Latest Updates
-
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
जन्म के बाद नवजात शिशु के इन खतरों से सचेत रहें
जॉन्डिस एक खतरनाक बिमारी है और जिन बच्चों को यह होता है उनका विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बिलीरुबिन नीचे लाया जा सके।
जब बच्चे का जन्म होता है तो उसकी विशेष देखभाल करने की ज़रुरत होती है क्योंकि माँ के गर्भाशय में बच्चा कई बीमारियों से सुरक्षित रहता है।
हालांकि, कई बार सेवा और सावधानी के अलावा भी नवजात शिशु कई तरह की बिमारियों के शिकार हो जाते हैं। पचास प्रतिशत से अधिक नवजात शिशु पहले हफ्ते में ही निओनेटल जॉन्डिस के शिकार होते हैं।
जॉन्डिस एक खतरनाक बिमारी है और जिन बच्चों को यह होता है उनका विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बिलीरुबिन नीचे लाया जा सके।

नवजात शिशु के पास बिलीरुबिन को प्रोसेस करने के लिए बैक्टीरिया या एंजाइम नहीं होते, इसलिए वह जल्दी जॉन्डिस के शिकार होते हैं।
जॉन्डिस कितना खतरनाक है यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह किन कारणों से हो रहा है, बिलीरुबिन कितना अधिक है और बिलीरुबिन लेवल कितनी आसानी से ऊपर उठता है।

हॉस्पिटल में जब नवजात शिशु में जॉन्डिस पाया जाता है तो डॉक्टर उन्हें समय समय पर चेक करते रहते हैं। नवजात शिशु की आँखों और त्वचा को देखकर आप पता लगा सकते हैं कि उसे जॉन्डिस है या नहीं। अगर नवजात शिशु को जॉन्डिस है तो डॉक्टर उसका कारण ढूंढने की कोशिश करते हैं।

जो नवजात शिशु स्तनपान नहीं करते उन्हें सौच कम होता है और बिलीरुबिन का स्राव कम होता है। जब बच्चा सही ढंग से स्तनपान करने लगता है तो जॉन्डिस अपने आप ख़त्म हो जाता है। जब बच्चा पांच से सात साल का होता है तो उसे जॉन्डिस हो सकता है जो दो हफ्ते तक चरम पर रहता है और तीन से बारह हफ्ते तक रह सकता है।

अगर नवजात शिशु को जन्म के दूसरे दिन ही हॉस्पिटल से निकाल लिया जाता है तो यह ज़रूरी है कि उसके बिलीरुबिन की स्तर की जांच कर ली जाए।
अगर नवजात शिशु को पहले कुछ दिनों में उच्च स्तर का जॉन्डिस पाया जा चुका है तो हॉस्पिटल से छुट्टी के बाद भी कम से कम दो बार उसे डॉक्टर से दिखवाने की ज़रुरत है।

नवजात शिशु में हेमोलीटिक बिमारी होती है तो बच्चे का खून माँ के खून का विरोधी होता है। चूँकि उनका ब्लड टाइप काफी अलग होता है, माँ से एंटीबाडी प्लेसेंटा को छेद कर नवजात के रेड ब्लड सेल पर अटैक कर सकता है और उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।

हायपोथायरोडिस्म जन्म के समय या उसके कुछ समय बाद भी दिख सकता है। यह खासकर उन बच्चों में दिखता है जिनकी माँ भी हायपोथायरोडिस्म के लक्षण से गुज़रती हैं। हायपोथायरोडिस्म की जांच के लिए खून की जांच होती है।



Click it and Unblock the Notifications
