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स्पेशल चाइल्ड की ग्रूमिंग के लिए पैरेंट्स पहले खुद को इस तरह करें ग्रूम
एक बच्चे की मानसिक बीमारी पूरे परिवार को प्रभावित करती है। किसी भी प्रकार की विकलांगता बच्चे को और उनके पैरेंट्स दोनों को मानसिक रूप से तनाव देती है। डर एक बड़ी भावना है, जो हमेशा मन में बनी रहती है।
चाहे वह आपके बच्चे के भविष्य के लिये डर हो या फिर अनजाने में आपसे कुछ गलत हो जाने का भय हो। मेडिकल सहायता लेने के अलावा आप इस तनाव को कम करने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं।

किसी अन्य अभिभावक की सहायता लें
आप अपने जैसे ही एक और पैरेंट्स की तलाश करें, जो आपकी तरह ही इस दौर से गुजर रहे हो। तब यह आपके लिये एक बड़ा आशीर्वाद हो सकता है। क्योंकि आप एक दूसरे की भावनाओं और संघर्षों को समझेंगे और उनसे सीखने के लिये और अनुभव करने के लिये अमूल्य समय होगा।
जब आप अपने साथ किसी और को भी उसी परिस्थिति का सामना करते हुए देखेंगे तो आपको एक प्रेरणा और सकारात्मकता का एहसास होगा। आप अपने बच्चों की भी आपस में दोस्ती करवा सकते हैं। उन्हे आपस में खेलने और पढ़ने की अनुमति दे सकते हैं।
आप अपने ही तरह के पैरेंटेस के ग्रुप्स से मिल सकते हैं या डॉक्टर से कहकर अपना परिचय दिलवा सकते हैं। यह एक परस्पर सहानुभूतिपूर्ण संबंध है।
ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी करें हासिल
किसी भी स्थिति में सवाल पूछने से डरे नहीं, इसके निदान, लक्षण, परिणाम आपको सब स्पष्ट होने चाहिए। कभी-कभी माता-पिता डॉक्टरों और मेडिकल टर्मिनोलॉजी से डरते हैं। अगर आप डॉक्टर से कुछ ऐसे सवाल कर लेते हैं जिसके बाद आपको लगता है कि आपने गलत पूछ लिया तो आपको माफी मांगने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आप अपने बच्चे के बारे में और अधिक जानने की चाह रखते हैं।
डॉक्टर से प्रश्न पूछना आपके बच्चे को बेहतर तरीके से समझने का पहला कदम है इसलिये डर या हिचकिचाहट को रास्ते में न आने दें। सटीक जानकारी प्राप्त करना, केवल जानकारी ही नहीं है बल्कि एक महत्वपूर्ण विचार है। तो आप अपने प्रश्न पूछें और आप जिस पर भरोसा करते हैं उससे ही पूछें। यदि आपके पास कोई विशेषज्ञ न हो तो आप गूगल का सहारा कतई न लें। आप अपने डॉक्टर की अगली अपॉइंटमेंट के लिये एक प्रश्नों की लिस्ट बना लें ताकि आप उनसे सवाल पूछ सकें। यह एक अच्छा तरीका है। भविष्य में जानकारियों के लिये सभी जवाब, टिप्स और निदान सहित सूचनाओं की एक रिकॉर्ड बुक रखना भी महत्वपूर्ण है।
करुणा से बचें
आत्म-दया एक गहरा अंधकारमय गड्ढा है, जिसमें अंदर गिरना और खो जाना आसान है, इससे बचने की ज़रूरत है। आत्मदया आपके समय को बर्बाद भी कर रही है। इससे पहले अपके मन में यह विचार आए उसे पहले ही उखाड़ फेकें। वजह चाहे जो भी हो लेकिन इससे निपटने की आवश्यकता है। इसके अलावा दूसरों की करुणा से भी बचें।
यह सिर्फ एक सहायक भावना नहीं है बल्कि सहानुभूति को महसूस करें। जब आप किसी से सहानुभूति रखते हैं तो आप यह समझने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति क्या कर रहा है, आप उनके लिये क्या महसूस कर रहे हैं। सहानुभूति को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जबकि सभी रूपों में से करुणा से बचकर रहना चाहिए।
आनंददायक होनी चाहिए थैरेपी
बच्चों के लिये और वयस्कों के लिये थैरेपी समान नहीं है। बच्चों के लिए, खेल थैरेपी है और थैरेपी एक खेल है। अगर आप अपने बच्चे को ऐसे डॉक्टर के पास ले जा रहे हैं जो आपके बच्चे को आनंददायक थैरेपी देकर सही करने की कोशिश कर रहा है, तो इसके परिणाम सार्थक होंगे। वे आपके बच्चे को चुनौती देते हैं लेकिन इस तरीके से नहीं कि बच्चा अपने आपको को हारा हुआ और निराश महसूस करे। इसके बजाय वे उन्हें उत्साहित करते हैं और चुनौतियों का सामना करने के लिये प्रेरित करते हैं।
आपको भी है थैरेपी की जरूरत
आप एक सुपरहीरो हैं। आप रोज़ाना चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरी परिस्थितियों का सामना करते हैं। और फिर भी आप दिन में बिना किसी शिकायत के अपने रोज़मर्रा के काम को पूरा करते हैं। आप वास्तव में एक मेडल के लायक हैं। लेकिन आप भी तो एक इंसान हैं। इसलिये अपने आप के लिये कुछ समय निकालें और मदद लें। थैरेपी आपके लिये एक बेहतरीन और आरामदायक अनुभव हो सकती है क्योंकि आपको बिना किसी परेशानी के कुछ समय मिलेगा। यह केवल आप और आपकी भावनाओं के लिये हैं और इसमें अड़चन के लिए कोई भी नहीं होगा। इसलिये आप भी थैरेपी की मदद ज़रूर लें।



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