Latest Updates
-
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि -
Sheetala Saptami Vrat Katha: शीतला सप्तमी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा आरोग्य का आशीर्वाद
क्या तनाव से इनफर्टिलिटी होती है?
कभी सोचा है कि इतनी कोशिशों के बावजूद आप कंसीव क्यों नहीं कर पा रही हैं। इनफर्टिलिटी के लिये हमेशा चिकित्सा स्पष्टीकरण ही काफी नहीं होते। इसके लिये मनोवैज्ञानिक कारणों की ओर भी ध्यान देना जरूरी है। वे लोग जिनके ऑफिस का शेड्यूल बहुत हैक्टिक है, उन्हें इस समस्या का ज्यादा खतरा रहता है। चलिये जानते हैं कि जब बात कंसीव करने की आती है तो तनाव कंसीव करने की क्षमता पर कैसे कम करता है।

ओव्यूलेशन- ऐसी महिलाएं जो घर के काम के साथ-साथ जॉब भी संभाल रहीं हैं, उन्हें तनाव ज्यादा होता है। इन केसों में या तो वे ओव्यूलेट करना बंद कर देती हैं या फिर बहुत कम ओव्यूलेशन होता है। इसलिये वह कंसीव नहीं कर पाती। यह सब केवल तनाव से ही होता है, इसलिये खुद को किसी अच्छे थैरेपिस्ट को दिखवाएं, जिससे आपका तनाव कम हो सके।
तनाव भी दो प्रकार के होते हैं, जिसमें दिमाग हर समय तनाव से घिरा रहता है और दूसरा वह, जब आप बस कभी-कभी ही तनाव में रहती हैं। कंसीव ना कर पाने का कारण हर समय तनाव में रहना ही होता है।
मासिक चक्र- भाग-दौड भरी जिंदगी कहीं ना कहीं हमारे मासिक चक्र पर भी गहरा असर डालती है। अगर मासिक चक्र में किसी प्रकार की गडबडी आई तो तुरंत समझ लेना चाहिये कि कंसीव करने में परेशानी होगी। कुछ महिलाओं में तो मासिक की अवधि कम हो जाती है या फिर कुछ में तो मासिक धर्म होना ही बंद होता है।
लेकिन अगर आपके पीरियड्स किसी बीमारी या फिर मौसम में किसी बदलाव के आने की वजह से महीने भर के लिये टल गए हैं, तो इसमें चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसा होने पर आप कुछ ही समय बाद अपने नार्मल पीरियड्स पर वापस आ जाएंगी।
शरीर और दिमाग का मिलन- अगर आपको प्रेगनेंट बनना है, तो दिमाग और शरीर दोंनो ही को स्वस्थ्य रूप में रखना होगा। रिसर्च से पता चला है कि ज्यादा तनाव लेने से हमारा ब्रेन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यह कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का रिसाव तेज कर देता है, जिससे स्पर्म काउंट और बच्चा जनने का सीधा संबन्ध होता है। इसके अलावा मस्तिष्क अणुओं का उत्पादन करता है, जिसका नाम नीरोपेप्टाइड है, जो भावनात्मक तनाव से जुडा हुआ है। यह अणु प्रजनन क्रिया में हस्तक्षेप करते हैं। इसलिये हमेशा खुश रहें और अपने शरीर का ख्याल रखें।
स्ट्रैस दोंनो ही पुरुष और महिला में फर्टिलिटी की समस्या पैदा कर सकता है। इसलिये अपनी लाइफस्टाइल को बदलें और जब भी मौका मिले तो आराम करें।



Click it and Unblock the Notifications











