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बच्चे जब झगड़ा करें तब क्या करें?

1.घर में हो झगड़ा
घर में बच्चे किसी भी उम्र के हों, झगड़ा उनमें हो ही जाता है। एक अच्छे पेरेंट्स होने के नाते आपका फर्ज बनता है कि दोनों बच्चे के झगड़ों में आप किसी का भी पक्ष न लें। हां, दोनों को अलग-अलग समझाएं। बड़े बच्चे को कहें कि उसे अपने छोटे बाई या बहन का ध्यान रखना है और उसी ओर छोटे बच्चे से कहें कि उसे अपने बड़े भाई-बहन का आदर करना है। इसके अलावा दोनों बच्चों की झगड़ने की बात को किसी और से न कहें क्योंकि बच्चों को बुरा लग सकता है।
2.जब बाहर से झगड़ कर आए बच्चा
आपका बच्चा घर से बाहर झगड़ कर आता है। अगर वह किसी को पीट कर आया है, तो बिल्कुल भी खुश न हों और न ही उसे शाबाशी दें। अगर वह पिट कर आया है, तो तुंरत शिकायत करने न भागें। कोई दूसरा शिकायत करे तो उसकी बात ध्यान से सुने। कहें कि आप अपने बच्चे को समझाएंगी और अब आगे से ऐसा होने की नौबत बिल्कुल नहीं आएगी। वैसे भी बच्चे लड़-झगड़ कर फिर से एक ही हो जाते हैं, इसके लिए अपने पड़ोसी से बैर लेने की क्या जरुरत।
3.समझाएं बच्चे को
अगर बच्चे की झगड़े की शिकायतें इक्का-दुक्का हों तो फिर ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है। लेकिन अगर शिकायतों की संख्या बढ़ गईं हों या फिर शिकायतें रोजाना आने लगी हों तो फिर बच्चे को अपने सामने बैठा कर अच्छी तरह से समझाएं। आपके भीतर का तनाव आपके बच्चे को दिखाई नहीं देना चाहिये। उसे मारे-पीटे नहीं बल्कि उसे यह समझाएं कि झगड़ालू बच्चों से सब दूर रहते है और उनके कोई दोस्त नहीं बनते।
4.फिर भी न माने तो
पहली बार समझाने के बावजूद जब बच्चा नहीं समझता तो फिर उसे प्यार से समझाएं। फिर अगर असर न पड़े तो अबकी बार हल्की सी सख्ती बरतें। सख्ती का असर भी अगर बच्चे पर नहीं हो रहा है, तो अब उसे सजा दें। पर याद रखें की यह सजा मार-पीट के रूप में बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिये। आप यह कर सकते हैं कि उसका फेवरेट कार्टून शो लॉक कर दें, उसे कुछ दिन के लिए उसकी मन पसंद चीज़े खाने न दें, दोस्तों के साथ बाहर खेलना जाना बंद कर दें आदि।



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