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UP के इस गांव में नहीं होता है रावण दहन; विजयदशमी पर मनाया जाता है शौक, जानें वजह
Vijaydashmi 2024 : उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा के एक गांव बिसरख को रावण की जन्मस्थली मनाई जाती हैं। इसलिए यहां पर न तो दशहरा मनाया जाता है और न ही रावण के पुतले को जलाया जाता है। बताया गया है कि कई सालों पहले बिसरख के लोगों ने रावण का पुतला जलाया था। तब वहां एक-एक कर कई लोगों की मौत हो गई थी।
इसके बाद लोगों ने रावण की पूजा की, जिससे लोगों के मरने का यह सिलसिला रुका था। अब इस बात में कितनी सच्चाई है, ये तो हम नहीं कह सकते, लेकिन हां इस गांव में दशहरा नहीं मनाया जाता है।

नहीं होता है रामलीला का भी आयोजन
बताया जाता है कि गांव के लोगों ने दो बार यहां रामलीला का आयोजन करवाया और रावण दहन भी किया गया था। लेकिन दोनों बार रामलीला के समय किसी न किसी मौत हो गई। इसके बाद से गाँव में रामलीला का आयोजन बंद कर दिया गया, और रावण दहन की परंपरा भी समाप्त कर दी गई। यही नहीं, इस गांव में रावण के बाद कुंभकरण, सूर्पणखा और विभीषण ने भी जन्म लिया था। यही वजह है कि जब पूरे देश में दशहरा की खुशियां मना रहा होता है, तो इस गांव में मातम मनाया जाता है।
यहां से रावण ने ली थी शिक्षा
बिसरख गांव को रावण के पिता विश्रवा ऋषि की तपोभूमि और उनके निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस गांव का नाम भी विश्रवा ऋषि के नाम पर पड़ा है। ऋषि विश्रवा की तपोभूमि मानी जाती है, जो रावण के पिता थे। उनके बेटे रावण का जन्म भी यही हुआ था। इसके अलावा, पूरे देश में बिसरख एक ऐसी जगह है, जहां अष्टभुजीय शिवलिंग स्थित है। यही रावण ने अपनी शिक्षा भी प्राप्त की थी।
अष्टभुजीय शिवलिंग है यहां स्थित
बिसरख गांव में अष्टभुजीय शिवलिंग स्थित है, जो देशभर में एक अद्वितीय धार्मिक स्थल है। यह शिवलिंग रावण और उनके परिवार की शिव भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस स्थान की पौराणिक महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि रावण एक महान शिव भक्त था और उन्होंने शिव से कई वरदान प्राप्त किए थे।
यहां भी नहीं जलाते हैं पुतला
मध्य प्रदेश के मंदसौर में भी दशहरे के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है, क्योंकि यहां रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। इस मान्यता के अनुसार, मंदसौर को मंदोदरी के नाम से ही नामकरण किया गया है। स्थानीय लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं, और इसीलिए पुतला दहन की परंपरा का पालन नहीं करते।



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