बच्‍चे को मारने से पड़ता है गलत असर

कई मां-बाप का मानना होता है कि अगर बच्‍चे को मारेंगे-पीटेंगे नहीं तो वह बिगड़ जाएंगा। लेकिन किसी भी प्रकार का बुरा व्‍यवहार चाहे वह डांटना हो या फिर मारना, दोंनो ही बच्‍चे के मानसिक तथा शारीरिक रूपों में खराब होता है। ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि अगर आप अपने बच्‍चे को मारेंगी-पीटेंगी नहीं तो वह बिगड़ जाएंगे। यहां पर कुछ कारण दिये हुए हैं जिनसे आप पता लगा सकती हैं कि आपको अपने मासूम बच्‍चे को क्‍यों‍ नहीं मारना चाहिये।

क्‍यों ना मारे अपने बच्‍चे को-

1. आक्रामक स्वभाव- अब आप अपने बच्‍चे को मारती हैं तो उसे केवल आपका बुरा और कठोर चरित्र ही दिखता है। और यही आपका बच्‍चा आपसे सीखता है। इसके अलावा, जब आप बच्‍चे को पीटती हैं तो उनके अंदर एक आंतरिक घृणा पैदा हो जाती है जो कि आपके इस चरित्र की वजह से आती है।

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2. जिद्दी मनोवृत्ति- बच्चे को अनुशासन सिखाने के चक्‍कर में आप उन्‍हें जिद्दी बना देती हैं। उन्‍हें ऐसा लगता है कि वह चाहे जो कुछ भी करें उसके लिये उन्‍हें मार जरुर पड़नी है। इसलिये आप जो काम करने को मना करेंगी आपका बच्‍चा वही करेगा।

3. दूरी आ जाना- अगर आप अपने बच्‍चे को मारेंगी तो उन्‍हें ऐसा लगेगा कि आप उन्‍हें प्‍यार नहीं करती। जो कि बिल्‍कुल गलत है और आप इस फीलिंग को बदलने के लिये कुछ भी नहीं कर सकती। फिर बाद में आप चाहें उनसे कितना भी फ्रेंडली व्‍यावहार कर लें, उनके मन में आपके लिये कहीं ना कहीं शत्रुतापूर्ण भावनाएं जरुर रहेंगी। इसके अलावा वे आपसे किसी तरह की फीलिंग शेयर नहीं करेंगे।

4. अन्तर्मुखी- बच्‍चों को मारने-पीटने से उनके अंदर एक झिझक सी पैदा हो जाती है। वे अपनी बातों को किसी भी दूसरे या मां-बाप के सामने कहने में झिझक महसूस करने लगते हैं और अंतर्मुखी स्‍वभाव के बन जाते हैं।

5. मोटापा- बच्‍चे आपके डर के मारे केवल स्‍कूल और घर के अंदर घुसे बैठे रहेंगे। ऐसे में वे मोटे हो जाएंगे और उन्‍हें कई तरह की बीमारियां पगड़ लेंगी।

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