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देबिना बनर्जी ने 14 महीने की बेटी को भेजा प्ले स्कूल, बच्चों को प्ले स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है?
टीवी एक्ट्रेस देबिना बनर्जी ने अपनी 14 महीने की बेटी लियाना चौधरी को प्लेस्कूल से पहले स्कूल में दाखिला दिला दिया है। यह कई लोगों को अजीब लग सकता है, लेकिन नए जमाने के माता-पिता पैरेंटिंग की नई तकनीकें आजमा रहे हैं और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे कम उम्र से ही दुनिया का पता लगाएं।
भारतीय शिक्षा प्रणाली के अनुसार, बच्चों के लिए प्री-स्कूल शुरू करने की सही उम्र 1.5 से 3 वर्ष है। हालांकि, देबिना अपनी बेटी को प्री-स्कूल से पहले स्कूल भेज रही हैं। आइए जानते हैं कि बच्चे को प्ले स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है?

कौनसी उम्र में भेजे बच्चे को प्ले स्कूल
भारतीय शिक्षा प्रणाली के अनुसार, बच्चों के लिए प्री-स्कूल शुरू करने की सही उम्र 1.5 से 3 वर्ष है। ज्यादातर प्रीस्कूल कम से कम ढाई साल की उम्र के बच्चों को लेने की परमिशन देते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं हुआ कि हर बच्चा जो इस उम्र तक पहुंच जाए, वह प्रीस्कूल जा सकता है। क्यूंकि हर बच्चा न केवल शारीरिक रूप से बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी अलग तरह से बढ़ता है। इसलिए, ये जरूरी है सभी कारकों पर विचार करके ही बच्चे को प्ले स्कूल भेजने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।
प्री-स्कूल भेजने के फायदे
- जो बच्चे प्री-स्कूल में 6 घंटे बिताते हैं, उनके लैंग्वेज और गणित के स्किल्स अच्छे होते हैं। इससे बच्चों को अपनी उच्च शिक्षा में काफी मदद मिलती है।
- स्कूल में अपनी उम्र के बच्चों और टीचर से बात करने पर बच्चे के कॉग्नीटिक फंक्शन में सुधार आता है। कुछ अध्ययनों के बच्चों की भाषा और शब्दाबली में सुधार आता है और शब्दावली का विकास होता है क्योंकि बच्चे घर पर जितना सीख पाते हैं और उससे अधिक प्ले स्कूल में बोलना और शब्दों को पहचनना सीखते हैं।
- प्ले स्कूल में जाने से बच्चे कई तरह की गतिविधियों में भाग लेते है, जिससे उनके मस्तिष्क, हाथ और आंख की कॉर्डिनेशन इम्प्रूव होती है। ड्रॉइंग से लेकर स्लाइड पर चढ़ने तक और सीढ़ी पर चढ़ना-उतरना बहुत सामान्य लगने वाली गतिविधियों की मदद से भी आपके बच्चों में मोटर कौशल का विकास होता है।



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