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Deepti Sharma Success Story: ताने, संघर्ष और जीत, जानें कैसे दीप्ति शर्मा की कहानी हर लड़की के लिए मिसाल
Deepti Sharma Success Story: 'लड़की को क्रिकेट में भेजते हो?' ये वो लाइन थी जो दीप्ति शर्मा के पिता को हर दिन सुननी पड़ती थी। समाज के तानों के बीच उन्होंने अपनी बेटी का हाथ थामा और कहा 'खेलना है तो खेलो, बाकी दुनिया की फिक्र मत करो।' आज वही लड़की भारतीय महिला क्रिकेट टीम की शान बन चुकी है। भारतीय महिला टीम में आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम करने वाली टीम में ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा के नाम का सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है।
58 रन और 5 विकेट चटकाने वाली दीप्ति के लिए ये सफर इतना आसान नहीं था लेकिन खेलने और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। इस सफर में उनका साथ देने वाले थे उनके पिता। आइए आज उस लड़की की सफलता की कहानी जो सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि उस सपने की है जो कभी हालातों से नहीं डरता।

बचपन में शुरू हुआ संघर्ष
उत्तर प्रदेश के आगरा की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का सफर दीप्ति शर्मा के लिए आसान नहीं था। दीप्ति का जन्म 24 अगस्त 1997 को हुआ था। पिता रेलवे में काम करते थे और सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी दीप्ति ने क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई। पिता ने भी बेटी का साथ दिया और बिना किसी तरह के तानों की परवाह कर उन्हें क्रिकेट के मैदान तक पहुंचाया। दीप्ति को लड़कों के साथ प्रैक्टिस करनी पड़ती थी क्योंकि उस समय लड़कियों की टीम ही नहीं थी।
एक थ्रो जिसने बदल दी जिंदगी
भारतीय क्रिकेट महिला टीम के लिए 2 नवंबर का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। महिला टीम ने वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया है। इस मैच को जीत के द्वार तक पहुंचाने का श्रेय ऑलराउंडर खिलाड़ी दीप्ति शर्मा को जाता है। हालांकि सभी खिलाड़ियों ने अपना बेस्ट दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक थ्रो ने दीप्ति की पूरी जिंदगी बदल दी।
दरअसल, दीप्ति मां के मना करने के बाद भी पिता के साथ क्रिकेट प्रैक्टिस देखने जाया करती थीं, उसी दौरान बॉल उनकी तरफ आई तो उन्होंने उसे पूरे जोर के साथ वापस मैदान में फेंका। वो थ्रो इतना तेज था कि पूर्व क्रिकेटर हेमलता काला समझ गईं कि दीप्ति में कुछ खास है। बस वहीं से शुरू हुई उनकी असली जर्नी और एकलव्य स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई।
16 की उम्र में खेला पहला इंटरनेशनल मैच
बता दें कि दीप्ति शर्मा ने सिर्फ 16 साल की उम्र में साल 2014 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला इंटरनेशनल मैच खेला। इसके बाद दीप्ति ने एक के बाद एक मैच खेले और अपने शानदार खेल का प्रदर्शन किया और सफलता की सीढ़ी चढ़ती चली गईं। बीते दिन भी दीप्ति ने अपनी बल्लेबाजी और बॉलिंग से सभी को हैरान कर दिया और टीम को जीत दिलाने में अपना अहम योगदान दिया।



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