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आपके स्मार्टफोन यूज़ से बिगड़ सकते हैं बच्चे
एक नए अध्ययन से पता चलता है कि तकनीकी से ज्यादा जुड़े रहने के कारण आपके बच्चों को अतिसंवेदनशीलता और गुस्सा विकसित हो जाता है। कई बार वो गलत तरीके से बर्ताव भी करने लगते हैं।
क्या आप घर पर रहकर ज्यादातर समय अपने स्मार्टफोन के साथ बिताते हैं? अगर ऐसा है तो आप अपने अपने बिगड़ते बच्चों के लिए स्वयं ही जिम्मेदार हैं।
हाल ही में एक रिसर्च से ये मालूम चला है कि आपका घर पर लगातार स्मार्टफोन चलाते रहना और बच्चों को पर्याप्त समय न देना, बच्चों को बिगाड़ सकता है और उनमें बुरे व्यवहार को विकसित कर सकता है।
एक नए अध्ययन से पता चलता है कि तकनीकी से ज्यादा जुड़े रहने के कारण आपके बच्चों को अतिसंवेदनशीलता और गुस्सा विकसित हो जाता है। कई बार वो गलत तरीके से बर्ताव भी करने लगते हैं।

अमेरिका में इलिनोइस स्टेट यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर ब्रैंडन टी. मैकनियल ने इस बारे कहा है कि ''हमारे द्वारा निकाले जाने वाले निष्कर्ष, माता-पिता के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों और इसका उनके जीवन पर प्रभाव को लेकर दिए गए जो कि अभिभावकों को सतर्क करने के लिए आवश्यक हैं और ये समाज में सहयोग प्रदान करेंगे।''
घर पर जब पैरेंट्स, मोबाइल तकनीकी का इस्तेमाल करते हैं तो उनके बच्चे भी उनकी तरह की व्यवहार करते हैं और डिवाइसों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं।

ऐसे में बच्चों को हैंडल करना पैरेंट्स को मुश्किल हो जाता है क्योंकि जब उनके पास समय होता है तो बच्चे फ्री नहीं होते और जब बच्चे अपने पैरेंट्स का साथ चाहते हैं तो वो फ्री नहीं होते हैं।
जेनी रैड्सकी, बाल व्यवहार विशेषज्ञ और सीएस मॉट बच्चों के अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ है जिनका कहना है कि "हमारे बच्चों से सामाजिक और भावनात्मक जानकारी के साथ इन उपकरणों में निहित सभी महत्वपूर्ण और ध्यान-बांटने वाली जानकारी के बीच ध्यान केंद्रित करना वास्तव में बहुत मुश्किल है, और एक ही समय में उन्हें प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कराना मुश्किल है।"
अध्ययन के लिए, बाल विकास जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में, टीम ने माता और पिता दोनों पर (170 से अधिक माता-पिता) सर्वेक्षण किया जो कि अलग-अलग परिवारों से थे।
इनमें से 48 प्रतिशत परिवारों के अभिभावकों ने कहा कि घर पर वो तीन से चार बार ही फोन का इस्तेमाल करते हैं जबकि 17 प्रतिशत ने कहा कि वाे एक-आध बार ही फोन को उठाते हैं। सिर्फ 11 प्रतिशत परिवार ही ऐसे निकले जो बच्चों के साथ फोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
रिसर्च से यह भी पता चला है कि कुछ परिवारों में तकनीकी के इस्तेमाल या टीवी आदि के लिए समय निर्धारित किया गया है कि वो बच्चों को कितना समय कम से कम दें, इससे परिवार को कम से कम दिक्कतों से गुजरना पड़ता है और वो बच्चों को अचदे से पाल सकते हैं।
मैकडेनियल ने यह भी उल्लेखित किया है कि, ''अभिभावकों के द्वारा स्वयं अपने और बच्चों के लिए सीमाओं और डिजिटल सामग्रियों के उपयोग को निर्धारित करना सही रहता है ताकि वो अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकें।



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