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Exclusive: बच्चों के दांतों को लेकर ये गलतियां कभी ना करें, सीनियर डॉक्टर से जानिये परफेक्ट डेंटल केयर
छोटे बच्चों का टूथब्रश कैसा होना चाहिए? टूथपेस्ट कैसा और कितना इस्तेमाल करना चाहिए? टूथपेस्ट पसंद ना हो तो क्या करें? दांतों का रंग बदलने लग जाए तो क्या करें? ऐसे कई सवाल हैं जिसको लेकर पेरेंट्स दुविधा में रहते हैं। ऐसे सवालों के जवाब के साथ ही साथ डेंटल केयर से जुड़ी बहुत जरुरी बातों को आपके साथ शेयर कर रही हैं दिल्ली कि मशहूर डेंटिस्ट डॉ. अपेक्षा घई।
सामान्यतः छोटे बच्चों के दांतों को लेकर पेरेंट्स गंभीर नहीं होते हैं। वो सोचते हैं कि दूध के दांत तो वैसे भी टूटने ही हैं, इसके बाद जो परमानेंट दांत आएंगे तब सावधानी बरतनी जरुरी है। लेकिन यह सही नहीं है। दांतों कि साफ सफाई और देखभाल को लेकर बच्चो में आदत विकसित करनी पड़ती है और इसमें समय लगता है। अगर सही समय पर बच्चों में सही आदत और जागरूकता विकसित कर ली जाए तो ठीक है, वरना बाद में मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। दांतों कि विशेषज्ञ डेंटिस्ट डॉ. अपेक्षा घई कि सलाह आजमाइए और अपने नौनिहालों के दांतों को सुरक्षित और मजबूत बनाइये।

सवाल: दूध पीते बच्चों के दांत अगर खराब होने लगे तो इसके क्या लक्षण हैं और इसके क्या क्या संभावित कारण हो सकते हैं?
जवाब: जो बच्चे दूध पी रहे हैं उनके दांत अगर खराब होने लगे तो इसका पहला लक्षण है कि दांत का रंग बदलने लगता है, धीरे धीरे काला पड़ने लग जाता है। दूसरा लक्षण है बच्चे रात में खाना खाने से ना नुकुर करने लगते हैं। दांत काले पड़ने लगे मतलब कैविटी की शुरुआत होने लगी है। अधिकतर मामलों में इसके पीछे नर्सिंग बोटल्स सही तरीके से उपयोग ना करने की वजह से होता है। कई बार बच्चे फार्मूला मिल्क पीते समय बोटल्स मुंह में ही रख कर सो जाते हैं जिससे दांत पर बुरा असर होने लगता है। दांत निकलते समय बच्चों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई पेरेंट्स बच्चों के मुंह में शहद लगा देते हैं ताकि उसको आराम मिले, ऐसा ना करें। ब्रेस्टफीड कराने या बोतल से दूध पिलाने के बाद मुंह साफ करने की आदत डालें। कॉटन को हलके गर्म पानी में डुबाकर बच्चो के गम पर हल्का रगड़ दें। इससे बच्चो में ब्रशिंग की आदत विकसित होने लगती है।

