Latest Updates
-
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं
कामसूत्र से भी गहरी है खजुराहो की असली कहानी, इसके पीछे छिपी है एक महिला की विरासत
Mystery of Khajuraho: खजुराहो मध्य प्रदेश की धरती पर बसा एक ऐसा नाम, जो आज भी दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ये मंदिर सिर्फ अपनी कामुक मूर्तियों के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि इनके पीछे छिपी एक महिला की कहानी है, जिसे शायद इतिहास की किताबों ने उतनी जगह नहीं दी जितनी वो डिजर्व करती है। इस रहस्यमयी महिला का नाम था हेमवती।
एक चंद्रवंशी राजकुमार और ब्राह्मण कन्या की प्रेम गाथा
कहानी की शुरुआत होती है हेमवती, एक सुंदर और विदुषी ब्राह्मण कन्या से, जो चंद्रमा की रोशनी में गंगा तट पर स्नान कर रही थी। तभी स्वयं चंद्रदेव उस पर मोहित हो गए और रात भर का मिलन हुआ। इस मिलन से एक बालक का जन्म हुआ चंद्रवर्मन। हेमवती को समाज से अपमानित होकर जंगलों में पलायन करना पड़ा, लेकिन उसने अपने बेटे को एक योद्धा और राजा बनाने की ठान ली।

जब एक मां ने लिया संकल्प
हेमवती ने अपने बेटे चंद्रवर्मन से वादा लिया कि वह एक ऐसा साम्राज्य स्थापित करेगा जो महिलाओं के सम्मान, सौंदर्य और शक्ति को अमर बना दे। यही पुत्र आगे चलकर चंदेल वंश का संस्थापक बना और उसने ही खजुराहो की भव्य मंदिर श्रृंखला की नींव रखी।
क्यों बने थे खजुराहो के मंदिर?
खजुराहो में कभी 85 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से आज 22 मंदिर शेष हैं। इन मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां सिर्फ शारीरिक प्रेम नहीं, बल्कि जीवन के चार पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक हैं। कामसूत्र से प्रेरित इन मूर्तियों का उद्देश्य मनुष्य को यह समझाना था कि आध्यात्मिक मोक्ष तक पहुंचने के लिए काम (desire) को भी समझना और संतुलित करना जरूरी है।
विदेशी भी हैं दीवाने
हर साल खजुराहो को देखने के लिए लाखों पर्यटक भारत और विदेश से आते हैं। 2023 में ही लगभग 3.2 लाख पर्यटकों ने खजुराहो का भ्रमण किया। UNESCO द्वारा इसे World Heritage Site घोषित किया गया है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी बढ़ गई है।

इतिहास की नायिका जो भुला दी गई
आज जब हम खजुराहो के मंदिरों की तस्वीरें खींचते हैं या उनके सौंदर्य की चर्चा करते हैं, तो शायद ही कोई याद करता है उस एकल मां हेमावती को, जिसने सामाजिक तिरस्कार के बावजूद इतिहास रचने वाला पुत्र पैदा किया और उसे वह दृष्टि दी जिससे खजुराहो जैसी विरासत संभव हो सकी। खजुराहो की दीवारों पर केवल प्रेम नहीं उकेरा गया है, बल्कि वहां उकेरी गई है एक स्त्री की शक्ति, उसकी पीड़ा और उसका विजन।
और इस पूरी स्थापत्य कला के पीछे है हेमावती, एक ऐसी महिला जिसकी कहानी को अब फिर से सुनाया जाना चाहिए। अगली बार जब आप खजुराहो जाएं, तो सिर्फ मंदिरों को न देखें वहां एक मां का सपना, संघर्ष और संकल्प भी बसा है।



Click it and Unblock the Notifications