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Gadhimai Festival : क्या है नेपाल का गढ़ीमाई मेला? जिसे कहा जाता है 'दुनिया का सबसे खून-खराबे वाला त्योहार'
What is Nepal's Gadhimai Festival : नेपाल के बारा जिले में स्थित गढ़ीमाई देवी स्थान पर हर पांच साल में आयोजित होने वाला मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे दुनियाभर में सबसे खून-खराबे वाले त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। इस मेले में हजारों पशुओं की बलि दी जाती है, और यह परंपरा लगभग 300 साल पुरानी है। नेपाल के अलावा, भारत और अन्य पड़ोसी देशों के श्रद्धालु भी मन्नत पूरी करने आते हैं।
इस मेले में आने लेने वाले श्रद्धालु अपने दुखों से मुक्ति, मन्नतों की पूर्ति और देवी की कृपा पाने के लिए जानवरों की बलि देते हैं। यह त्योहार इतना विवादास्पद है कि विश्वभर में इसके खिलाफ आवाजें उठाई जाती रही हैं, फिर भी यह परंपरा बरकरार रही है। आइए जानते नेपाल के गढ़ीमाई मेला और यहां की धार्मिक मान्यताओं के बारे में।

गढ़ीमाई उत्सव क्या है?
गढ़ीमाई उत्सव एक हिंदू त्योहार है, जो हर पांच साल में नेपाल के बारा जिले के बरियारपुर स्थित गढ़ीमाई मंदिर में आयोजित होता है। यह स्थान काठमांडू से लगभग 160 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। गढ़ीमाई की उत्पत्ति 1759 में हुई थी, जो आज से 300 साल से भी अधिक पुरानी है।
किंवदंती के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत गढ़ीमाई मंदिर के संस्थापक भगवाना चौधरी के एक सपने से हुई थी। उन्होंने सपना देखा कि देवी गढ़ीमाई ने उन्हें जेल से आज़ादी, बुरी शक्तियों से सुरक्षा और समृद्धि एवं शक्ति का वचन देने के बदले खून की मांग की। देवी ने मानव बलि की मांग की थी, लेकिन चौधरी ने सफलतापूर्वक इसके स्थान पर एक पशु की बलि दी।
तब से, इस उत्सव में हर पांच साल में बुरी शक्तियों को समाप्त करने के नाम पर बड़े पैमाने पर जानवरों की बलि दी जाती है। इस बलि प्रथा में बकरी, चूहा, मुर्गी, सुअर, कबूतर और भैंस जैसे जानवरों की बलि दी जाती है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल इस उत्सव में अब तक कम से कम 4,200 भैंस और हजारों बकरियों व कबूतरों की बलि दी गई है। वहीं, ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल (HSI) का अनुमान है कि 2009 में 5,00,000 जानवरों की बलि दी गई थी। हालांकि, यह संख्या 2014 और 2019 में घटकर लगभग 2,50,000 रह गई, जिसमें हजारों जल भैंस (Water Buffalo) ज्यादा शामिल थे।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी आ चुका है नाम
गढ़ीमाई मेला गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे बड़ी सामूहिक बलि प्रथा के रूप में दर्ज है। यहां वाराणसी के डोम राज द्वारा लाए गए 5100 पशुओं की बलि सबसे पहले दी जाती है। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस मेले में नेपाल और भारत से लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। प्रत्येक दिन करीब पांच लाख श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं, जिससे यह धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
2019 में लगा दी थी रोक
इस त्योहार में दुनियाभर में सबसे ज्यादा पशुओं की बलि दी जाती है। नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस पर कुछ नियंत्रण लगाने की कोशिश की है। 2015 में, नेपाल सरकार ने गढ़ीमाई मंदिर में पशुबलि पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे लागू कर दिया गया और बलि की परंपरा फिर से शुरू हो गई। इस संबंध में एक और फिर बड़ा कदम उठाते हुए, 2019 में नेपाल सरकार ने गढ़ीमाई मेला के दौरान पशुबलि को समाप्त करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह योजना भी संघर्षों के कारण लागू नहीं हो पाई।



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