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मुझे अपने बॉस के साथ हमबिस्तर होने या जॉब छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया
बहुत कम उम्र में ही मैंने काम करना शुरु कर दिया था और करियर में खुद को साबित करने के लिए मुझे कई तरह की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। इस बात को एक साल हो चुका है जब मैंने ऑफिस ज्वाइन किया और ये मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल समय रहा।
करियर के शुरुआती समय में मेरा कई अच्छे और बुरे दोस्तों और सहकर्मियों से मिलना हुआ। एक दिन मुझे किसी काम के लिए सीनियर सहकर्मी के पास जाने को बोला गया।

सीनियर था
वो बहुत सीनियर थे वो भी मेरे से दोगुनी उम्र के जब मैंने उनसे दिए गए काम के बारे में बात करनी शुरु की तो मुझे अहसास हुआ कि उनकी बातों और हाव-भाव में कुछ तो अटपटा सा था। मैंने तब तो नज़रअंदाज़ कर दिया और वापिस अपने डेस्क पर आ गई। मैं समझ गई थी कि उस शख्स को मुझे इग्नोर करना होगा।

बार बार मुझे बुलाता..
हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। मुझे बार-बार बिना किसी वजह के उसके ऑफिस बुलाया जाने लगा। मुझे अपने सामने बैठाकर वो बस मुझे घूरता रहता था। कुछ दिनों तक तो ऐसा ही चलता रहा। कई बार तो मैंने ऐसी किसी परिस्थिति को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की लेकिन कभी-कभी ये संभव ना हो सका।

एक दिन
एक दिन उसने मुझसे सीधा अपने साथ हमबिस्तर होने के लिए कह दिया, जैसे कि ये सब उसके लिए कोई आम बात हो। मैं हैरान रह गई और काफी डरी भी हुई थी। मैं तुरंत उसके ऑफिस से बाहर आ गई लेकिन उसका असली चेहरा सामने आना तो अभी बाकी था। वो मेरे बॉस से काम के बहाने से मुझे उसके पास भेजने के लिए कहता रहता था और मुझे भी उसके ऑफिस जाना पड़ता था।

उसने मैसेज किया कि
मेरा घर ऑफिस के पास ही था। एक शाम को मैं काम के बाद घर जाने की जल्दी में थी। मेरे पास उसका मैसेज आया कि वो मेरे घर आ रहा है। ऐसा लगा मानो डर के कारण मेरे पैर जमीन में ही जम गए हों, मैं एक इंच भी नहीं हिल पा रही थी।
किसी तरह हिम्मत जुटाकर मैं घर पहुंची। घर पहुंचते ही मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया और दरवाजे के आगे एक टेबल लगा दी और बैडमिंटन रैकेट लेकर बैठ गई।

मुझे समझ नहीं आया
इस बारे में मैं अपने पैरेंट्स को भी नहीं बता सकती थी क्योंकि वो किसी पारिवारिक मसले में फंसे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस सबसे मुझे कैसे निपटना चाहिए लेकिन फिर मैंने हिम्मत जुटाकर इस सबका सामना करने की सोची। वो रात को तकरीबन 11 बजे आया और पड़ोसियों की वजह से धीरे से दरवाज़ा खटकटाने लगा।

दरवाजा नहीं खोला
मैं उसकी आवाज़ सुन रही थी लेकिन कुछ भी नहीं कर पा रही थी। मैं भगवान से खुद की मदद करने की प्रार्थना करने लगी। उसने मेरे मोबाइल पर फोन करके मुझे धमकी देने शुरु कर दी कि अगर मैंने दरवाज़ा नहीं खोला तो मेरी नौकरी और करियर को बर्बाद कर देगा।

वो फिर आया..
मेरी किस्मत खराब थी जो मेरे फोन में रिकॉर्डिंग का ऑप्शन ही नहीं था, तब मैंने अपने अंदर के डरे और सहमे हुए इंसान को खुद की मदद करने के लिए जगाया। उस रात तो वो चला गया क्योंकि उसके पास कोई और ऑप्शन नहीं था। लेकिन अगली रात वो फिर आया और पहले से भी ज्यादा सख्ती के साथ बोलने लगा। अब मुझे उसका सामना करना ही था।

