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Safety Tips During Mundan: बच्चे का पहली बार करवा रहे हैं मुंडन, इन 5 सेफ्टी टिप्स का रखें ध्यान
Mundan safty tips: हिंदू धर्म में जन्म के बाद सबसे पुरानी परंपरा में से एक है मुंडन। अनगिनत पौराणिक मान्यताओं से जुड़े इस संस्कार के पीछे कई वैज्ञानिक और धार्मिक कारण है। कुछ माता-पिता मानते हैं कि मुंडन कराने से बच्चे को किसी तरह की बुरी नजर नहीं लगती हैं।
वहीं कई पैरेंट्स का मानना है कि मुंडन से बच्चे की शुद्धि होती है और दांत आने के दौरान बच्चे को आराम मिलता है साथ ही दिमाग तेज बनता है। लेकिन सबसे लोकप्रिय धारणा यह है कि मुंडन करवाने के बाद बच्चे के अच्छे और घने बाल आते है।
हिंदू धर्म में मुंडन को 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। यह एक तरह से अनिवार्य रस्म होती है। इसे चूड़ाकर्म संस्कार भी कहते है। कई लोग बच्चे के पहले मुंडन को भव्य समारोह के तौर पर आयोजित करते है।
कुछ पैरेंट्स मुंडन की एक्साइटमेंट में कुछ अहम बातों को नजरअंदाज कर देते हैं।. जिसका असर बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए हम आपके साथ कुछ टिप्स शेयर कर रहे हैं कि मुंडन से पहले और किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है।

वैज्ञानिक कारण
शिशु जब जन्म लेता है, तब उसके सिर पर गर्भ के समय से ही कुछ केश पाए जाते हैं, जो अशुद्ध माने जाते हैं ।
इसके पीछे कारण यह है कि, जब बच्चा मां के गर्भ में होता है तब उसके सिर के बालों में बहुत से जर्म्स और बैक्टीरिया लगे होते हैं, जो साधारण तरह से धोने से नहीं निकल सकते है। इसके लिए एक बार बच्चे का मुंडन जरूरी होता है।
बाल कटवाने से शरीर की अनावश्यक गर्मी निकल जाती है, दिमाग व सिर ठंडा रहता है । शरीर विशेषकर सिर विटामिन-डी (धूप के रूप) को अच्छी तरह अवशोषित करके ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। बच्चों के हेयर ग्रोथ अच्छी होती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो बालों से जुड़े विकार पिएड्रा और पेडिक्युलोसिस को टालने के लिए भी मुंडन कराना फायदेमंद माना जाता है।
धार्मिक कारण
यजुर्वेद के अनुसार मुंडन संस्कार बल, आयु, आरोग्य तथा तेज की वृद्धि के लिए किया जाने वाला अति महत्वपूर्ण संस्कार है। आमतौर पर मुंडन संस्कार किसी तीर्थस्थल पर इसलिए कराया जाता है ताकि उस स्थल के दिव्य वातावरण का लाभ शिशु को मिले तथा उसके मन में सुविचारों की उत्पत्ति हो सके।
जानें मुंडन कराने से पहले और बाद में किन बातों का ध्यान रखें
1. अनुभवी से कराएं मुंडन
मुंडन किसी प्रोफेशनल और अनुभवी व्यक्ति से कराएं। साथ ही मुंडन से पहले शेविंग ब्लेड बदलने और साफ सफाई पर खास ध्यान देने की कोशिश करें। ध्यान दें कि मुंडन करने वाला व्यक्ति बीमार न हो।
2. बच्चे को दूध पिलाएं
मुंडन कराने से पहले बच्चे को दूध पिलाना न भूलें। भूख लगने पर बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और फिर मुंडन के समय रोने लगते हैं। इसलिए बेहतर है कि बच्चों का पेट भरने के बाद ही उनका मुंडन कराया जाए।
3.कम्फर्टेबल कपड़े पहनाएं
माता-पिता के रूप में, शिशु का पहला मुंडन समारोह आपके लिए रोमांचक हो सकता है। मेहमानों के बीच बच्चे को फैंसी कपड़े पहनाने से बचे। इससे बच्चे असुविधाजनक होने के साथ चिड़चिड़े भी हो सकते है। इसलिए, आप अपने बच्चे को जो भी पहनाने की योजना बना रहे है, पहले सुनिश्चित करें कि इससे आपके बच्चे को चलने और सांस लेने में आसानी हो।
4.बुखार में ना कराएं मुंडन
मुंडन संस्कार के लिए खासतौर पर मुहूर्त निकाला जाता है। मुहूर्त के साथ-साथ बच्चें के स्वास्थ्य को देखे। मुंडन कराने के लिए बच्चे का फिट होना बहुत जरूरी होता है। वहीं बुखार, सर्दी और जुकाम में बच्चे के मुंडन को अवॉयड करना बेहतर रहता है. क्योंकि मुंडन में बच्चों के सिर पर पानी छिड़कने से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने का खतरा रहता है। और इस दौरान बच्चे चिड़चिड़े हो जाते है।
5.बच्चे को नहलाना ना भूलें
मुंडन के बाद बच्चों के कपड़ों और बॉडी पर काफी बाल चिपक जाते हैं। जिसके चलते बच्चे को खुजली शुरू हो सकती है और बच्चा परेशान होने लगता है। इसलिए मुंडन के बाद बच्चे को जल्द से जल्द नहलाकर साफ कपड़े पहनाना ना भूलें।
6.घी और हल्दी का लेप लगाएं
मुंडन के बाद बच्चे के सिर पर हल्दी और घी का पेस्ट लगाएं। को त्वचा का बेस्ट एंटी-सेप्टिक माना जाता है।वहीं घी की तासीर ठंडी होती है। जिसके कारण कई लोग मुंडन के बाद बच्चे के सिर पर घी और हल्दी का लेप लगाने को तवज्जो देते हैं। इससे सिर पर लगे उस्तरे की तेज धार की चुंभन और जर्म्स से राहत मिलती है। हालांकि, इसे लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक होता है। वहीं चंदन का लेप लगाने से भी सिर को ठंडक मिलती है।
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)



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