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Rath Yatra 2025: जगन्नाथ मंदिर की तीसरी का क्या है रहस्य, क्यों मना है इस पर पैर रखना?
Rath Yatra 2025: भारत भूमि पर अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी अनोखी मान्यताएं और चमत्कार आज भी लोगों के लिए आस्था का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक है उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके रहस्य और चमत्कार भी इसे बेहद खास बनाते हैं। हिंदुओं के चार धामों, बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और जगन्नाथपुरी में शामिल यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिन्हें यहां "जगन्नाथ" के नाम से पूजा जाता है।
पुरी की इस पावन नगरी को बैकुंठ की धरती कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि यहां भगवान श्रीहरि साक्षात निवास करते हैं। इस मंदिर से जुड़े अनेक रहस्य वर्षों से भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए जिज्ञासा का विषय रहे हैं, लेकिन इनमें सबसे चर्चित और रहस्यमयी है मंदिर की "तीसरी सीढ़ी" से जुड़ी मान्यता।

तीसरी सीढ़ी का रहस्य
पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर मौजूद 22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी को "यमशिला" कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलने लगी थी। इस बात से यमराज चिंतित हो उठे और भगवान जगन्नाथ से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति आपके दर्शन से ही पापमुक्त हो जाएगा, तो यमलोक का क्या होगा?
यमराज की बात सुनकर भगवान जगन्नाथ ने समाधान देते हुए कहा कि मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर तुम वास करो, और मैं यह नियम बनाता हूं कि मेरे दर्शन के बाद अगर कोई उस तीसरी सीढ़ी पर पैर रखेगा, तो उसके सभी पुण्य समाप्त हो जाएंगे और उसे यमलोक जाना होगा। तभी से यह परंपरा बन गई कि मंदिर में दर्शन करने के बाद लौटते समय भक्त तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखते हैं।
कैसी है यह सीढ़ी और कैसे पहचानें?
इस रहस्यमयी सीढ़ी की विशेषता यह है कि इसका रंग बाकी सीढ़ियों से अलग, काला है। मंदिर में कुल 22 सीढ़ियां हैं और यह तीसरी सीढ़ी नीचे से गिनी जाती है। इसे ध्यान से देखने पर साफ समझ में आता है कि यह बाकी पत्थरों से अलग है।
जब भक्त मंदिर में प्रवेश करते हैं, तब वे सामान्य रूप से सीढ़ियों से होकर अंदर जाते हैं। लेकिन दर्शन के बाद जब वे लौटते हैं, तो उन्हें विशेष रूप से तीसरी सीढ़ी से बचकर निकलने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यदि इस सीढ़ी पर पैर रख दिया गया, तो व्यक्ति के दर्शन का पुण्य शून्य हो जाएगा।
जगन्नाथ मंदिर के अन्य रहस्य
जगन्नाथ मंदिर न केवल तीसरी सीढ़ी बल्कि और भी कई रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें आज तक कोई वैज्ञानिक या विशेषज्ञ पूरी तरह नहीं सुलझा पाया है।
झंडा उल्टी दिशा में लहराना: मंदिर के शिखर पर स्थित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है, जो सामान्य भौतिक नियमों के विरुद्ध है।
कोई पक्षी या विमान मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ता: यह एक अत्यंत रहस्यमयी तथ्य है कि आज तक किसी पक्षी या विमान को मंदिर के ऊपर उड़ते नहीं देखा गया है।
मंदिर की छाया नहीं दिखती: दिन के किसी भी समय मंदिर की छाया जमीन पर स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती।
मंदिर के भीतर समुद्र की आवाज नहीं आती: समुद्र तट से मात्र 2-3 किमी की दूरी पर होने के बावजूद मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह से बंद हो जाती है।
ये सब विशेषताएं इस मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी संरचना भी बनाती हैं, जिसकी भव्यता और चमत्कारों के आगे विज्ञान भी मौन है।



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