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क्या आपका बच्चा भी कब्ज का शिकार है?
बच्चों में कब्ज की परेशानी होना एक आम समस्या है जिसका इलाज कई बार माता-पिता तथा चिकित्सकों के लिये एक चुनौती बन जाती है। सामान्यत: शिशु रोग चिकित्सक से परामर्श करने वालों में से तीन फीसदी बच्चे कब्ज के मरीज होते हैं तथा शिशु के पेट व लीवर रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने वाले में से 25 फीसदी बच्चे कब्ज से पीडि़त होते हैं।

लक्षण
- मल त्याग हफ्ते में तीन बार होना
- मल शुष्क अथवा असामान्य रुप से बड़ा होना
- मल त्याग में दर्द होना
कब्ज के प्रकार
दो सप्ताह से कम समय के कब्ज को एक्यूट कॉन्स्टीपेशन कहा जाता है, तथा इससे ज्यादा समय से हो तो क्रॉनिक कॉन्सटीपेशन कहा जाता है।
एक्यूट कॉन्सटीपेशन इन परिस्थितियों में होता है:
1 माता के दूध के साथ जब ऊपर के दूध की शुरुआत की जाती है।
2 दूध के साथ जब ठोस आहार की शुरुआत की जाती है
3 बच्चे को कोई अन्य बीमारी हो जाती है जिसमें बच्चे का खाना पीना कम हो जाता है।
कब्ज के कारण
- बच्चों के कब्ज का प्रमुख कारण फंक्शनल कॉन्स्टीपेशन है जिसमें सामान्य परीक्षण तथा जांचों में कोई खराबी या विकृती नहीं
- पाई जाती है। यह बच्चे के मल त्याग के दर्द के अनुभव से शुरु होती है तथा इस दर्द की वजह से बच्चा मल त्यागने में भी डरता है। जिससे बच्चे को और ज्यादा दर्द होता है।
- कब्ज की परेशानी उन बच्चों में ज्यादा होती है जिनके आहार में रेशा और पानी कम मात्रा में होता है।
- कब्ज की वजह थायरायड की बीमारी, गेहूं अथवा दूध की एलर्जी, आंतों की बनावट में कोई जन्मजात खराबी भी हो सकती है।
कब्ज से बचने के सुझाव
1 बच्चों को पानी का खूब सेवन कराएं
2 संतुलित आहार दें। रेशेदार पदार्थ ज्यादा मात्रा में खिलाएं।
3 बच्चों को शारीरिक व्यायाम के लिये प्रोत्साहित करें।
4 बच्चों में रोजाना एक ही समय पर शौचालय जाने की आदत डालें।
इलाज
- कब्ज के लक्षण दिखते ही शीघ्र ही डॉक्टर का परामर्श लें।
- कई माता-पिता दवा के डर से कब्ज का इलाज नहीं करवाते, इसमें कई बार कब्ज की समस्या गंभीर हो जाती है।
- कब्ज का इलाज प्रारम्भिक लक्षण के दिखते ही शुरु कर देना चाहिये।



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