"बीवी को तब तक पीटना जायज जब तक हड्डी ना टूटे" बुरी तरह भड़के जावेद अख्तर, जानें पूरा मामला

By Kushmita Rana

Javed Akhtar On Taliban Farman: पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने उन खबरों पर चिंता जताई है, जिनमें कहा गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान ने घरेलू हिंसा को कुछ शर्तों के साथ सही ठहराया है। संस्था का कहना है कि अगर ऐसी बात सच है, तो यह महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को कानूनी मान्यता देने जैसा है। पीएफआई ने इसे "चौंकाने वाला और खतरनाक" बताया है।


Javed Akhtar On Taliban Farman

जावेद अख्तर ने उठाई आवाज

मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर पत्नी को इस शर्त पर पीटने की इजाजत दी जाती है कि उसकी हड्डी न टूटे, तो यह बेहद गलत और अमानवीय है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई महिला अपने पति की इजाजत के बिना मायके जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल हो सकती है। जावेद अख्तर ने भारत के मुफ्तियों और मुल्लाओं से अपील की कि वे इस तरह के नियमों की खुलकर निंदा करें, क्योंकि यह सब धर्म के नाम पर किया जा रहा है।

क्या है नया कानून?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने करीब 90 पन्नों की एक नई आपराधिक संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें घरेलू हिंसा से जुड़े कुछ प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं।

खबरों में कहा गया है कि पति द्वारा की गई मारपीट पर सजा तभी हो सकती है, जब गंभीर चोट लगे और उसे साबित किया जा सके। और सबूत देने की जिम्मेदारी महिला पर ही होगी। वहीं, पति के लिए अधिकतम सजा सिर्फ 15 दिन की जेल बताई जा रही है।

घर छोड़ने पर भी सजा?

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर कोई महिला पति की अनुमति के बिना घर छोड़ देती है और वापस आने से मना करती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है। इतना ही नहीं, उसे अपने घर में पनाह देने वाले रिश्तेदार भी कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं।

इन खबरों के सामने आने के बाद महिला अधिकारों से जुड़े कई लोग और संगठन चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसे नियम लागू होते हैं, तो इससे महिलाओं की आजादी और सुरक्षा पर बुरा असर पड़ सकता है।

Credit: Filmibeat

Story first published: Sunday, February 22, 2026, 6:40 [IST]
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