जब मैं सोके उठी तो अकेली थी और मेरे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था..

By Staff

कैसा लगता है, जब आप सोने के बाद एकदम से उठती है और खुद को बेड पर बिना कपड़ों के पाते हो। जब यह मेरे साथ हुआ मैं बहुत डरी हुई थी। मैं बहुत सदमें में थी। मैं चाहकर भी इस चीज से बाहर नहीं आ पा रही थी।

बीती रात, मेरी और मेरी बेस्‍ट फ्रैंड के बीच बहुत ही बड़ा झगड़ा हुआ जो कि आधी रात तक चलता रहा। मैं बहुत थक चुकी थी, मुझे चेंज करने का भी समय नहीं था। मैं सीधे जाकर सो गई। मैं कब बेड पर गई मैं कब सो गई मुझे याद भी नहीं।

मैं सो गई थी...

मैं सो गई थी...

अमूमन मैं सुबह 7 बजे तक उठ जाती हूं लेकिन देर रात जगने की वजह से मैं कुछ देर और सोना चाहती थी। इसलिए मैंने उस हिसाब से अलार्म लगाया। मैं अपनी एक दोस्‍त के साथ रहती थी, वो वीकेंड पर घर गई हुई थी। सोने से पहले मेरे दिमाग में ख्‍याल आया कि क्‍या मैंने दरवाजा अच्‍छे से बंद किया कि नहीं किया। मैंने याद किया शायद मैंने कर दिया है, मैं बहुत ही थकी हुई थी इसलिए मैं सो गई।

जब उठी..

जब उठी..

मैं सुबह बिना अलार्म के ही 7 बजे उठ गई, मुझे महसूस हुआ कि मेरी हुडी गायब है। उसके बाद मैं और ज्‍यादा डर गई, जब मैंने देखा कि मेरे शरीर में एक भी कपड़ा नहीं था। मैं बहुत ही बुरी तरह डर गई थी।

डर कर हो गया बुरा हाल..

डर कर हो गया बुरा हाल..

मैं कांपने लगी थी, शायद मेरे दिमाग की सोचने की गति कम हो चुकी थी। मेरे दिमाग में बहुत सारी चीजें घूमने लगी। जब मैंने बेड के दूसरी तरफ देखा तो वहां मेरे कपड़े जमीन पर पड़े हुए थे। सब कुछ जैसे का तैसा पड़ा हुआ था। सिर्फ मेरे कपड़ों को छोड़कर। मैंने अपने फ्रैंड को फोन लगाया, जिससे मेरा झगड़ा हुआ था और उसे सबकुछ बताया।

मुझे दोस्‍त ने समझाया..

मुझे दोस्‍त ने समझाया..

उसने मुझे शांत कराया और समझाया कि हो सकता है कि मैं स्‍ट्रेस में थी और इतनी थकी हुई थी कि मुझे याद नहीं है कि मैंने कब अपने कपड़े उतारे और सोने चली गई। या फिर नींद से उठकर मैंने अपने कपड़े चेंज किए हो और मुझे कुछ भी याद नहीं। वो सही था, लेकिन फिर भी मैं खुद को शांत नहीं कर पा रही थी।

पुलिस को फोन करने की सोची..

पुलिस को फोन करने की सोची..

मुझे लगने लगा कि किसी ने मेरा एडवांटेज उठाया है और मेरे साथ गलत करने की कोशिश की है। मेरे दिमाग में बार बार आ रहा था कि मैं पुलिस को फोन करके बुलाउं, लेकिन जब इस बारे में मैंने स्‍टडी की तो मुझे मालूम चला कि ऐसा दुनिया भर में औरतों के साथ होता है।

इसके बाद मुझे लगा शायद ये मेरे दिमाग का ही कोई वहम है।

दरवाजा चैक किया तो..

दरवाजा चैक किया तो..

मेरे दोस्‍त ने फिर मुझे दरवाजे का लॉक चैक करने के लिए कहा। मैंने चैक किया, हमारे दरवाजे के दो ताले है एक तो जो चाबी से खुलता है दूसरा स्‍लाइडिंग बोल्‍ट से। ये देखते ही मैं और ज्‍यादा डर गई। मैंने देखा कि दरवाजा जो चाबी से खुलता है वो बंद था और इस तरह के लॉक के साथ छेड़छाड़ करना आसान था।

मैं सोचने लगी..

मैं सोचने लगी..

इसके बाद मैं अंदाजे लगाने शुरु हो गई कि हो सकता है कि कोई मेरे घर में आया हो और जब मैं पूरी रात थककर सोयी हुई थी तो हो सकता है कि कोई घर में आया हो और मेरे साथ गलत हरकत की हो। उस समय मेरे दिमाग में बहुत कुछ चलने लगा।

 मुझे महसूस हुआ कि ..

मुझे महसूस हुआ कि ..

इसके बाद मैंने जब एंट्रेस डोर को खोला तो वो लॉक था। यह साल्‍इडिंग बॉल्‍ट था। मैं बहुत ही रिलेक्‍स हो गई और फिर मैंने महसूस किया कि मेरे घर में कोई नहीं आया था। जब मैं बहुत ही थकी हुई थी तब मैंने खुद ही कपड़े उतारे लेकिन मुझे याद नहीं है वो मैंने कब किया।

 मैं आज भी नहीं भूल सकती हूं...

मैं आज भी नहीं भूल सकती हूं...

लेकिन मैं आज भी वो सुबह नहीं भूल सकती हूं कि उस दिन जब मैं उस स्थिति में उठी तो मुझ पर क्‍या गुजरी। मैं कितना डर गई थी।

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