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भारत के इस गांव से हैं Sunita Williams का नाता, पीएम मोदी से भी है जुड़ा है कनेक्शन
नासा की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर पृथ्वी पर वापस लौट आए हैं। उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नासा ने 18 मार्च तक एक विशेष स्पेसक्राफ्ट भेजा गया था। यह कदम उनकी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान किसी भी असुविधा से बचने और उनके सुरक्षित लौटने के लिए उठाया गया था। इस मिशन के साथ, एक बार फिर दुनिया भर के लोग सुनीता विलियम्स की बहादुरी और उपलब्धियों की सराहना कर रहे हैं।
न सिर्फ दुनियाभर में बल्कि सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी के लिए उनके पैतृक गांव झूलासन, गुजरात में विशेष प्रार्थनाएँ और हवन किए गए। गांव के लोग, उनके परिवार और रिश्तेदारों ने मिलकर उनके लिए मंगलकामना की। उनके सही सलामत पृथ्वी पर आने पर गांव में भी हर्षोल्लास का माहौल रहा। सुनीता विलियम्स चाहे अमेरिका में बस चुकी हो, लेकिन आज भी दिल से भारत की बेटी है, आइए यहीं जानते हैं उनके भारत से जुडे लगाव के बारे में।

सुनीता विलियम्स का भारतीय जड़ से गहरा नाता
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य के यूक्लिड में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या, जो एक प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट हैं, मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव के निवासी थे। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख किया और वहीं बस गए। उनकी मां एक स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी नागरिक हैं। भारतीय मूल की होने के कारण सुनीता को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से हमेशा लगाव रहा है। वह कई बार भारत आ चुकी हैं और अपने पूर्वजों की धरती से उन्हें गहरा जुड़ाव महसूस होता है।
कल्पना चावला के बाद दूसरी भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री
सुनीता विलियम्स ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया। उन्होंने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में कई रिकॉर्ड बनाए। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में अंतरिक्ष वॉक करने वाली कुछ गिनी-चुनी महिलाओं में से एक हैं। उनसे पहले, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने भी नासा में काम किया था, लेकिन 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल हादसे में उनका निधन हो गया था।
पीएम नरेंद्र मोदी और सुनीता विलियम्स का गुजरात कनेक्शन
सुनीता विलियम्स और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों का नाता गुजरात से है। जहां पीएम मोदी का जन्म वडनगर, गुजरात में हुआ, वहीं सुनीता के पिता गुजरात के झूलासन गांव के मूल निवासी थे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू कीं, जिससे भारत को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने का अवसर मिला।
सुनीता विलियम्स की उपलब्धियां न केवल अमेरिका बल्कि भारत के लिए भी गर्व की बात हैं। उनकी अंतरिक्ष यात्रा विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान देने वाली महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
हिंदू धर्म में आस्था रखती है सुनीता विलियम्स
सुनीता विलियम्स की चचेरी बहन फाल्गुनी पंड्या ने न्यू जर्सी से दिए एक इंटरव्यू में बताया कि परिवार उनकी वापसी को लेकर बेहद उत्साहित है। विशेष प्रार्थना और हवन की योजना बनाई गई है। फाल्गुनी ने बताया कि सुनीता अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में गणेश की मूर्ति लेकर गई थीं और उड़ते हुए गणेशजी की तस्वीर साझा की थी।
फाल्गुनी ने कहा कि सुनीता भारतीय खाने की बड़ी प्रशंसक हैं और जल्द ही भारत आने की योजना बना रही हैं। उन्होंने याद किया कि वे 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए पीएम नरेंद्र मोदी से मिली थीं और बाद में अमेरिका में भी मुलाकात हुई थी।
गुजरात के झूलासन गांव में उनके लौटने का जश्न मनाया जा रहा है। सुनीता ने अंतरिक्ष से कुंभ मेले की तस्वीर भेजी थी, जिससे उनकी भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी रुचि झलकती है। उनकी वापसी के बाद पुनर्वास केंद्र में उनसे मिलने की योजना बनाई गई है।



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