सवाल: 2 साल से छोटे बच्चे ब्रश नहीं करते तो ऐसे में उनके अन्दर ब्रशिंग की आदत कैसे विकसित करें?
जवाब: दो साल से छोटे बच्चे जो होते हैं उनके दिमाग में जो न्यूरोंस होते हैं उन्हें मिरर न्यूरोन कहते हैं। ये बहुत जल्दी कॉपी करना सीखते हैं। उनके सामने आप जो करेंगे वो उसे कॉपी करना चाहते हैं। पेरेंट्स उनके सामने ब्रश करें तो उनके अंदर भी ब्रश करने की आदत विकसित हो जाती है।
सवाल: छोटे बच्चों के लिए किस तरह का टूथपेस्ट इस्तेमाल करना चाहिए?
जवाब: छोटे बच्चों के दांत नाजुक होते हैं। बिना फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट ही इस्तेमाल करने चाहिए। 5 साल से छोटे बच्चों के लिए जो टूथपेस्ट मार्केट में उपलब्ध हैं वो खरीदते समय हमेशा ये जरुर देख लेना चाहिए कि उसके पीछे हरे रंग का निशान जरुर हो। हरे रंग के निशान का मतलब है कि वो वेजेटेरियन टूथपेस्ट है। इसके अलावा उसके कंपोज़िशन को देखिये जिसमें ये जरुर लिखा हो कि ये बिना फ्लोराइड का है।
सवाल: अगर फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट इस्तेमाल करते हैं तो बच्चों को उससे क्या नुकसान होगा?
जवाब: अगर फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट इस्तेमाल करेंगे तो बच्चों के दांतों में पीले रंग की धारियां बनने लगती हैं जिसे फ्लोरोसिस्ट कहा जाता है। कई बार पीने के पानी में भी फ्लोराइड होने की वजह से बच्चों के दांत पीले पड़ने लगते हैं। इसलिए बिना फ्लोराइड वाले और हरे रंग के निशान वाले टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। आयुर्वेदिक टूथपेस्ट बच्चों के लिए इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि हमें साफ तौर पर नहीं पता होता कि उसमें किस तरह की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया गया है और उसका बच्चों पर कैसा असर होगा।
सवाल: बच्चों के लिए टूथपेस्ट की मात्रा कितनी लेनी चाहिए?
जवाब: आमतौर पर लोग टूथब्रश के ब्रिसल्स को टूथपेस्ट से भर देते हैं, ऐसा बिल्कुल न करें। टूथपेस्ट मटर के दाने के आकार में बिल्कुल जरा सी ही लें।
सवाल: बच्चों का टूथब्रश किस तरह का होना चाहिए?
जवाब: सबसे पहले तो ब्रश का हेड छोटा होना चाहिए। बड़े हेड वाले टूथब्रश को दांतों के पीछे ले जाने में मुश्किल होती है। ब्रश के ब्रिस्ल्स अल्ट्रा सॉफ्ट होने चाहिए। ब्रश खरीदते समय उसके पैक पर जरुर देखें कि वो अल्ट्रा सॉफ्ट हो। अल्ट्रा सॉफ्ट ब्रिस्ल्स होने से बच्चों के गमपैड्स नहीं छिलते हैं इसलिए छोटे हेड और अल्ट्रा सॉफ्ट ब्रिस्ल्स वाले टूथब्रश ही बच्चों के लिए लें।
सवाल: अगर बच्चों को टूथपेस्ट पसंद न हो तो क्या करना चाहिए?
जवाब: अगर बच्चे को टूथपेस्ट का फ्लेवर पसंद नहीं आ रहा हो तो सिर्फ पानी से भी ब्रश किया जा सकता है। ब्रशिंग जरूरी है और ब्रश किस तरह से किया जा रहा है वो अहम है। टूथपेस्ट फ्लेवर ऐड करता है और झाग देता है जिससे फ्रेशनेस महसूस होती है। इससे भी ज्यादा जरूरी है कि जितनी बार ब्रेस्टफीड करें या कुछ खिलाएं, उसके बाद कुल्ला जरुर कराएं। रात को सोने से पहले कुल्ला करना बहुत जरूरी है। ये सब आदतें जितनी जल्दी शुरू हो उतनी फायदेमंद है।
सवाल: मसूड़ों की सुरक्षा के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब: जो बच्चे ब्रश नहीं करते हैं उनके पेरेंट्स को ये दो तरीके अपनाने चाहिए - हल्का गुनगुना नमक मिले पानी में स्टरलाइज़ कॉटन को डूबोकर मसूड़ों की सफाई करनी चाहिए, या फिर मार्केट में सिलिकॉन ब्रश भी आते हैं जिन्हें आप अपने इंडेक्स फिंगर में पहन सकते हैं और उसकी मदद से आप हल्के दबाव से बच्चे के मसूड़ों को साफ कर सकते हैं।
सवाल: बच्चों के दांतों की देखभाल के लिए आप कोई विशेष सुझाव देना चाहेंगी?
जवाब: पांच से छ साल की उम्र में बच्चों के परमानेंट दांत आने शुरू हो जाते हैं। ये दांत जिंदगी भर उनके साथ रहते हैं। इन दांतों का मजबूत होना और साथ ही साथ इनकी अच्छी देखभाल होना बहुत जरूरी है इसलिए इन परमानेंट दांतों के आने से पहले ही बच्चों के अंदर ब्रशिंग हैबिट्स और ओरल हाईजीन से जुड़ी आदतें विकसित करना बहुत जरूरी है। इनसे इनके दांतों में कैविटी नहीं बनेंगे और दांत सफेद और सुंदर रहेंगे। इसके अलावा इस बात का ध्यान रखें कि बढ़ते बच्चों के आहार में कैल्शियम और प्रोटीन की संतुलित मात्रा जरुर हो। कैल्शियम की संतुलित मात्रा होने से उनके jaw bone मजबूत होंगे जिनके ऊपर दांत आते हैं। साल में एक बार डेंटिस्ट से बच्चों के दांत जरुर दिखलाएं।



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