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Anil Gochikar: ये है जगन्नाथ पुरी के 'बाहुबली बॉडीगार्ड', सोशल मीडिया में किसी सुपर स्टार से नहीं है कम
हर साल की तरह इस बार भी 20 जून से ओडिशा में भगवान जगन्नाथ रथ में सवार होकर मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करने के लिए तैयार हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ खींचना बहुत ही सौभाग्य और पुण्य का काम माना जाता है। हजारों साल से ये काम भगवान के प्रतिहारी यानी भगवान के रक्षक करते आ रहे हैं। मंदिर का पूरा कार्यभार प्रतिहारी श्रेणी में आने वाले सेवायत्तों ने संभाल रखा हैं।
जितना पुराना सैंकड़ों साल मंदिर और रथ यात्रा का इतिहास हैं। उतना पुराना प्रतिहारियों का इतिहास है। वैसे तो जगन्नाथ मंदिर में भगवान की सेवा के लिए करीब 4500 लोग हैं, लेकिन भगवान की रक्षा के लिए करीब 150 प्रतिहारी खासतौर पर नियुक्त रहते हैं। यानी भगवान जगन्नाथ के पर्सनल बॉडीगार्ड। इन्हीं अंगरक्षकों में से एक है हैं अनिल गोछिकर। सेवायतों की प्रतिहारी श्रेणी में आने वाले अनिल गोछिकर पुजारी होने के साथ-साथ बॉडी बिल्डर और मिस्टर ओडिशा भी रह चुके हैं। 44 साल के अनिल अपने कद-काठी के चलते लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

रथ में बिठाने से लेकर मंदिर तक में स्थापित करते हैं
अनिल अपनी बाहुबली-सी कद काठी के चलते हर साल रथयात्रा में सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं। हर साल रथ यात्रा शुरु होने से पहले अनिल भगवान जगन्नाथ को मंदिर से रथ पर बिठाते हैं और फिर यात्रा समाप्त होने पर मंदिर में स्थापित करते हैं। इस बारे में अनिल का कहना है कि भगवान अपने मन से ही उठते और बैठते हैं, वो तो सिर्फ एक जरिया है।
पीढ़ियों से परिवार है जगन्नाथ की सेवा में
अनिल की तरह ही उनके भाई सुनील भी जगन्नाथ मंदिर में सेवायत्त है। कई पीढ़ियों से मंदिर की रक्षा में लगे हैं अनिल और सुनील के परिजन परिवार के लोग कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा में जुटे हुए हैं। मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों ने जब जगन्नाथ मंदिर पर हमला किया था तो उनके पूर्वजों ने महाप्रभु की रक्षा की थी। महाप्रभु की मूर्ति बहुत भारी होती है इसलिए उन्हें उठाने के लिए सेवायत्तों का बलवान होना जरुरी होता है। इसके लिए वह रोजाना अभ्यास करते हैं। प्रतिहारी समुदाय के बच्चों को पढ़ाई करने के बाद अखाड़ा जाना अनिवार्य होता है।

सोशल मीडिया में काफी फेमस है अनिल
अनिल की सिक्स पैक एब्स की तस्वीरें भी सोशल मीडिया में छाई रहती हैं। अनिल बॉडी बिल्डिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अपना दम-खम दिखा चुके हैं। अनिल बॉडी बिल्डिंग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो बार गोल्ड मेडल और एक बार सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। साल 2016 में दुबई में हुई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में अनिल ने गोल्ड मेडल जीता था। साल 2017 और 2019 में उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप गोल्ड और साल 2018 में सिल्वर मेडल जीता था। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले अनिल की सिक्स पैक एब्स की तस्वीरें भी सोशल मीडिया में छाई रहती हैं।
ये है अनिल की दिनचर्या
अनिल के बड़े भाई दामोदर भी जगन्नाथ मंदिर में सेवक हैं और माता-पिता भी महाप्रभु के सेवक थे। इसके बाद अब अनिल भी महाप्रभु की ही सेवा करते हैं। गराबड़ सेवा अर्थात प्रभु के स्नान के लिए पानी देने का कार्य, बड़द्वार अर्थात अंगरक्षक का कार्य और हड़प सेवा यानी मंदिर ट्रेजरी वैन का दुरुपयोग न हो इसका संचालन जैसी जिम्मेदारी अनिल ही निभाते हैं। अनिल हर दिन सुबह 5.30 बजे उठ जाते हैं। इसके बाद नाश्ते में 150 ग्राम अंकुरित मूंग और 1 नारियल खाने के बाद जिम जाते हैं। सुबह 9.30 बजे चावल, पनीर, मशरूम, पालक का साग, वेट प्रोटीन और फिर दोपहर 12.30 बजे चावल, पनीर, सोयाबीन, दही और सलाद खाते हैं। दोपहर 3 बजे ब्रेड या रोटी, सब्जी के साथ एक या दो केले खाते हैं और फिर जिम जाते हैं। यहां करीब 3 घंटे शारीरिक अभ्यास करते हैं। अनिल की यह दैनिक क्रिया आज भी जारी है और यही कारण है कि महाप्रभु जी की रथयात्रा में अनिल और उनके भाई हमेशा लोगों का ध्यानाकर्षित करते हैं।



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