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Aditya-L1 Mission: L1 प्वाइंट क्या है? जहां ISRO भेज रहा है पहला सूर्ययान, L2, L3, L4 और L5 के बारे में जाने
What is Lagrange point 1: इसरो (ISRO) यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन अपने अगले मिशन आदित्य L1 मिशन को लॉन्च करने की जोरों शोरों से तैयारियां कर रहा हैं। व्हीकल के इंटरनल चेक पूरे कर लिए गए हैं।
आदित्य L1 को PSLV XL रॉकेट के जरिए 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा। ये करीब 4 महीने में पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैगरांजे पॉइंट-1 यानी L1 पॉइंट तक पहुंचेगा।
आदित्य स्पेसक्राफ्ट, L1 पॉइंट के चारों ओर घूमकर सूर्य पर उठने वाले तूफानों, मैग्नेटिक फील्ड और सोलर विंड जैसी चीजों की स्टडी करेगा। आदित्य-एल1 सूरज से इतनी दूर तैनात होगा कि उसे गर्मी लगे तो लेकिन वह नष्ट न हो जाए या तकनीकी रुप से खराब न हो।
इसलिए उसे इसी हिसाब से बनाया गया है और उसे L1 में तैनात किया जाएगा। आइए सबसे पहले समझते हैं कि लैगरांजे पॉइंट-1 यानी L1 क्या है और क्या सूर्य के पास ऐसे और भी पॉइंट मौजूद हैं?

L1 क्या है?
लैगरांजे पॉइंट का नाम इतालवी-फ्रेंच मैथमैटीशियन जोसेफी-लुई लैगरांजे के नाम पर रखा गया है। यह सामान्य तौर पर एल-1 के नाम से जाना जाता है। ऐसे पांच पॉइंट धरती और सूर्य के बीच हैं, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल बैलेंस हो जाता है और सेंट्रिफ्युगल फोर्स बन जाता है।
ऐसे में इस जगह पर अगर किसी ऑब्जेक्ट को रखा जाता है तो वह आसानी से दोनों के बीच स्थिर रहता है और एनर्जी भी कम लगती है। पहला लैग्रेंज पॉइंट धरती और सूर्य के बीच 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। आम शब्दों में कहें तो एल-1 ऐसा पॉइंट है जहां पर कोई भी ऑब्जेक्ट सूर्य और धरती से बराबर दूरी पर स्थिर रह सकता है।

क्या है लैग्रेंज प्वाइंट?
धरती और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। पृथ्वी और सूर्य की दूरी के बीच में कई ऐसे बिंदु हैं जहां से सूर्य को सूर्य को बिना किसी ग्रहण या अवरोध के स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है। इस पर किसी अंतरिक्ष यान का गुरुत्वाकर्षण सेंट्रिपेटल फोर्स के बराबर हो जाता है। जिसकी वजह से यहां कोई भी यान लंबे समय तक रुक कर आसानी से शोध कर सकता है। इस जगह को 'अंतरिक्ष का पार्किंग' भी कहा जाता है, क्योंकि बेहद कम ईंधन के साथ इस जगह पर अंतरिक्ष यान को स्थिर किया जा सकता है।
एल 1, एल 2 और एल 3 प्वाइंट स्थिर नहीं है। इसकी स्थिति बदलती रहती है। जबकि एल 4 और एल 5 स्थिर है और अपनी स्थिति नहीं बदलते हैं। इन लैरेंज प्वाइंट में एक मात्र L1 ही एक मात्र ऐसी जगह है जो सूर्य की सीध में है। जो रिसर्च में काफी मददगार साबित हो सकता है। इस वजह से भारत का सूर्ययान लैरेंज प्वाइंट वन यानी L1 पर तैनात होगा।
आदित्ययान को L1 पॉइंट पर ही क्यों भेजा जा रहा है?
आदित्य को सूर्य और पृथ्वी के बीच हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। L1 पॉइंट के चारों ओर की ऑर्बिट को हेलो ऑर्बिट कहा जाता है। इसरो का मानना है कि L1 पॉइंट के आस-पास हेलो ऑर्बिट में रखा गया सैटेलाइट सूर्य को बिना किसी ग्रहण के लगातार देख सकता है।
इससे रियल टाइम सोलर एक्टिविटीज और अंतरिक्ष के मौसम पर भी नजर रखी जा सकेगी। उम्मीद की जा रही है कि आदित्य L1 के पेलोड कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर एक्टिविटीज की विशेषताओं, पार्टिकल्स की मूवमेंट और स्पेस वेदर को समझने के लिए जानकारी देंगे।



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