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आज होगी साल की सबसे लंबी रात और सबसे छोटा दिन, जानिए कितने घंटे छाया रहेगा घना अंधेरा
Winter Solstice 2025: आज रविवार यानी 21 दिसंबर 2025 को शीतकालीन संक्रांति का विशेष खगोलीय दिन है। इस दिन सूर्य वर्ष में सबसे जल्दी अस्त होता है और दिन की अवधि पूरे साल में सबसे कम रहती है, जबकि रात सबसे लंबी होती है। इस खगोलीय घटना को विंटर सोल्स्टिस (शीतकालीन संक्रांति या शीतकालीन अयनांत) कहा जाता है। देशभर में इसका प्रभाव दिखाई देगा, खासतौर पर उत्तरी गोलार्द्ध में दिन और रात की अवधि में बड़ा बदलाव नजर आएगा।
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि हर दिन 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है, लेकिन वास्तव में ऐसा पूरे साल नहीं होता। पृथ्वी की बनावट और सूर्य के सापेक्ष उसकी स्थिति के कारण दिन-रात की अवधि में बदलाव आता रहता है।
क्या है विंटर सोल्स्टिस और क्यों होता है ऐसा?
खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी अपने अक्ष (Axis) पर करीब 23.5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण साल में एक बार सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध से सबसे अधिक दूरी पर होता है। इस स्थिति में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, जिससे दिन की अवधि कम और रात लंबी हो जाती है। इसी खगोलीय स्थिति को विंटर सोल्स्टिस कहा जाता है।

आज सूरज इतनी जल्दी क्यों डूब जाता है?
दरअसल पृथ्वी अपने अक्ष पर करीब 23.5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। इस झुकाव के कारण वर्ष में एक बार सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध से सबसे अधिक दूरी पर दिखाई देता है। इस स्थिति में सूर्य की किरणें सीधी न पड़कर तिरछी पड़ती हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश कम समय तक पहुंच पाता है। यही वजह है कि 21 दिसंबर को सूरज सबसे जल्दी अस्त होता है और दिन की अवधि न्यूनतम रहती है।
ऋतु परिवर्तन से क्या है इसका संबंध?
दिन और रात की लंबाई में बदलाव ऋतु परिवर्तन का संकेत होता है। गर्मियों में दिन लंबे और रातें छोटी होती हैं, जबकि सर्दियों में इसका उलटा होता है। शीतकालीन संक्रांति सर्दियों के चरम को दर्शाती है। इसके बाद दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारतीय परंपरा में शीतकालीन संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व भी है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसे शुभ माना जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण काल में किए गए पूजा-पाठ और दान का विशेष फल मिलता है। इसी कारण इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
मध्यप्रदेश में कितना छोटा रहेगा दिन?
21 दिसंबर को मध्यप्रदेश में दिन की अवधि औसतन 10 घंटे 44 मिनट की रहेगी। शेष समय यानी करीब 13 घंटे 16 मिनट तक अंधेरा रहेगा। यह पूरे साल की सबसे लंबी रात होगी। रविवार के बाद दिन धीरे-धीरे बढ़ने लगेंगे।
औसतन 13 घंटे 16 मिनट तक पसरा रहेगा अंधेरा
खगोल विज्ञानी डॉ. वी.के. परसाई के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध से अपनी अधिकतम दूरी पर होगा। इसका असर यह होगा कि सूर्य की किरणें सीधी न पड़कर तिरछी पड़ेंगी। इसी वजह से दिन छोटा और रात लंबी हो जाती है। मध्यप्रदेश के अधिकांश इलाकों में यही स्थिति देखने को मिलेगी।
भोपाल में कब होगा सूर्योदय और सूर्यास्त?
राजधानी भोपाल में 21 दिसंबर को सूर्योदय: सुबह 6:57 बजे होगा और सूर्यास्त: शाम 5:39 बजे इस तरह भोपाल में दिन की अवधि लगभग 10 घंटे 42 मिनट की रहेगी। आसपास के जिलों में भी लगभग यही समय रहेगा।
आज से शुरू होगी सूर्य के उत्तरायण होने की प्रक्रिया
भारतीय समयानुसार रविवार रात 8 बजकर 33 मिनट पर सूर्य की किरणें मकर रेखा पर लंबवत होंगी। इसके साथ ही सूर्य के उत्तरायण होने की स्थिति शुरू हो जाएगी। इसके बाद दिन धीरे-धीरे लंबे और रातें छोटी होने लगेंगी।



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