फिर उसने की ये घाटिया बात
मैंने फैसला किया कि सुबह उठकर सबसे पहले मैं उससे जाकर मिलूंगीं। मैंने कई घंटे वॉशरूम में ही बिता दिए लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं खुद ही एक चोर हूं। खत्म होते ही मुझे उसके पास जाने का फरमान आ गया। ये सुनकर तो मेरी हवाईयां ही उड़ गईं। बेशर्मी से उसने मुझे कहा कि वो अपने ऑफिस में मेरे साथ कुछ भी कर सकता है और अपने इरादों को पूरा करने के लिए उसे बैड की जरूरत नहीं है।

नौकरी छोड़ दूं या..
उसने ठीक यही कहा था और मेरे पास बस दो ही ऑप्शन थे - या तो मैं नौकरी छोड़ दूं या उसका प्रपोज़ल स्वीकार कर लूं। मैंने पहला वाला ऑप्शन चुना और अपने बॉस के हाथ में इस्तीफा थमा दिया। मेरी किस्मत इतनी खराब थी कि उन्होंने मुझे साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट की याद दिला दी और उसे पूरा किए बिना मैं नौकरी तक नहीं छोड़ सकती थी।

मेरा पीछा करने लगा
इसे पूरा होने में अभी दो महीने बाकी थे और तब तक मुझे बस लड़ना था। मैं उसके ऑफिस के आसपास भी रहने से बचने लगी थी। हालांकि, एक दिन मुझे ऑफिस से निकलने में दूसरों से थोड़ी देर हो गई। तब मैंने उसे अपने ठीक सामने खड़े देखा। उसने मुझसे बात करने के लिए कहा लेकिन मैंने घर जाने की बात कही। वो मेरे घर तक मेरा पीछा करने लगा।

मैं डर गई
मैं इतना ज्यादा डर गई थी कि मैंने अपने घर में एंट्री ही नहीं की और 3 घंटे तक एक जूस सेंटर के बाहर ही खड़ी रही। ये सब कोई कदम उठाने के लिए बहुत था। मैंने उसे कॉल करके चेतावनी दी कि अगर वो ये सब करना नहीं छोड़ेगा तो मैं उसकी शिकायत कर दूंगीं। वो हंसने लगा। मुझे पता था कि डी-डे आने वाला है। मैं तैयारी करने लगी कि अपने बॉस से मुझे क्या कहना है। अगले दिन मैं अपने बॉस के ऑफिस गई और उन्हें सब कुछ बता दिया। उन्होंने बड़े ध्यान से मेरी सारी बात सुनी और मुझे दिलासा देकर भेज दिया। मुझे लगा कि अब मुझे कोई डर नहीं है।

कुछ नहीं हुआ..
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। चूंकि वो एक ऊंचे पद पर बैठा था इसलिए कोई भी उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकता था और ना ही ऐसा करने की किसी में हिम्मत थी। दो महीने बीत गए और मैंने उस ऑफिस को छोड़ दिया। वो फिर भी मुझे कॉल करता रहा। उसने किसी तरह से मेरे पुराने दोस्तों से मेरा नया नंबर तक ले लिया था। इसलिए मैंने अपने दोस्तों तक से संपर्क तोड़ दिया था। मैंने अपना घर भी बदल दिया था ओर यहां तक कि शहर तक बदल दिया लेकिन फिर भी वो पता नहीं कैसे मेरा नंबर पता करके मुझे कॉल करता रहा।

10 साल हो गए इस बात को..
इस बात को 10 साल हो चुके हैं और आज भी वो हादसा मेरे दिमाग में किसी बुरे सपने की तरह ताज़ा है जैसे कि ये कल की ही बात हो। अब मैंने अपना नंबर बदलना बंद कर दिया है और उसका फोन उठाकर मैं बस चुप रहती हूं।
इस सबको बंद करने के भले ही कई तरीके होंगें लेकिन मुझे उसे नज़रअंदाज़ करना ही बेहतर लगा। सकता है कि मैं गलत हूं लेकिन मैंने वही किया जो मैं कर सकती थी।
इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें ताकि सभी को पता चल सके कि ऑफिस में सेक्शुअल हैरेसमेंट के लिए सज़ा जरूर मिलनी चाहिए। यहां तक कि सीनियर लेवल पर बैठे लोगों को भी ये बात अपने दिमाग में फिट कर लेनी चाहिए वो जब चाहे अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते हैं लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ कोई गंभीर एक्शन लेने की जरूरत है।



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