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एक पिता को पिता बनने से डर क्यूं लगता है? जानिये 10 कारण
अपने बच्चे का पिता बनना सबसे सुखदायक पल होता है।लेकिन कुछ पुरुष ऐसे हैं जिन्हें पिता बनने से डर लगता है। वे सोंच कर घबरा जाते हैं कि यदि वे बाप बन गए तो क्या वे अपने बच्चे और परिवार को स्ंभालने की जिम्मेदारी ले पाएंगे। सम्भावित पिताओं की अक्सर यह सोच रहती है कि पितृत्व की विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियों को निभाने में उन्हें मुश्किलों के सामना करना पड़ सकता है।
जबकि सच्चाई यह है कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे को जन्म देने तक माँ को ही विशेष महत्व मिलता है लेकिन कई ऐसे तरीके हैं जिससे कि इस पूरी यात्रा में सम्भावित पिता भी योगदान दे सकते हैं।
पिता बनने का डर एक भाग हो सकता है लेकिन कई सम्भावित पिता इस डर से उबर नहीं पाते हैं। हलाँकि सम्भावित पिता के हृदय में उत्सुकता और चिन्तायें अवश्य होती हैं लेकिन वह इस सब के बारे में किसी से कुछ नहीं कहता। इस मसले को और बेहतर समझने के लिये आइये हम सम्भावित पिताओं के 10 सामान्य डरों पर गौर करते हैं।

सुरक्षा का डर
एक सम्भावित पिता को इस बात का डर लगा रहता है कि क्या वह बच्चे को सही ढंग से पकड़ सकेगा, उसके डाइपर बदल पायेगा, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित कर पायेगा और घर को बच्चे की सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल कर पायेगा या नहीं आदि। ये डर सामान्य और वास्तविक हैं लेकिन इनसे ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।

नौकरी और परिवार में सन्तुलन
पिता के रूप कार्य का सन्तुलन सबसे महत्वपूर्ण चुनौती होती है। अपने परिवार के साथ गुणवत्तापरक समय का कोई विकल्प नहीं होता। सम्भावित पिताओं को इस बात का डर लगा रहता है कि क्या वे परिवार के साथ पर्याप्त समय बिता पायेंगें। उनकों इस बात की भी चिंता लगी रहती है कि परिवार की वजह से शायद वे काम को ठीक से नहीं कर पायेंगें या फिर कार्य के अतिरिक्त बोझ के कारण शायद वे बच्चे के जीवन के खास पलों में साथ न रह पायें।

वैवाहिक जीवन पर बच्चे का प्रभाव
बच्चे का होना पिता के जीवन को निश्चित ही बदल देता है और इसे जीवनसाथी के गर्भावस्था के दौरान ही देखा जा सकता है। जब बच्चा नया होता है और उसे माँ के समय और ध्यान दोनों की ज्यादा जरूरत होती है तो काफी थक जाने के कारण आपकी साथी पूर्व की भाँति अन्तरंग नहीं हो पायेंगी। लेकिन समय के साथ यह बदल जायेगा, इसलिये धैर्य रखें।

सामाजिक जीवन पर प्रभाव
सम्भावित पिताओं को इस बात का डर रहता है कि पितृत्व में ज्यादा समय लगने के कारण नका सामाजिक जीवन प्रभावित होगा। उन्हें इस बात का डर रहता है कि अपने दोस्तों के साथ वे सक्रिय सामाजिक जीवन का आनन्द नहीं ले पायेंगें। उनकों इस बात का भी डर लगा रहता है कि इसके कारण उनके सारे दोस्त और सामाजिक जीवन छूट जायेंगें।

पत्नी के साथ सम्बन्ध का डर
पूर्व के पारिवारिक अनुभवों के आधार पर कुछ पुरुषों को इस बात का भी डर होता है कि उनकी जीवनसाथी पूर्व की भाँति रोमांचक और सहज नहीं रह जायेगी। सम्भावित पिताओं को इस बात का भी डर रहता है कि उनकी साथी अपने बच्चे के कहीं ज्यादा प्यार करेगी और इस प्रकार वह अपने पूर्व के अन्तरंग सम्बन्धों से विलग हो जायेगा। बच्चे द्वारा उसका स्थान ले लिये जाने का यह डर स्वाभाविक होता है

प्रदर्शन का डर
सम्भावित पिताओं को इस बात का डर लगा रहता है कि जब उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही होगी तो वे शायद पर्याप्त सहारा न दे पायें। उन्हें सामने पड़ने वाले शारीरिक तरलों की अवस्था से बेचैनी, डर और अकर्मण्यता महसूस होती है। दूसरे शब्दों में उनकों यह लगता है कि जब उनके साथी को सहारे की आवश्यकता होगी तो वे शायद न दे पायें।

मौत का डर
नये जीवन की शुरूआत के साथ ही आप न चाहते हुये भी अन्त के बारे में सोचते हैं। सम्भावित पिता अक्सर नये मेहमान के आगमन के बाद अपने आप को युवा नहीं मानते। उनका यह डर होता है कि पिता बनने का बाद बच्चे और परिवार की इच्छायें अपनी इच्छाओं से बड़ी हो जाती हैं और आप अपने से ज्यादा किसी और को चाहने लगेगें।

अपने जीवनसाथी या बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में चिंता
सम्भावित पिताओं को इसबात का डर रहता है कि कहीं बच्चे की मृत्यु न हो जाये या जीवनसाथी की मृत्यु न हो जाये क्योंकि इसके कारण बच्चे के लालन पोषण का जिम्मा नपर आ जायेगा। बच्चे का जन्म एक झकझोर देने वाला एहसास होता है क्योंकि इस दौरान हो रहे अपार कष्ट को कारण कुछ भी भयावह हो सकता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि इस तरह के डर निराधार होते हैं और बेहतर है कि इनके बारे में न सोचा जाये।

अच्छा पिता साबित होना
सम्भावित पिता अक्सर खयालों में इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि वे अच्छे पिता साबित नहीं हो पायेंगें और वे अपने बच्चे को आर्थिक रूप से सुदृढ़ घर में लालन पोषण नहीं कर पायेंगे।

आर्थिक चिन्तायें
सम्भावित पिता इस बात से चिंतित रहते हैं कि वे अपने परिवार को न तो आर्थिक रूप से सहारा दे पायेंगे और ना हीं वे बच्चे की अच्छी शिक्षा का ध्यान रख पायेंगे। उनको इस बात का डर लगा रहता है कि पत्नी के काम छोड़ देने की स्थिति में पर्याप्त धन नहीं होगा और यह डर जायज़ भी है क्योंकि कई परिवारों में बच्चे के जन्म के साथ अचानक, अस्थाई ही सही, दो लोगों के लिये दो आय को स्रोतों से तीन लोगों के लिये एक आय के स्रोत की स्थिति आ जाती है।



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