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नवजात शिशु के लिए क्यों जरूरी है रोटावायरस वैक्सीन

नवजात शिशु में उल्टी, डायरिया और फ्लू आदि रोटावायरस संक्रमण के लक्षण हैं। अगर आपके नवजात शिशु को डायरिया हो गया है या उसे बुखार या फ्लू हो गया है तो ये रोटावायरस के लक्षण हो सकते हैं। संयुक्त राज्य में कुछ साल पहले रोटावायरस से प्रभावित बच्चों में डायरिया के गंभीर लक्षण देखे गए थे। इसकी वजह से हज़ारों शिशुओं को एमेरजेंसी सुविधा दी गई थी। ये सभी बच्चे 5 साल से कम उम्र के थे।
इस रोटावायरस संक्रमण से शिशुओं को बचाने के लिए पहले रोटाशील्ड नामक वैक्सीन बनाई गई थी। हालांकि, इस वैक्सीन से शिशु की छोटी आंत में समस्या उत्पन्न होने लगी थी।

शिशु को रोटावायरस वैक्सीनेशन की क्यों है जरूरत
अब रोटावायरस के संक्रमण से बचने के लिए दो तरह के वैक्सीन उपलब्ध हैं और ये दोनों ही बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। इस वायरस की वजह से शिशु में गंभीर रूप से डायरिया और उल्टी की समस्या देखी जाती है। कुछ मामलों में शिशु में डिहाइड्रेशन और मृत्यु तक संभव है। साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप अपने शिशु को इस संक्रमण से बचा सकते हैं। ये वायरस इंसानों से फैलता है और शिशु को इससे बचाने का एकमात्र उपाय है और वो है वैक्सीनेशन।

वयस्कों को इस वायरस से कितना हो सकता है नुकसान?
ये वायरस किशोरावस्था में भी प्रभावित करता है। हालांकि, बच्चों और शिशुओं के मुकाबले युवाओं में होने वाला ये वायरस थोड़ा सौम्य होता है।

रोटरिक्स और रोटाटेक वैक्सीन में क्या फर्क है?
इन दोनों ही वैक्सीन में सिर्फ एक ही अंतर है और वो है इनमें मौजूद लैटेक्स तत्व की उपलब्धता। रोटाटेक वैक्सीन में लैटेक्स होता है जबकि रोटारिक्स में लैटेक्स मौजूद नहीं होता है। अगर शिशु को लैटेक्स से एलर्जी हो तो ऐसी स्थिति में उसे रोटारिक्स वैक्सीन दिया जाता है।

भारत में रोटावायरस वैक्सीनेशन
रोटावायरस वैक्सीन शिशु के मुंह में दिया जाता है जबकि दूसरे तरह के वैक्सीन नसों में लगाए जाते हैं।
2 महीने के शिशु को एक डोज़
4 महीने के शिशु को एक डोज़
6 महीने के शिशु को एक डोज़
शिशु को रोटाटेक वैक्सीन देने की ये सामान्य खुराक है। अगर शिशु को रोटारिक्स वैक्सीन दिया जा रहा है तो 2 महीने के शिशु को एक खुराक और 4 महीने से अधिक माह के शिशु को एक खुराक दी जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान
शिशु और बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन देने से पहले आपको कुछ सावधानियां बरतने की ज़रूरत है-
6 सप्ताह से कम और 8 महीने से ज्यादा उम्र के शिशु को ये वैक्सीन नहीं दिया जाता है। इस वैक्सीन को लेने की सही उम्र 2 महीने से शुरु होती है।
अगर आपके शिशु को ये वैक्सीन लेने पर किसी तरह की एलर्जी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ऐसा करने से बचें
ये वायरस इंसानों के संपर्क में आने पर शिशु में फैलता है, नवजात शिशुओं का इसलिए खास ध्यान रखना चाहिए। बच्चे के डायपर बदलने के बाद अच्छी तरह से हाथ धो लें। शिशु देखभाल केंद्र और अस्पतालों में ये वायरस बहुत होता है और ये एक शिशु से दूसरे शिशु में भी फैल सकता है। इसके अलावा गंदगी में रहने या शिशु से किसी बड़े बच्चे में भी ये वायरस फैल सकता है। हालांकि, किशोरावस्था में इस वायरस का असर कम होता है लेकिन फिर भी ये दूसरों बच्चों में फैल सकता है।
रोटाटेक और रोटारिक्स दोनों ही वायरस पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इनका कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं है।



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