Latest Updates
-
Maghi Special Bihar Tilkut Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट तिलकुट -
Summer Hair Care: गर्मियों में बालों के लिए बेस्ट 5 हल्के तेल, बिना चिपचिपाहट के मिलेंगे लंबे और मजबूत बाल -
Japan Mango Ban: जापान में सबसे ज्यादा कौन सा आम खाया जाता है? 20 साल बाद भारतीय आमों पर लगाया प्रतिबंध -
Restaurant Style Jeera Aloo Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा और कुरकुरा जीरा आलू -
World No Tobacco Day: स्मोकिंग की लत से छुटकारा चाहिए? ये 5 घरेलू उपाय बीड़ी-सिगरेट छोड़ने में करेंगे आपकी मदद -
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय
Ahmedabad Student Murder: बच्चों में क्यों बढ़ रही है हिंसक प्रवृत्ति और माता-पिता क्या करें?
Why Are Kids Becoming More Violent : हाल ही में अहमदाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई, जहां 8वीं कक्षा के एक छात्र ने 10वीं के स्टूडेंट की चाकू मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले से कहासुनी और रंजिश थी। आरोपी छात्र ने इसी बदले की भावना से स्कूल में चाकू लाकर वारदात को अंजाम दिया। सवाल यह है कि आखिर इतनी कम उम्र में बच्चे इतने हिंसक क्यों हो रहे हैं?
यह घटना केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और परिवारों के लिए चेतावनी है। किशोरावस्था वैसे भी एक संवेदनशील दौर होता है, जहां बच्चों के मन में तरह-तरह के भावनात्मक और मानसिक बदलाव आते हैं। अगर इस दौर में सही मार्गदर्शन न मिले तो छोटी-सी नाराजगी भी गंभीर हिंसा का रूप ले सकती है।

बच्चों में बढ़ती हिंसा के कारण
विशेषज्ञ मानते हैं कि गलत माहौल, दबाव और तकनीक का अंधाधुंध इस्तेमाल बच्चों को भटका सकता है।
इंटरनेट और हिंसक कंटेंट - आजकल बच्चे मोबाइल और इंटरनेट पर हिंसक गेम्स, वेब सीरीज़ और फिल्मों से प्रभावित हो रहे हैं।
परिवारिक माहौल - घर में झगड़े, चीख-चिल्लाहट या तनाव बच्चों को नकारात्मक बना सकते हैं।
सही संवाद की कमी - माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद न होना भी उनकी भावनाओं को दबा देता है।
गलत संगत - गलत दोस्ती और माहौल बच्चों को हिंसा की ओर धकेल सकते हैं।
किशोरावस्था और मानसिक दबाव
किशोरावस्था में बच्चे अपनी पहचान खोज रहे होते हैं। वे संवेदनशील भी होते हैं और छोटी-सी बात को गहराई से महसूस करते हैं। इस उम्र में उन्हें प्यार, धैर्य और समझ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अगर उन्हें नजरअंदाज किया जाए, तो वे गुस्से और आक्रोश को गलत तरीके से बाहर निकाल सकते हैं।
माता-पिता क्या करें?
इस दौर में बच्चों को सही राह दिखाना और हिंसा से दूर रखना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यहां कुछ अहम सुझाव दिए जा रहे हैं:
स्क्रीन टाइम सीमित करें - World Health Organization के मुताबिक,बच्चों को हिंसक गेम्स और वेब सीरीज़ से दूर रखें। उनके इंटरनेट इस्तेमाल पर नजर रखें।
रोल मॉडल बनें - माता-पिता का व्यवहार बच्चों पर गहरा असर डालता है। तनावपूर्ण स्थितियों में शांत और धैर्यवान रहें।
भावनाओं को समझें - अगर बच्चा चुप रहने लगे या गुस्सा ज्यादा करने लगे तो उससे प्यार से बात करें और उसकी परेशानी जानें।
संवाद बनाए रखें - रोज़ाना बच्चों से स्कूल, दोस्तों और उनकी दिक्कतों पर बातचीत करें।
सही संगत पर नजर रखें - बच्चों के दोस्तों और ग्रुप पर ध्यान दें। गलत संगत उन्हें भटका सकती है।
प्यार और अनुशासन का संतुलन रखें - बच्चों पर ज्यादा दबाव न डालें लेकिन ज़रूरी अनुशासन जरूर बनाए रखें।
सकारात्मक माहौल दें - घर का वातावरण शांत और सहयोगी होना चाहिए।
तनाव को पहचानें - अगर बच्चा पढ़ाई या किसी और दबाव में है तो उसकी मदद करें।
गुस्से को सही दिशा दें - बच्चों को खेल, आर्ट, संगीत या हॉबी की ओर प्रेरित करें।
विशेषज्ञ की मदद लें - अगर बच्चा बार-बार हिंसक व्यवहार करने लगे तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से संपर्क करें।



Click it and Unblock the Notifications