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प्रसव पीड़ा से पहले हर महिला के मन में आते हैं ये सवाल
आज हम आपको बताते हैं कि प्रसव को लेकर गर्भवती महिलाओं के मन में कैसे सवाल आते हैं और ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए। ध्यान रहे, पहली बार मां बन रही महिलाओं का अनुभव अलग हो सकता है लेकिन ये बातें जानना
किसी भी महिला के जीवन में गर्भावस्था का चरण सबसे खास और खुशी का होता है। लेकिन इसमें मुश्किलें और तकलीफें भी बहुत सहनी पड़ती हैं।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सुबह के समय जी मिचलना, उल्टी होना और मूड में बदलाव आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
गर्भवती महिलाओं को इंतज़ार होता है कि कब उनकी गोद में उनका बच्चा आए और इन परेशानियों से उन्हें छुटकारा मिले। लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कई कठिनाईयों से होकर गुज़रना पड़ता है।
नॉर्मल डिलीवरी हो या सी-सेक्शन, प्रसव का दर्द हर महिला के लिए सबसे अधिक पीड़ादायक होता है। किसी भी स्त्री को इतना दर्द अपने पूरे जीवन में कभी नहीं हुआ होता जितना कि प्रसव के दौरान सहना पड़ता है। पहली बार बच्चे को जन्म दे रही स्त्रियों के लिए तो और भी मुश्किल समय होता है।
हर स्त्री के लिए गर्भावस्था और डिलीवरी का समय कुछ अनोखा होता है। इसलिए ये कह पाना मुश्किल होता है कि पहली बार मां बन रही महिलाओं के लिए प्रसव पीड़ा का अनुभव कैसा रहेगा। पहली बार बच्चे को जन्म दे रही महिलाओं के मन में अपनी डिलीवरी को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं।
आज हम आपको बताते हैं कि प्रसव को लेकर गर्भवती महिलाओं के मन में कैसे सवाल आते हैं और ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए। ध्यान रहे, पहली बार मां बन रही महिलाओं का अनुभव अलग हो सकता है लेकिन ये बातें जानना आपके लिए जरूरी है।

पहला सवाल
पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल जो मन में आता है वो है प्रसव की शुरुआत के बारे में। इसका जवाब कोई सरल नहीं है और गलत जानकारी होने पर आपको परेशानी हो सकती है।

दूसरा सवाल
पहली चीज़ जो आपको जाननी चाहिए वो ये है कि आपको प्रसव की पूरी प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए। प्रसव दो भागों में विभाजित होता है-पहला पूर्व प्रसव और दूसरा एक्टिव प्रसव। ये दोनों ही अवस्थाएं हर महिला में अलग-अलग होती हैं इसलिए इनका अंदाज़ा लगा पाना थोड़ा मुश्किल होता है।

तीसरा सवाल
कुछ महिलाओं का प्रसव बहुत जल्दी हो जाता है तो कुछ स्त्रियों को लंबी प्रसव पीड़ा से गुज़रना पड़ता है। कई सप्ताह पहले ही उन्हें प्रसव के संकेत मिलने लग जाते हैं। ये कुछ लक्षण हैं जो प्रसव की पीड़ा से पहले सामने आते हैं -:
- कमर के निचले हिस्से में दर्द होना। माहवारी के समय आपको जैसा दर्द होता है प्रसव से कुछ समय पूर्व भी आपकी कमर में कुछ उसी तरह का दर्द महसूस होता है।
- नियमित अंतराल या थोड़े-थोड़े समय में पेट में संकुचन या मरोड़ उठनी शुरु हो जाती है। हर बार ये संकुचन या मरोड़ और ज्यादा लंबी और तेज होती जाती है।
- किसी भी तरह का दर्द महसूस होने से पहले आपकी मेंब्रेन यानि झिल्ली टूट सकती है।
- भूरे रंग का बलगम एवं कफ आने लगता है।
- आंतों में ढीलापन आने लगता है।
- मूड में बदलाव और भावनाएं उठने लगती हैं।
- अनिद्रा की परेशानी रहती है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए ?
जब भी आपको कुछ गलत महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये कुछ संकेत निकट प्रसव के हैं। इसके अलावा अगर आपको बच्चे की गति या कोई क्रिया कम महसूस हो या आपकी आंखों में कमज़ोरी महसूस हो या बुखार या सिरदर्द महसूस हो तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रसव पीड़ा से पहले क्या संकेत मिलते हैं ?
अगर आपको थोड़ा हल्का महसूस हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपको प्रसव पीड़ा जल्द ही शुरु होने वाली है। ऐसा तब महसूस होता है जब शिशु अपनी जगह बदलकर सिर को आपकी पेल्विस की ओर कर लेता है। इस समय आपको अचानक से पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होने लगता है।
आपको सांस लेने और खाने में आसानी होगी लेकिन पेशाब करते समय ज्यादा ज़ोर लगाना पड़ेगा। कोई भी गलत दबाव भी आपके शरीर को सही संकुचन के लिए तैयार कर सकता है।
योनि स्राव अधिक होने लगता है। आपके मूड में बदलाव आता है और आपको अपने घर को साफ और व्यवस्थित रखने का मन करता है।

जल्दी प्रसव हो तो क्या करें
रिलैक्स करें और शांत रहें। कुछ लोग जल्दी होने वाली प्रसव पीड़ा को शांत करने के लिए पैरासिटामॉल लेने की भी सलाह देते हैं। आप गर्म पानी से स्नान भी कर सकती हैं। थोड़ा टहलने से आपकी प्रसव प्रक्रिया में तेजी आएगी।
खुद को ज्यादा न थकाएं और थोड़े-थोड़े समय में आराम करती रहें। हाई कैलारी फूड जैसे सूखे मेवे खा सकती हैं। अपनी एनर्जी को बचाने की कोशिश करें। प्रसव पीड़ा होन पर आपको एनर्जी की काफी जरूरत होगी।

कैसे होती है एक्टिव प्रसव पीड़ा ?
गर्भाश्य के 4 से 5 सेमी चौड़ा होने या खुलने पर एक्टिव प्रसव पीड़ा शुरु हो जाती है। हर दो मिनट में आपको दर्द या दबाव महसूस होता है। आपको गर्माहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। आपको अपने आसपास के परिवेश की परवाह नहीं रहती है।
ध्यान रहे कि ये दर्द और पीड़ा जल्द ही समाप्त हो जाएगी और फिर आपकी गोद में आपका शिशु होगा। अपने शरीर की हर बात को गौर से सुनें। अपनी एनर्जी को चिल्लाने पर व्यर्थ न करें। डॉक्टर के कहने पर पुश करने पर ध्यान दें। दर्द में भी सांस लेना न भूलें। थोड़ा दर्द सहने के बाद आपको इस दुनिया की सबसे बड़ी खुशी का अहसास होगा।



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