Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय -
माचा नहीं हल्दी, केल नहीं मोरिंगा: विदेशी सुपरफूड्स से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं भारत के ये 5 देसी खजाने -
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी
कैसे बनें अपने बच्चों के अच्छे मित्र
बच्चे भगवान की देन हैं तथा माता-पिता इन्हें अपने बुढ़ापे का सहारा मानते हैं। लेकिन इन्हें अपने बुढ़ापे का सहारा मानने से पहले इनकी बुनियाद को पक्का करने की जरुरत है। माता-पिता अपने बच्चों से कई उम्मीदें लागाए रखते हैं। परंतु वे भूल जाते हैं कि बच्चे वही करते हैं जो माना-पिता उन्हें बचपन में सीखाते हैं। अतः बुढ़ापे में यही बातें उन पर पलटवार करती हैं। इसके अलावा इन बातों को सीखाने का तरीका भी बहुत महत्व रखता है।
क्यूं न करें बच्चे की हद से ज्यादा तारीफ
भले ही बच्चे कद व उम्र में हम से छोटे हों लेकिन अक़्ल में वे हमसे पीछे नहीं हैं। अतः अगर आप अपने बच्चे को तमीज़दार, फरमाबरदार व एक नेक इन्सान बनाना चाहते हैं तो नीचे दिए गए सुझाव आपकी कुछ मदद कर सकते हैं।

अपने बच्चों को नियंत्रित ना करें:
माता-पिता अपने बच्चों को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं। यह उनकी परवरिश की सबसे बड़ी गलती बन सकती है। बच्चों पर उतना ही नियंत्रण रखना चाहिए जितने की आवश्यकता हो। ज्यादा सख्ती व पूरी ढील बच्चों के व्यक्तित्व का सही विकास होने नहीं देती है। जो माता-पिता अपने बच्चों से ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं, अक्सर उनके बच्चे अपने मन की बात अपने माता-पिता को नहीं बता पाते हैं तथा हमेशा उनसे डरे-डरे से रहते हैं। वहीं जरुरत से अधिक खुली छूट के कारण बच्चे अपने जीवन में माता-पिता की अहमियत को ही समझ नहीं पाते हैं।

बच्चों को ड़ांटने के बजाय समझाएं:
बच्चे अपना हर काम इस दुनिया में आने के बाद सीखते हैं। इस सीखने की प्रक्रिया में वे कई गलतियां करते हैं, जिनके लिए हमें उन्हें ड़ांटने की नहीं बल्कि सही तरह से समझाने की जरुरत है। ऐसा करने के लिए आपको बहुत धैर्य से काम लेना होगा। इस उम्र में बच्चों का दिमाग पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है कि वे आपकी बात को अच्छी तरह से समझ सकें।

कभी-कभी उन्हें उपहार दें:
अक्सर हम बच्चों को मनाने के लिए उन्हें उपहार देते हैं। लेकिन अनपेक्षित समय पर दिया गया उपहार आपको अपने बच्चे के और करीब ले जाता है। बच्चे बड़े मासूम होते हैं और उपहार के ज़रिए उनके दिल तक पहुंचना बहुत आसान है। परंतु ध्यान रखें कि ये उपहार कहीं आपके बच्चे की आदतें ना बिगाड दें। आगे चलकर, ये उपहार उसकी मांगें ना बन जाएं।

अपनी गैरमौजूदगी में भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराएं:
बच्चों को आपकी मौजूदगी का एहसास केवल आपके भौतिक रुप से होने पर ही नहीं बल्कि ना होने पर भी होनी चाहिए। ऐसे एहसास के लिए आपको उनके मन में विश्वास पैदा करने की जरुरत है। अपने शब्दों से व अपने जीवन के अनुभवों से सीखी गई बातों से उनके हौसले को बुलंद करके आप उन्हें अपने साथ का आभास करा सकते हैं।



Click it and Unblock the Notifications