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एक्टर फरदीन खान ने IVF के अनुभव को लेकर बयां किया दर्द, जानें इस ट्रीटमेंट से जुड़े खतरें और नुकसान
In vitro fertilization Side Effects And Risks : इन दिनों फरदीन खान हीरामंडी वेबसीरीज में 14 सालों के बाद कमबैक को लेकर चर्चाओं में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान फरदीन ने एक्टिंग करियर से लिए लॉन्ग ब्रेक के बारे में बात करते हुए बताया कि जब उन्होंने फैमिली प्लानिंग के बारे में सोचा तो उन्हें बच्चे पैदा करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा इसलिए एक्टर ने आईवीएफ चुनने का फैसला किया और एक्टिंग की दुनिया से ब्रेक ले लिया।
फरदीन खान 2011 में वो लंदन शिफ्ट हुए और उसके बाद आईवीएफ प्रोसेस शुरू हुआ। फरदीन खान ने बताया, नताशा के गर्भधारण करने के बाद हमें पता चला कि हम जुड़वां बच्चों के पैरेन्ट्स बनेंगे लेकिन 6 महीने के बाद उसका मिसकैरेज हो गया। वैसे आपको बता दें आईवीएफ का रास्ता भी आसान नहीं होता और यह शरीर के लिए काफी मुश्किल और कठिनाइयां पैदा करता है।

आइए जानते है कि आईवीएफ क्या होता है और इस प्रोसेस के दौरान किन मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है।
क्या होता है आईवीएफ?
आईवीएफ (IVF) का पूरा नाम इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है, जिसे टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है। आईवीएफ में महिला की अंडेदानी से अंडे निकालकर उनका पुरुष के स्पर्म के साथ फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइजेशन कराया जाता है। इस फर्टिलाइजेशन से बनने वाले भ्रूण यानी एम्ब्रायो को महिला के गर्भाशय में प्लांट किया जाता है।
जिन महिलाओं को नेचुरली कंसीव करने में दिक्कते आती है वो इस प्रोसेस को चुनती है। ICMR की एक फर्टिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया में आईवीएफ का सक्सेस रेट 30 से 35 प्रतिशत है।
IVF के दौरान हो सकती हैं ये मुश्किलें
प्रीमैच्योर डिलीवरी: कुछ रिसर्च बताते हैं कि आईवीएफ के कुछ मामलों में प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बच्चे का जन्म के समय वजन कम रह सकता है।
गर्भपात का खतरा : IVF में गर्भ धारण करने वाली महिलाओं के गर्भपात की दर, नेचुरल प्रेग्नेंसी कंसीव करने वाली महिलाओं के समान लगभग 15 से 25 प्रतिशत होती है।
संक्रमण का खतरा : IVF प्रोसेस में अंडे को इकट्ठा करने के लिए एस्पिरेटिंग सुई का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी वजह से ब्लीडिंग और इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी: IVF का इस्तेमाल करने वाली कुछ महिलाओं के साथ एक्टोपिक गर्भावस्था की समस्या हो सकता है। इसमें अंडा फर्टिलाइज होने के बाद गर्भाशय से जुड़ने की जगह फैलोपियन ट्यूब से जुड़ जाता है।
स्ट्रेस : आईवीएफ प्रोसेस बार-बार फेल होने से महिलाएं मेंटल डिसऑर्डर की शिकार हो जाती हैं। कई बार महिलाएं स्ट्रेस की वजह से इलाज बीच में ही छोड़ देती हैं।



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