इस बीमारी के वजह से महिलाएं को दिनभर में चाहिए 50 से 100 बार ऑर्गेज्‍म....

By Staff

क्‍या आपने कभी ऐसी बीमारी के बारे में सुना है कि जिसका इलाज सिर्फ सेक्‍स है? जिसमें एक महिला सेक्‍स के लिए किसी हद तक जा सकती है। उसे पूरे दिन में 50 से 100 बार सेक्‍स चाहिए होता है। ये कोई सेक्‍स की लत नहीं है, दरअसल ये एक बीमारी है। जिसमें सेक्‍स करने से उस पीडि़त को निजात मिलता है।

आइए जानते है कि आखिर ये कौनसी बीमारी है? वैसे दुनियाभर में इस बीमारी के इक्‍के दुक्‍के ही केस सामने आए है। लेकिन इस बीमारी की वजह से महिलाएं अवसाद का शिकार हो सकती है। आइए जानते है इस बारे में।

 पीजीएडी डिसऑर्डर

पीजीएडी डिसऑर्डर

इस बीमारी का नाम पीजीएडी (पर्सिस्टेंट जेनिटल अरॉउजल डिसऑर्डर) है। जिसे हिंदी में महिला जननांग उत्तेजना विकार कहते हैं। इस बीमारी में पैर और पेट के अंदरुनी निचले हिस्से में तेज दर्द होता है, जिसे कम करने या दूर करने के लिए हर रोज सेक्स करना पड़ता है।

 50 से 100 बार होता है सेक्‍स जैसा एहसास

50 से 100 बार होता है सेक्‍स जैसा एहसास

PGAD से ग्रसित लोगों में 50-100 बार सेक्स की इच्छा होती है या फिर सेक्स करने जैसा अहसास होता है। महिलाएं सिर्फ दर्द से निजात पाने के लिए सेक्‍स करती है।

किसी भी उम्र में हो सकती है

किसी भी उम्र में हो सकती है

पीजीएडी के कारण न केवल तनाव और परेशानी का सामना करना पड़ता है बल्कि इसे शुरू में समझना आसान नहीं है। कई बार इसकी वजह से लोगों को शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है. इस गड़बड़ी से पीड़ित होने वालों की कोई उम्र नहीं होती है। यह बूढ़े और जवान दोनों में हो सकती है।

 सामने आए कुछ केस

सामने आए कुछ केस

अमेरिका के फ्लोरिडा की रहने वाली 25 वर्षीय युवती अमांडा को दिनभर में 50 बार ऑर्गेज्‍म का अहसास होता है। वो पिछले एक दशक से इस बीमारी से पीडि़त है। इसके अलावा न्‍यूयॉर्क में 44 वर्षीय एक नर्स किम रामसे भी इस बीमारी से पीडि़त है। हालांकि इस बीमारी के केस बहुत ही कम देखने को मिलते है।

 लक्षण

लक्षण

  • यौन उत्तेजना की अवधि काफ़ी लंबी हो जाती है, यह घंटों, हफ़्तों और महीनों तक हो सकती है।
  • इसमें असंख्‍य बार सेक्‍स करने का मन करता है।
  • इसमें यौन उत्तेजना बिल्कुल अनियंत्रित, अनचाही और अनुचित होती है।
  • पीजीएडी से न केवल यौन गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है बल्कि इससे अलग भी उत्तेजना का अहसास होता है।
  • इससे पीड़ित लोग काफ़ी तनाव महसूस करते हैं।

Story first published: Thursday, April 5, 2018, 17:33 [IST]
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