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स्पर्म जैपिंग: पुरुषों के लिये नई गर्भनिरोधक विधि
अनचाहे गर्भ को टालने के लिये वैसे तो बाजार में कंडोम से लेकर गर्भनिरोधक गोलियां मौजूद हैं। जहां महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करती हैं तो वहीं पुरुष कंडोम को ज्यादा बेहतर मानते हैं। अगर देखा जाए तो महिलाओं के लिये बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं लेकिन अगर पुरुष चाहें तो कंडोम और नसबंदी के अलावा भी दूसरी गर्भनिरोधक विधि को अपना सकते हैं। यह एक नए तरीके की विधि है जिसका नाम "र्स्पम जैपिंग" है, जो कि खासकर पुरुषों के लिये बनाई गई है। इसमें अल्ट्रासाउंड विधी के दा्रा र्स्पम की मात्रा को कम किया जाता है जिससे महीनों की परेशानी दूर हो जाती है। अभी इस विधि पर रिर्सच चल रही है।

क्या होती है र्स्पम जैपिंग?
एक शोध के अनुसार जब हल्की मात्रा में अल्ट्रासाउंड की किरणों को चूहों के अंडकोष पर प्रकाशित किया गया तब पाया गया कि उन्होंने र्स्पम का निर्माण बंद कर दिया है। वैसे तो चूहों के मुकाबले पुरुष ऐसा करना बंद नहीं कर सकते लेकिन वह बॉंझ यानी की इनफर्टाइल जरुर बन सकते हैं। कुछ ही दिनों में अगर पुरुष दुबारा से सही होना चाहता है तो उसे केवल एक इंजेक्शन लगवानी होगी और वह फर्टाइल हो सकेगा।
कैसे की जाती है?
इस विधि के दा्रा पुरुष के डक्टस डिफरेंस(वास डिफरेंस) में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से जैल डाला जाता है। इस जैल को अंदर डालने से र्स्पम का प्रवाह रुक जाता है। इसलिये पुरुष इस बर्थ कंट्रोल विधि को एक प्राकृतिक तरीका भी मान सकते हैं। वास डिफरेंस एक ट्यूब होती है जिसके दा्रा र्स्पम का प्रवाह टेस्टिस से पेनिस की ओर होता है। यह विधि बिल्कुल नसबंदी की ही तरह है जिसमें अतंर केवल इतना है कि वास डिफरेंस को ना ही काटा जाता है और ना ही बांधा जाता है, बस जैल डाल कर र्स्पम के प्रवाह को रोक दिया जाता है।
वैसे र्स्पम जैपिंग स्थाई गर्भनिरोधक विधि नहीं है। वैज्ञानिक अभी भी इस विधि पर स्टडी कर रहे हैं। अभी तक इस बर्थ कंट्रोल प्रोसेस का कोई भी साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। यदि आप इस तरीके को अपनाना चाह रहे हैं तो अच्छा होगा कि अपने डॉक्टर से जरुर सलाह ले लें।



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