं के ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन है।
Reference- https://www.un.org/africarenewal
Photo Courtesy- UN Library



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