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प्रेगनेंसी में अरंडी का तेल पीने से जल्दी खुल जाता है बच्चेदानी का मुंह, जानें कितनी सही है ये बात
पुराने जमाने में अगर प्रेगनेंसी के 40वें हफ्ते के बाद भी प्रसव पीड़ा शुरू नहीं होती थी, तो घर की बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती महिला को लेबर पेन शुरू करने के लिए अरंडी के तेल के सेवन करने की हिदायत देती थी।
कई वर्षों से पूरे महीने होने के बाद जल्दी से डिलीवरी के लिए लेबर पेन शुरू करने के लिए अरंडी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसके प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है लेकिन फिर भी लोग प्रसव पीड़ा शुरू करने के लिए अरंडी के तेल का इस्तेमाल करते हैं।

अरंडी का तेल कितना सुरक्षित?
एक रिपोर्ट के मुताबिक जब महिला गर्भावस्था के नौवें महीने में अरंडी के तेल का सेवन करती हैं तो जल्दी डिलीवरी हो सकती है। मतलब अरंडी के तेल के सेवन करने से एक-दो दिन महिला को डिलीवरी का दर्द होना शुरु हो जाता है और महिला के प्रसव की संभावना को बढ़ा देता है. कई लोगों का ये मानना है कि यदि कोई महिला तय समय से पहले बच्चे को जन्म देना चाहती है और उसके लिए अरंडी के तेल का सेवन कर रही हैं तो उसके कई दुष्यप्रभाव हो सकते है .इससे यूटेरस को नुकसान पहुंच सकता है, एम्बिलिकल कॉर्ड बाहर आ सकता है. इसलिए प्रेग्नेनेंसी के समय किसी भी चीज को खाने से पहले अपनी डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए
कब से पीना चाहिए अरंडी का तेल
महिला को अरंडी के तेल का सेवन प्रेगनेंसी के 40वें हफ्ते के बाद करना चाहिए। तब तक महिला के 9 महीनें पूरे हो चुके होते है। नोवें महीने में महिला की डिलीवरी होना नॉर्मल माना जाता है।
कैसे करें सेवन
9 महीने में महिला भोजन में अरंडी के तेल का इस्तेमाल कर सकती है। पानी में अरंडी के तेल को मिलाकर इसका उपयोग कर सकती हैं। इसके अलावा रात को सोने से पहले एक चम्मच अरंडी का तेल दूध में मिलाकर सेवन कर सकती हैं।
हर महिला में अरंडी के तेल से प्रसव पीड़ा शुरू होने का अलग- अलग समय होता है। कुछ महिलाओं को 24 घंटे के अंदर ही पेन शुरू हो सकता है, तो कुछ महिलाओं को इससे ज्यादा समय लग सकता है।
अरंडी का तेल लेने के बाद 24, 36 और 48 घंटे के बाद लेबर पेन शुरू होने को लेकर बहुत सीमित अध्ययन हुए हैं।
कैसे करता है काम
अरंडी के तेल में रेचक गुण होते हैं और माना जाता है कि इससे लेबर पेन भी शुरू होता है। प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल ऑफ साइंसेज में प्रकाशित रिसर्च पेपर का कहना है कि अरंडी के तेल में रिसिनोलिक एसिड होता है जो आंतों और गर्भाशय के प्रोस्टाग्लैंडिन रिसेप्टर्स में संकुचन को उत्तेजित करते हैं।
इससे आंतों में ऐंठन पैदा होती है जिससे मल आता है और गर्भाशय में संकुचन पैदा होता है। इससे फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट का अवशोषण भी सीमित हो सकता है जिससे शरीर में पानी की कमी और संकुचन होता है।
ये नुकसान हो सकते है
एक रिसर्च के अनुसार जिस भी गर्भवती महिला को अरंडी का तेल दिया गया, उन्हें मतली की शिकायत हुई। इसके अलावा इसके सेवन से डिहाइड्रेशन की शिकायत हो सकती है।
प्रेगनेंसी के बाद स्ट्रेच मार्क्स को हटाएं
महिला प्रसव के बाद भी अरंडी के तेल का उपयोग कर सकती प्रसव के बाद कमर, पेट पर हुए स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। इसे कमर में लगाने से स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते हैं।



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