भारत के इन मंदिरों मिलता है नॉनवेज प्रसाद, भगवान को चढ़ाया जाता है चिकन-मटन का भोग

These Indian Temples Serve Non-Veg Prasad: आमतौर पर देश के मंदिरों में कहीं नारियल, कहीं लड्डू, तो कहीं-कहीं अन्‍न-धान का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिरों में भी पकाया जाने वाला प्रसाद बेहद शुद्ध और सात्विक होता है। लेक‍िन आप जानकर हैरानी होगी होगी क‍ि भारत के अलग-अलग प्रांतों में ऐसे कई प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, जहां

प्रसाद के रूप में मांस बांटा जाता है। जी हां, यहां आज हम आपको कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताने वाले हैं, जहां प्रसाद में भक्तों को मटन-चिकन दिया जाता है।

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कामाख्या देवी का मंदिर - असम

असम के इस मंदिर में मां कामाख्या की पूजा की जाती है। कामाख्या मंदिर में दो भोग चढ़ाये जाते हैं, एक नॉर्मल शाकाहारी वहीं दूसरा मांसाहारी। नॉन-वेजिटेरियन भोग में मछली और बकरी का मांस बनाया जाता है। हालांकि, यहां तैयार होने वाले खाने में किसी भी प्याज या लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता। दोपहर 1 बजे कामाख्या मां को मांसाहारी खाना परोसा जाता है। इस वजह से मंदिर सुबह 1:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक बंद रहता है।

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तरकुलहा देवी का मंदिर- गोरखपुर

गोरखपुर के चौरी-चौरा तहसील के पास तरकुलहा देवी का मंदिर अपने आप में बेहद खास है। इसका इतिहास भी अंग्रेजों के शासनकाल का है। यह हिंदुओं का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर कि खास बात ये है कि तरकुलहा देवी को जो प्रसाद चढ़ाया जाता है वो बकरे का होता है। इसे ही भक्तों के बीच प्रसाद रूप में बांटा जाता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर-पश्चिम बंगाल

इस मंदिर में भी मछली को पहले देवी काली को चढ़ाया जाता है और बाद में सभी भक्तों को भोग के रूप में परोसा जाता है। यह मां काली को मांसाहारी भोग लगाने की एक रस्म मानी जाती है।

विमला मंदिर- उड़ीसा

इस मंदिर में देवी विमला की पूजा की जाती है और दुर्गा पूजा के दौरान उन्हें मांस और मछली चढ़ाया जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान पवित्र मार्कंडा मंदिर के तालाब से मछली पकड़कर उसे पकाकर देवी को अर्पित किया जाता है। विमला मंदिर में प्रसाद को 'बिमला परुसा' के रूप में जाना जाता है।

मुनियंडी स्वामी मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के मदुरै में वडक्कमपट्टी नामक एक छोटे से गाँव में स्थित, यह मंदिर भगवान मुनियंडी को सम्मानित करने के लिए एक असामान्य 3-दिवसीय वार्षिक उत्सव का आयोजन करता है, जो मुनीस्वरार का दूसरा नाम है, जिसे भगवान शिव का अवतार माना जाता है। यह मंदिर चिकन और मटन बिरयानी को प्रसाद के रूप में परोसता है और लोग नाश्ते के लिए बिरयानी खाने के लिए मंदिर में आते हैं।

कालीघाट - कोलकाता

कालीघाट कोलकाता की कुछ अलग मान्यताएं हैं, देवी के लिए बनाया जाने वाला भोग शाकाहारी ही होता है। लेकिन यहां पशु बलि होती है, और भक्त भी वहां वही लाते हैं। मांस को बाद में पकाया जाता है और भक्तों को प्रसाद के रूप में परोसा जाता है।

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