Supreme Court: हूकर,वैश्या जैसे शब्दों का अदालतों में नहीं होगा इस्तेमाल, एससी ने हैंडबुक जारी की

The Supreme Court of India: कोर्ट के फैसलों में और वकीलों की दलीलों में अब लैंगिक रूढ़िवादिता नहीं कही जा सकती और ना ही किसी तरह के ऑर्थोटॉक्स शब्दों का इस्तेमाल होगा। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इसके संबंध में एक हैंडबुक लॉन्च की है, जो न्यायाधीशों को कोर्ड फैसलों और कानूनी दस्तावेजों में गलत तरह के लिंग संबंधित शब्दों के इस्तेमाल से बचने में मदद करेगी।

The Supreme Court of India

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में लिंग संबंधित विशेषकर महिलाओं के लिए यूज होने वाले आपत्तिजनक शब्दों पर रोक लगाने के लिए फैसला लिया है। ये 'हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स' देश के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा लॉन्च की गई है।

बता दें कि ये हैंडबुक 30 पन्नों की है और इसमें कोर्ट के आदेशों, फैसलों, वकीले की जिरह के दौरान अनुचित लिंग शब्दों के इस्तेमाल से बचने के बारें में बताया गया है, साथ ही उनकी जगह कौन से दूसरे शब्द यूज किये जा सकते हैं वो भी इसमें बताया गया है।

हैंडबुक में इन स्टिरियोटाइप शब्दों को बदलकर दूसरे नये शब्दों के बारें में बताया गया है।
उत्तेजक कपड़े- ड्रेस
रखैल- शादी के बाहर महिला का किसी और पुरुष के साथ रोमांटिक रिलेशन
अनैतिक व्यवहार वाली महिला-महिला
बहकाने वाली- महिला
अविवाहित मां- मां
व्यभिचारिणी- महिला
वेश्या- सेक्स वर्कर
अफेयर- शादी से बाहर के संबंध
बास्टर्ड (नाजायज औलाद)- ऐसा बच्चा जिसके पैरेंट्स ने शादी न की हो
परपुरुष गामिनी, एडल्टेरेस- शादी से बाहर महिला के किसी अन्य पुरुष से शारीरिक संबंध
बाल वेश्या- बच्चे जिनका ट्रैफिकिंग कराया जा रहा हो
हूकर- सेक्स वर्कर
अप्राकृतिक संबंध- सेक्सुअल संबंध
रखैल (कीप)- शादी से बाहर महिला के किसी और पुरुष से रोमांटिक संबंध
छेड़छाड़ (ईव टीजिंग)- गलियों में सेक्सुअल हरासमेंट
इंडियन अथवा वेस्टर्न वूमेन- महिला
हाउस वाइफ- होम मेकर

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