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इमोशनल बच्चे की देखभाल के सही तरीके
बच्चे की परवरिश कोई आसान काम नहीं है| जब इमोशनल बच्चे की देखभाल करने की बात हो तो यह जिम्मेदारी और कठिन हो जाती है| मानो एक इमोशनल या भावुक बच्चा है जो की एक पल तो शांत और धैर्य से रहता है पर दुसरे ही पल और हिंसक और झगड़ालू हो जाता है, तो आप इस प्रकार के इमोशनल बच्चे की देखभाल डे -केयर में या स्कूल में कैसे करेंगें| ऐसे में आपके द्वारा हर कार्य सोच समझकर और हर हर शब्द नाप तोलकर बोला जाना चाहिए|
सख्त माता पिता कैसे डालते हैं अपने बच्चे पर प्रभाव
भगवान ने हर बच्चे को अलग - अलग मानसिकता का बनाया है इसलिए एक ही प्रकार का कठोर कदम सब बच्चों के लिए काम नहीं करता| आपको बच्चे को समझना होगा और इसके अनुसार कदम उठाना होगा| दिमाग में रखें कि आप एक कसी हुई रस्सी पर चल रहें हैं और एक छोटी सी चूक बड़ी गलती साबित हो सकती है|
हम आपको कुछ चीजें बता रहें हैं जो कि आपको इमोशनल बच्चे की देखभाल के दौरान ध्यान रखने चाहियें|

धैर्य -
आपके लिए पहली और सबसे जरुरी जरुरत है- धैर्य| बच्चों के साथ धैर्य से पेश आना बहुत जरूरी है| खास तौर पर इमोशनल बच्चे के साथ यह जरुरत और बढ़ जाती है| हो सकता है कभी - कभी आपको लगेगा कि आपके धैर्य की सीमा टूट रही है लेकिन संयम रखें धीरे - धीरे चीजें स्मूथ हो जाएंगी|

बच्चे को ठीक से सुनें-
इमोशनल बच्चे की देखभाल के दौरान बच्चे का एक- एक शब्द सही तरह सुनना बहुत जरुरी है| ऐसा जरूरी नहीं है कि आप हर शब्द पर ही कदम उठायें लेकिन देखते रहें और सुनते रहें| यह भी जरूर ध्यान रहे कि बच्चे को लगना चाहिए कि आप उसे सुन रहे हैं| कई बच्चे ध्यान खेंचने के लिए नखरे भी दिखाते हैं| अपने बच्चे के साथ ऐसा नहीं होने दें|

दया भावना रखें -
जब बच्चा जानता है की आप उसकी भावनाएं समझते हैं तो वह सहज महसूस करता है| इससे बच्चा आपसे जुड़ाव महसूस करता है| इससे बच्चे के लिए आपसे खुलकर बात करना आसान हो जाता है|

उन्हें अपनी बात रखने का मौका दें
हर बच्चा चाहता है कि उसे ठीक प्रकार सुना जाए इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है| इमोशनल बच्चे भी यह आत्मविश्वास चाहते हैं और इससे उन्हें अपनी भावनाएं और सोच रखने में मदद मिलती है|

उसकी भावनाओं का सही मूल्यांकन करें -
यह जरूरी है इमोशनल बच्चे की हर सोच और भावना को सही समझ जाए| लेकिन आपको उसकी मदद के लिए तैयार रहना चाहिए| चाहे कोई भी स्थिति हो, बच्चे की भावनाओँ और सोच का सही मूल्यांकन करें| यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है बच्चे को धैर्य से समझाएं और दूसरा पक्ष रखें|

खुश रहें
बच्चा आपके इमोशंस के अनुसार कार्य करता है| यदि आप खुश रहेंगे तो वह भी खुश रहेगा| यदि आप नाराज या क्रोधित रहेंगे तो बच्चा भी ऐसा ही रहेगा| इसलिए अपने बच्चे को खुश रखने के लिए आपको अपने अंदर झांकना होगा और ऐसा करके आप यह ख़ुशी बच्चे के अंदर देखेंगी|

सीमा निर्धारित करें
सीमा निर्धारित करें - हो सकता है कि आप दुसरे किसी बच्चे के साथ खुश, धैर्य, शांति और समझ रखें किन्तु इमोशनल बच्चे के साथ इसकी सीमायें होनी चाहिए| ध्यान रखें कि जब बच्चा अपनी सीमायें लाँघेगा तो उस पर गलत सन्देश जायेगा और ऐसा करने पर बच्चा आपके प्यार का गलत फायदा उठाना शुरू कर देगा|

बच्चे को निर्णय लेने के अनुमति दें
बच्चे को इमोशनली हेल्थी रखने के लिए उसे अपने निर्णय लेने दें परिणाम भले ही अच्छा या बुरा हो| इसके साथ ही उसके कठिन समय में बच्चे के साथ जरूर रहें| उसका जबरन हाथ पड़ने और उसके साथ चलने की आवश्यकता नहीं है जब केवल साथ रहना ही पर्याप्त है|

बच्चे मुलायम मिटटी की भांति होते हैं
जैसी शेप आप उन्हें देंगे वे वैसा ही आकार ले लेंगे| कुछ को शेप देते समय कुछ ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है, लेकिन आखिर वे एक व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ते हैं जो अपने आपके लिए पूर्ण जिम्मेदार होता है| इमोशनल बच्चे की देखभाल करते समय थोड़ा ज्यादा मेहनत करने की जरुरत होती है ताकि वह दुनिया का सामना आत्म- विश्वास और सकारात्मक नजरिये से कर सके|



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